उत्तर प्रदेश में AIMIM की बढ़ती ताकत, बिजनौर में ओवैसी की सभा बनी चर्चा का केंद्र,भाजपा को हराने के लिए किसी से भी गठबंधन,राम मंदिर चंदा विवाद का… देखें वीडियो

बिजनौर में ओवैसी का शक्ति प्रदर्शन, जनसभा में उमड़ा जनसैलाब

 

बिजनौर। जलालाबाद में आयोजित एआईएमआईएम की विशाल जनसभा ने यह संकेत दिया कि पार्टी उत्तर प्रदेश में अपने संगठन और जनाधार को लगातार मजबूत करने की कोशिश में जुटी है। जनसभा में राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी के पहुंचते ही बड़ी संख्या में मौजूद समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया। सभा स्थल पर उमड़ी भीड़ ने कार्यक्रम को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना दिया।

अपने संबोधन में असदुद्दीन ओवैसी ने भाजपा और समाजवादी पार्टी दोनों पर निशाना साधते हुए कहा कि लंबे समय से मुसलमानों को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया गया, लेकिन उन्हें उचित राजनीतिक नेतृत्व और भागीदारी नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी समाज के सभी वर्गों के सम्मान, शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की लड़ाई लड़ रही है।

ओवैसी ने कहा कि एआईएमआईएम उत्तर प्रदेश में नए नेतृत्व को आगे लाने के लिए प्रतिबद्ध है और बिजनौर तथा नजीबाबाद जैसे क्षेत्रों से मजबूत जननेतृत्व तैयार किया जाएगा। उन्होंने युवाओं से लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ने और समाज की बेहतरी के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

जनसभा में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मेहताब चौहान सहित कई नेताओं ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में एआईएमआईएम का संगठन तेजी से विस्तार कर रहा है और बड़ी संख्या में लोग पार्टी की विचारधारा से जुड़ रहे हैं।

कार्यक्रम के दौरान प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए और आजाद चौक हाईवे से गुजरने वाले भारी वाहनों का रूट डायवर्ट किया गया। सभा में जिले और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एवं समर्थक मौजूद रहे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही जनसभाओं और बढ़ती सक्रियता के माध्यम से एआईएमआईएम अपनी राजनीतिक उपस्थिति मजबूत करने का प्रयास कर रही है। हालांकि किसी भी दल के जनाधार या चुनावी प्रभाव का अंतिम आकलन चुनाव परिणामों और स्वतंत्र आंकड़ों के आधार पर ही किया जा सकता है। फिर भी बिजनौर की यह जनसभा पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक आयोजन के रूप में देखी जा रही है।

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