Azamgarh News:सरयू की लहरों में डूबता देवरांचल, कटान पीड़ितों के जख्म पर मरहम कब?
आजमगढ़ बलरामपुर/पटवध से बबलू राय
सरयू की लहरों में डूबता देवरांचल, कटान पीड़ितों के जख्म पर मरहम कब?
आजमगढ़ जनपद में सरयू नदी की उफनती लहरें देवरांचल में लगातार अपना कहर बरपा रही हैं। नदी का कटान तेज होने से खेतों और आबादी पर खतरा बढ़ता जा रहा है। कहीं उपजाऊ जमीन नदी की धारा में समा रही है तो कहीं ग्रामीणों को अपने आशियाने की चिंता सताने लगी है। ऐसे मुश्किल वक्त में शनिवार शाम गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक नफीस अहमद ने कटान प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया।
विधायक के दौरे को लेकर ग्रामीणों को उम्मीद थी कि उनकी पीड़ा सुनी जाएगी और कटान से बचाव के लिए ठोस पहल का भरोसा मिलेगा। हालांकि, आरोप है कि विधायक प्रभावित ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनने के बजाय नदी के किनारे तक पहुंचे और मौके की स्थिति देखने के बाद वापस लौट गए। इसके बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने सरयू कटान समेत क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं के लिए प्रदेश सरकार और सरकारी तंत्र को जिम्मेदार ठहराते हुए सवाल उठाए।
विधायक ने कहा कि सरयू नदी के कटान से प्रभावित लोगों की समस्याओं को लेकर सरकार और प्रशासन को गंभीरता से कदम उठाने चाहिए। उन्होंने शासन-प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा किया और प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना जताई।
लेकिन विधायक के दौरे के बाद अब एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है—क्या महज नदी के किनारे पहुंचकर हालात देख लेना और सरकार पर आरोप लगाना ही जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है? सरयू का कटान कोई एक दिन की समस्या नहीं है। हर वर्ष नदी की धारा बदलती है और देखते ही देखते किसानों की मेहनत से तैयार खेत उसका हिस्सा बन जाते हैं। ग्रामीणों के सामने कभी जमीन बचाने की चिंता होती है तो कभी घर-परिवार की सुरक्षा की।
कटान प्रभावित ग्रामीणों की पीड़ा केवल बयानों से दूर नहीं हो सकती। उन्हें तत्काल राहत, सुरक्षा, प्रशासनिक सहयोग और कटान रोकने के लिए प्रभावी इंतजाम की जरूरत है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें आश्वासन से अधिक जमीन पर दिखाई देने वाले काम की दरकार है।
सरयू की धार लगातार मिट्टी को काटकर अपने साथ बहा रही है। नदी की लहरों में सिर्फ खेतों की मिट्टी नहीं, बल्कि ग्रामीणों की वर्षों की मेहनत, उम्मीद और भविष्य भी बहता नजर आ रहा है। ऐसे में अब सवाल सिर्फ यह नहीं कि कटान के लिए कौन जिम्मेदार है, बल्कि यह भी है कि जिम्मेदारी चाहे सरकार की हो, प्रशासन की हो या जनप्रतिनिधियों की—मुश्किल की इस घड़ी में ग्रामीणों के साथ खड़ा कौन होगा?
विधायक के दौरे और सरकार पर लगाए गए आरोपों के बाद अब ग्रामीणों की निगाहें ठोस कार्रवाई पर टिकी हैं। उन्हें राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि अपने खेत, घर और परिवार की सुरक्षा चाहिए। सरयू की लहरों के बीच यही सबसे बड़ा सवाल है कि कटान की मार झेल रहे देवरांचल को आखिर कब मिलेगी स्थायी राहत?



