भदोही:अल्लाह से खामोशी में बात करने का जरिया है नमाज, पाबंदी से कर अपने गुनाहों की माफी मांगें: मौलाना समद
हाजी अब्दुल वहाब चरमपोश रह. के आस्ताने पर हुआ जल्सा ईद मिलादुन्नबी

रिपोर्ट:अशरफ़ संजरी की रिपोर्ट
भदोही। मोहल्ला क़ज़ियाना शरीफ स्थित हज़रत हाजी अब्दुल वहाब चरम पोश रह. के सालाना उर्स के मौके पर जश्ने ईदमिलादुन्नबी का आयोजन किया गया। इस मौके पर हजरत अल्लामा व मौलाना अब्दुस्समद ज़ियाई ने इस्लाही तकरीर करते हुए कहा अल्लाह पाक के नजदीक वह बन्दा सबसे ज्यादा पसंदीदा है जो गुनाहों से तौबा करके अपने दिल को पाक साफ करे। कहा जब दिल गुनाहों से दागदार व मैला हो तो तौबा करके नेदामत के आंसू बहा कर अपने दिल के मेल को साफ सुथरा कर लिया करो और अपने जिस्म को पाक साफ रखो। तो अल्लाह तुम्हे अपना महबूब बन्दा बना लेगा। उन्होंने अपने बिगड़ते हुए मआशरे पर अफसोस जाहिर करते हुए कहा कि आज हमारा मआशरा बद से बदतर होता चला जा रहा है। हर घर बेनामाजी है कोई कुरआन को पढ़ने वाला नही है। बच्चे मोबाइलों में सारी-सारी रातें गुजार दे रहे हैं। हमारी मां बहने बेपर्दा होकर बाज़ारो में घूमती हुई नजर आ रही है गैरो के नजरों की शिकार हो रही है। अजान हो रही है हमारे बच्चे चाय पान की दुकानों पर गप्पा लगाते हुए नजर आ रहे हैं। कहा आज मुसलमान बदतरीन ज़िंदगी गुजार रहा है इसकी वजह है कि हमने नमाज पढ़ना छोड़ दिया है हमने कुरआन को पढ़ना छोड़ दिया है। हमारी बदतरी की जिंदगी हमने खुद ही चुन लिया। आज पूरी दुनिया मे हमें हिकारत की निगाहों से देखा जा रहा है।अल्लाह से खामोशी में बात करने का जरिया है नमाज, पाबंदी से कर अपने गुनाहों की माफी मांगें। कहा जब हम नमाज पढ़ते रहे, कुरआन पढ़ने वाले थे तब अल्लाह ने हमें हुक्मरानी अता की और जब हम कुरआन और नमाज व दीन की तालीमात से गाफिल हो गए तब अल्लाह ने हमारे ऊपर जालिम हुक्मरां मुसल्लत कर दिया आज हम दुनिया मे रुसवा होते हुए नजर आ रहे हैं। अपने मआशरे को दीनी तालीम से करो आरास्ता। कहा अपने मां बाप का फर्माबर्दार बनाओ अल्लाह के नेक बन्दों में अपना शुमार कर लो दुनिया पुकार उठेगी देखो मुसलमान जा रहा है देखो सादिक जा रहा है, देखो अमीन जा रहा है। मेम्बरे नूर पर जलवाफरोज हजरत अल्लामा व मौलाना नौशाद आलमा ने भी इस्लाही तकरीर की। वहीं शायर फ़ियाज भदोहवी, जावेद आसिम, सैयारे कमर, नेहाल हबीबी ने नाते सरवर सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम पढ़ी।



