2012 और 2019 के पॉक्सो एक्ट में जमीन-आसमान का अंतर : राधामोहन दास अग्रवाल

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नई दिल्ली, 7 फरवरी (आईएएनएस)। भाजपा सांसद राधामोहन दास अग्रवाल ने शुक्रवार को राज्यसभा में कहा कि 6 अगस्त 2019 को पॉक्सो अधिनियम में संशोधन किया गया था। साल 2012 और 2019 के बीच के पॉक्सो एक्ट में जमीन-आसमान का अंतर है।

प्राइवेट मेंबर बिल के तहत नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एसपी) गुट की डाॅ. फौजिया खान द्वारा पिछले साल फरवरी में पेश ‘लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण संशोधन विधेयक 2024’ पर चर्चा के दौरान राधामोहन दास अग्रवाल ने कहा कि पॉक्सो एक्ट में सजाएं बदली जा चुकी हैं, सजाएं सख्त हो चुकी हैं, सजा देने की समय सीमा निर्धारित की जा चुकी है। अब 16 साल से कम आयु के बच्चे से बलात्कार जैसे यौन अपराध पर कम से कम 20 साल की सजा या फिर आजीवन जेल की सजा मिलेगी। साथ ही जुर्माना लगेगा ताकि पीड़ित का मेडिकल और मानसिक तौर पर रिहैबिलिटेशन किया जा सके। गंभीर मामलों में दोषी को 20 साल तक की सामान्य कैद की जगह कड़ा सश्रम करावास दिया जाएगा। यौन शोषण के लिए छोटे बच्चों को लालच, प्रलोभन देने पर भी सजा का प्रावधान किया गया है। बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए सोशल मीडिया और पोर्नोग्राफी को लेकर भी बेहद सख्त प्रावधान किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि नए बदलावों के तहत सरकार ने प्रावधान किया है कि प्रत्येक जिले में जुवेनाइल पुलिस यूनिट लगाई जाए। एक डिप्टी एसपी स्तर का अधिकारी रखा जाए। हर थाने में एक चाइल्ड वेलफेयर पुलिस ऑफिसर की नियुक्ति की जाए।

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने यह प्रावधान 17 अक्टूबर 2022 को लागू किए हैं। उन्होंने कहा कि यह बहुत गंभीर समस्या है, जिस पर गहन विचार की आवश्यकता है।

–आईएएनएस

जीसीबी/एबीएम/एकेजे

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इनपुट. आईएएनएस के साथ

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