जौनपुर में वर्दी की आड़ में वसूली पर SIT का शिकंजा, थानाध्यक्ष समेत दो पर 25-25 हजार का इनाम
थानेदार समेत दो पर 25 हजार का इनाम, दो आरोपितों ने कोर्ट में किया आत्मसमर्पण

आरोपी थानाध्यक्ष समेत दो पर 25 हजार का इनाम
ब्यूरो प्रमुख जौनपुर
जौनपुर। पुलिस की वर्दी और पद की आड़ में कथित जबरन वसूली और लूट के मामलों में कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। जलालपुर और सुरेरी थाने में दर्ज दो अलग-अलग मुकदमों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए सुरेरी के तत्कालीन थानाध्यक्ष उपनिरीक्षक दिव्य प्रकाश सिंह समेत दो आरोपितों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। आरोपी थानाध्यक्ष की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। वहीं जलालपुर प्रकरण में नामजद दो आरोपितों ने पुलिस की दबिशों के बीच न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया।
दोनों मामलों में पुलिस अब तक दो निलंबित सिपाहियों समेत तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस की कार्रवाई में सुरेरी थाने में तैनात रहे निलंबित सिपाही सत्येंद्र कुमार गौड़ और विष्णु सिंह की गिरफ्तारी भी शामिल है। एसआईटी की जांच में सामने आ रहे तथ्यों के आधार पर पुलिस अन्य संदिग्धों की भूमिका भी खंगाल रही है।सुरेरी थाने में 22 सितंबर को दर्ज मुकदमे में बड़ागांव, कमिश्नरेट वाराणसी निवासी राजेंद्र दूबे को नामजद किया गया है। मुकदमे में सादे कपड़ों में मौजूद बताए गए तीन-चार अज्ञात पुलिसकर्मियों तथा खाते में रकम मंगाने वाले वंशनरायन गिरी को भी आरोपित बनाया गया है।पुलिस के अनुसार, पीड़ित ने आरोप लगाया है कि 13 सितंबर को राजेंद्र दूबे ने फोन कर उसे मिलने के लिए बुलाया था। वहां मौजूद सादे कपड़ों में तीन-चार लोगों ने कथित तौर पर खुद को पुलिसकर्मी बताया और उसे वाहन में बैठाकर ले गए। आरोप है कि इसके बाद करीब 1.65 लाख रुपये की वसूली की गई और यूपीआई के जरिए वंशनरायन गिरी के खाते में रकम स्थानांतरित कराई गई।जांच में पुलिसकर्मियों की भूमिका सामने आने के बाद तत्कालीन थानाध्यक्ष दिव्य प्रकाश सिंह को निलंबित किया गया। अब एसपी कुंवर अनुपम सिंह ने आरोपी उपनिरीक्षक समेत दो आरोपितों पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। इसके बाद पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए सक्रिय हो गई है।
दूसरा मामला जलालपुर थाने से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार 17 सितंबर को मुकदमा संख्या 416/2026 दर्ज किया गया था। इसमें संकीत सिंह, विकास और चार अज्ञात लोगों को आरोपित बनाया गया है। शिकायत के मुताबिक 15 सितंबर को संकीत सिंह पीड़ित को अपने साथ ले गया था। आरोप है कि चार पहिया वाहन में पहले से मौजूद चार लोगों ने पीड़ित को जबरन वाहन में बैठाकर मारपीट की और जान से मारने की धमकी देते हुए रुपये की मांग की।आरोप के मुताबिक पीड़ित का मोबाइल अपने कब्जे में लेकर यूपीआई के माध्यम से अलग-अलग खातों में करीब 2.15 लाख रुपये स्थानांतरित कराए गए। एटीएम से रुपये निकाले जाने का भी आरोप लगाया गया है।पुलिस की लगातार दबिश के बाद इस मामले में नामजद संकीत पुत्र रविंद्र प्रताप सिंह और विकास पुत्र रविंद्र प्रताप सिंह, निवासी मय पहाड़ी पट्टी, जौनपुर ने 23 सितंबर को न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया।दोनों मामलों की गंभीरता को देखते हुए पुलिस उपमहानिरीक्षक, वाराणसी परिक्षेत्र ने 22 सितंबर को पांच सदस्यीय विशेष जांच टीम गठित की थी। अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण आतिश कुमार सिंह के पर्यवेक्षण में चल रही जांच का नेतृत्व सहायक पुलिस अधीक्षक/क्षेत्राधिकारी नगर गोल्डी गुप्ता कर रही हैं।एसआईटी ने जांच के दौरान दोनों मामलों से जुड़े आरोपों, साक्ष्यों और पैसों के लेनदेन की कड़ियों को खंगाला। पुलिस के मुताबिक इसी जांच के दौरान निलंबित सिपाही सत्येंद्र कुमार गौड़ और विष्णु सिंह की भूमिका सामने आई, जिसके बाद दोनों को गिरफ्तार किया गया।
एसआईटी अब कथित वसूली में इस्तेमाल हुए खातों, यूपीआई लेनदेन, मोबाइल नंबरों और आरोपितों के बीच संपर्क की पड़ताल कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि दोनों मामलों में कथित तौर पर वसूली गई रकम कहां-कहां पहुंची और इसमें अन्य कौन-कौन लोग शामिल थे।फिलहाल आरोपी थानाध्यक्ष दिव्य प्रकाश सिंह समेत दो आरोपित पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। 25 हजार रुपये के इनाम की घोषणा के बाद उनकी गिरफ्तारी पुलिस के लिए अगली बड़ी चुनौती बन गई है। विवेचना में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की बात पुलिस ने कही है।पुलिस ने दोनों मामलों में कार्रवाई का विस्तृत प्रेस नोट जारी किया है। हालांकि गिरफ्तार आरोपितों के फोटो, वीडियो और मीडिया बाइट अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इस संबंध में पुलिस की ओर से कोई स्पष्ट कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है। आरोपितों पर लगे आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और विवेचना पूरी होने के बाद ही होगी।



