Palamu news:सुदूर जंगल में शिक्षा की नई उम्मीद: बंसीखुर्द का एकलव्य आवासीय विद्यालय बेहतर सुविधाओं की बाट जोह रहा

सुदूर जंगल में शिक्षा की नई उम्मीद: बंसीखुर्द का एकलव्य आवासीय विद्यालय बेहतर सुविधाओं की बाट जोह रहा

सुदूर जंगल में शिक्षा की नई उम्मीद: बंसीखुर्द का एकलव्य आवासीय विद्यालय बेहतर सुविधाओं की बाट जोह रहा

 

210 आदिवासी छात्र-छात्राओं का भविष्य संवार रहा विद्यालय, बुनियादी सुविधाओं के विकास से बन सकता है राज्य का आदर्श शिक्षण संस्थान

 

संजय पांडेय@वरिष्ट पत्रकार।

पलामू जिले के मनातू प्रखंड के सुदूर वनांचल स्थित एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय, बंसीखुर्द आज आदिवासी बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है। प्रकृति की गोद में स्थित इस विद्यालय में वर्तमान में लगभग 210 आदिवासी छात्र-छात्राएं आधुनिक शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। शांत वातावरण और अनुशासित शैक्षणिक माहौल विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करता है।हालांकि विद्यालय का उद्देश्य अत्यंत सराहनीय है, लेकिन दुर्गम भौगोलिक स्थिति और आधारभूत सुविधाओं की कमी इसकी प्रगति में बाधा बन रही है। यदि इन कमियों को समयबद्ध तरीके से दूर कर दिया जाए तो यह विद्यालय न केवल पलामू, बल्कि पूरे झारखंड के लिए आदर्श एकलव्य विद्यालय का उदाहरण बन सकता है।

शिक्षा का मजबूत आधार, लेकिन सुविधाओं के विस्तार की जरूरत:

भारत सरकार द्वारा संचालित एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूल की स्थापना का उद्देश्य दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों के बच्चों को शहरों के प्रतिष्ठित विद्यालयों जैसी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। बंसीखुर्द विद्यालय भी इसी उद्देश्य को लेकर संचालित हो रहा है।स्कूल का परिसर प्राकृतिक वातावरण से घिरा हुआ है, जहां छात्र-छात्राएं नियमित अध्ययन, खेलकूद और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में भाग लेते हैं। विद्यालय प्रशासन सीमित संसाधनों के बावजूद बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए निरंतर प्रयासरत है।

दुर्गम क्षेत्र में स्थित होने से बढ़ रही चुनौतियां

स्कूल का सबसे बड़ा मुद्दा इसका भौगोलिक स्थान है। यह विद्यालय ऐसे क्षेत्र में स्थापित है जहां मुख्य सड़क तक पहुंचना आज भी आसान नहीं है। विशेषकर बरसात के मौसम में आवागमन अत्यंत कठिन हो जाता है।कई शिक्षाविदों का मानना है कि विद्यालय के स्थल चयन के समय पहुंच मार्ग और अन्य आवश्यक मानकों पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए था। अब आवश्यकता इस बात की है कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जाए।

चार किलोमीटर सड़क, पुल और पुलिया निर्माण बने प्राथमिकता

विद्यालय तक पहुंचने के लिए ग्राम बंशी से विद्यालय तक लगभग चार किलोमीटर पक्की सड़क का निर्माण अत्यंत आवश्यक माना जा रहा है। इसके साथ ही एक पुल और एक पुलिया बनने से वर्षभर आवागमन सुगम हो सकेगा।यदि यह कार्य शीघ्र पूरा हो जाता है तो विद्यार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों और आपातकालीन सेवाओं को बड़ी राहत मिलेगी।

बिजली और शुद्ध पेयजल की स्थायी व्यवस्था जरूरी

आवासीय विद्यालय होने के कारण चौबीसों घंटे बिजली और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होना आवश्यक है। वर्तमान में इन सुविधाओं को और मजबूत बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है।स्थायी विद्युत आपूर्ति, सौर ऊर्जा प्रणाली, जलापूर्ति योजना और जल शोधन संयंत्र की स्थापना से विद्यार्थियों को बेहतर वातावरण मिल सकेगा।विद्यालय परिसर की नियमित सफाई और रखरखाव भी महत्वपूर्ण विषय है। इसके लिए पर्याप्त फंड की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि छात्रावास, शौचालय, रसोईघर और पूरे परिसर की प्रतिदिन साफ-सफाई हो सके।स्वच्छ वातावरण विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और अनुशासन दोनों के लिए लाभदायक सिद्ध होगा।

