Azamgarh news :फर्जी फर्मों के माध्यम से फर्जी जीएसटी बिल बनाकर लगभग ₹4.08 करोड़ की राजस्व क्षति पहुंचाने वाले गिरोह के तीन गिरफ्तार 

फर्जी फर्मों के माध्यम से फर्जी जीएसटी बिल बनाकर लगभग ₹4.08 करोड़ की राजस्व क्षति पहुंचाने वाले गिरोह के तीन गिरफ्तार 

आजमगढ़ ब्यूरो चीफ राकेश श्रीवास्तव

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आजमगढ़ डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन में आर्थिक अपराधों एवं कर चोरी से संबंधित अपराधों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के क्रम में थाना सिधारी पुलिस को बड़ी सफलता प्राप्त हुई है। थाना सिधारी पुलिस द्वारा फर्जी फर्मों का निर्माण कर फर्जी जीएसटी बिल एवं ई-वे बिल तैयार करने तथा इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का अवैध लाभ प्राप्त कर सरकार को लगभग ₹4 करोड़ 08 लाख की राजस्व क्षति पहुंचाने वाले गिरोह का खुलासा करते हुए तीन अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है।

दिनांक 08.07.2025 को प्राप्त प्रार्थना पत्र के आधार पर थाना सिधारी पर मु0अ0सं0 337/2025 धारा 319(2), 318(4), 338, 336(3), 340(2) बीएनएस बनाम आनन्द गुप्ता पुत्र दिलीप कुमार निवासी जयचन्दपुर थाना रामसनेही घाट जनपद बाराबंकी पंजीकृत किया गया था। आरोप था कि कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से फर्जी फर्मों का पंजीकरण कराकर फर्जी जीएसटी बिल एवं ई-वे बिल तैयार किए गए तथा अवैध रूप से इनपुट टैक्स क्रेडिट प्राप्त कर सरकारी राजस्व को भारी क्षति पहुंचाई गई।

विवेचना के दौरान यह तथ्य प्रकाश में आया कि अभियुक्तगण आधार कार्ड, पैन कार्ड एवं ओटीपी प्राप्त कर फर्जी रेंट एग्रीमेंट तैयार करते थे तथा उनके आधार पर बोगस फर्मों का पंजीकरण कराते थे। इन फर्मों के माध्यम से फर्जी खरीद-बिक्री दर्शाकर जीएसटी बिल एवं ई-वे बिल तैयार किए जाते थे, जिससे वास्तविक फर्मों को अवैध रूप से ITC का लाभ प्राप्त होता था और सरकार को करोड़ों रुपये की राजस्व हानि होती थी।

दिनांक 21.06.2026 को थाना सिधारी पुलिस टीम द्वारा मुकदमा उपरोक्त में वांछित अभियुक्तगण—

1. आनन्द गुप्ता पुत्र दिलीप कुमार निवासी जयचन्दपुर थाना रामसनेही घाट जनपद बाराबंकी।

2. विनय गुप्ता पुत्र स्व0 सर्वेश कुमार गुप्ता निवासी देवीगंज चौराहा थाना असन्दरा जनपद बाराबंकी।

3. मो0 कैफ पुत्र जाकिर अली निवासी अटरिया थाना भोजपुर जनपद मुरादाबाद।

को गिरफ्तार कर नियमानुसार माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

पूछताछ के दौरान अभियुक्त आनन्द गुप्ता ने बताया कि उसके नाम पर फर्म पंजीकृत कराई गई थी, जिसके बदले उसे ₹5,000 दिए गए थे।

अभियुक्त विनय गुप्ता ने स्वीकार किया कि वह विभिन्न व्यक्तियों के आधार कार्ड, पैन कार्ड एवं ओटीपी उपलब्ध कराता था तथा प्रत्येक व्यक्ति के दस्तावेज उपलब्ध कराने के बदले उसे लगभग ₹8,000 प्राप्त होते थे। अभियुक्त मो0 कैफ ने पूछताछ में बताया कि वह अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर फर्जी फर्मों का पंजीकरण, फर्जी जीएसटी बिल एवं ई-वे बिल तैयार करने तथा फर्जी खरीद-बिक्री दर्शाकर वास्तविक फर्मों को ITC का अवैध लाभ दिलाने का कार्य करता था। इस अवैध गतिविधि से अर्जित धनराशि को गिरोह के सदस्य आपस में बांट लेते थे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button