स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है।

सुदूर क्षेत्र में स्थित होने के कारण स्वास्थ्य सुविधाओं को और सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता है। विद्यालय परिसर में प्राथमिक चिकित्सा कक्ष, प्रशिक्षित नर्स, आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता तथा आपातकालीन एम्बुलेंस जैसी सुविधाएं विकसित होने से बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य दोनों सुनिश्चित होंगे।समय-समय पर स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किए जाने से विद्यार्थियों को अतिरिक्त लाभ मिलेगा। बावजूद विद्यालय प्रशासन कर रहा बेहतर प्रयास करने में लगा हुआ है। विद्यालय के प्राचार्य, उप-प्राचार्य, शिक्षक एवं कर्मचारी सीमित संसाधनों के बावजूद विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं। यदि उन्हें आवश्यक आधारभूत संरचना और प्रशासनिक सहयोग प्राप्त हो तो विद्यालय का प्रदर्शन और अधिक उत्कृष्ट हो सकता है।

नियमित मॉनिटरिंग से इस स्कूल में सकारात्मक बदलाव हो सकेगा।

इस विद्यालय के पदेन चेयरमैन पलामू के उपायुक्त हैं। ऐसे में यदि जिला प्रशासन द्वारा विद्यालय की नियमित समीक्षा, निरीक्षण और आवश्यक समस्याओं के समाधान के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाई जाए तो निश्चित रूप से विद्यालय के विकास को नई गति मिल सकती है।

शिक्षा, पेयजल, सड़क, स्वास्थ्य और आधारभूत सुविधाओं से जुड़े विभागों के समन्वय से विद्यालय को मॉडल संस्थान के रूप में विकसित किया जा सकता है। यदि उक्त सुविधाओं को बहाल की जाए तो स्कूल के उद्देश्यों को प्राप्त किया जा सकेगा।विद्यालय के समग्र विकास के लिए निम्नलिखित कार्य प्राथमिकता पर किए जा सकते हैं—ग्राम बंशी से विद्यालय तक चार किलोमीटर पक्की सड़क का निर्माण, एक पुल एवं एक पुलिया का निर्माण, निर्बाध विद्युत आपूर्ति एवं सौर ऊर्जा प्रणाली, शुद्ध पेयजल एवं आधुनिक जल शोधन संयंत्र, परिसर की नियमित सफाई के लिए पर्याप्त फंड, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, नर्स एवं एम्बुलेंस सुविधा।l, खेल मैदान और खेल सामग्री का विस्तार, आधुनिक कंप्यूटर एवं विज्ञान प्रयोगशाल, समृद्ध पुस्तकालय एवं डिजिटल स्मार्ट क्लास, हाई-स्पीड इंटरनेट सुविधा और छात्र-छात्राओं के लिए करियर काउंसलिंग एवं व्यक्तित्व विकास कार्यक्रम आदि। परिसर में वृक्षारोपण, किचन गार्डन और वर्षा जल संचयन जैसी पर्यावरणीय पहल होनी चाहिए। आदिवासी शिक्षा का मजबूत केंद्र बनने की क्षमताविशेषज्ञों का मानना है कि यदि आधारभूत सुविधाओं का विस्तार समय पर किया जाए तो बंसीखुर्द का एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय आने वाले वर्षों में पलामू ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड के आदिवासी शिक्षा मॉडल के रूप में पहचान बना सकता है।यहां पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं भविष्य में प्रशासन, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, शिक्षा, खेल और अन्य क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं। इसके लिए आवश्यक है कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ बेहतर आधारभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएं। मनातू प्रखंड के जंगलों के बीच स्थित यह विद्यालय केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव है। विद्यालय में पढ़ रहे लगभग 240 बच्चों के सपनों को नई उड़ान देने के लिए सड़क, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, स्वच्छता और नियमित प्रशासनिक मॉनिटरिंग जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास समय की मांग है।यदि जिला प्रशासन, जनजातीय कार्य विभाग और संबंधित एजेंसियां समन्वित प्रयास करें तो बंसीखुर्द का यह एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय आने वाले समय में गुणवत्तापूर्ण जनजातीय शिक्षा का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभर सकता है।(लेखक संजय पांडेय वरिष्ट पत्रकार है और देश भर में कार्यरत आइडियल पत्रकार संगठन के राष्ट्रीय महामंत्री हैं)

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