अरविंद केजरीवाल कर रहे हैं षड्यंत्र, राज्यसभा सीट है असल मकसद : रवनीत सिंह बिट्टू

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नई दिल्ली, 26 फरवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने बुधवार को दावा किया कि आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पंजाब के रास्ते अब राज्यसभा जाना चाहते हैं।

रवनीत सिंह बिट्टू ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से खास बातचीत के दौरान कहा कि अब तक उपचुनाव की तारीख नहीं आई है और न ही किसी को पता है कि उपचुनाव कब होंगे। लेकिन एक बात स्पष्ट है कि अरविंद केजरीवाल सांसद बनना चाहते हैं। पंजाबी में एक कहावत है कि ‘बिल्ली थैली से बाहर आ गई’, और आज यह बात सबको समझ में आ गई है कि केजरीवाल की असल योजना क्या है।

उन्होंने कहा कि गुरप्रीत गोगी जी की मृत्यु के बाद उनकी सीट पर यह सियासी खेल चल रहा है। गोगी जी का परिवार पहले ही टूट चुका है। उनकी पत्नी, जो राजनीति में सक्रिय हैं और तीन बार काउंसलर रह चुकी हैं, वह टिकट मांग रही थीं। उनके ऊपर पहले भगवान की मार पड़ी, अब केजरीवाल की। सोचिए, उस घर की क्या हालत होगी? अगर टिकट देना ही था, तो किसी कार्यकर्ता को देते। एक राज्यसभा सांसद को विधायक का टिकट क्यों? अगर संजीव अरोड़ा जीत गए, तो विधायक बनेंगे और राज्यसभा की सीट खाली होगी, जिसे केजरीवाल खुद ले सकते हैं।

बिट्टू ने कहा, “अरोड़ा को उपचुनाव में अगर हार का सामना करना पड़ा तो केजरीवाल कहेंगे कि वह विधायक की सीट भी नहीं जीत सके, सांसद क्या बनेंगे? यह उनका ‘चित भी मेरा, पट भी मेरा’ वाला खेल है। मैं भगवंत मान से कहना चाहता हूं कि आप पंजाबी हैं, थोड़ी हिम्मत दिखाइए। दिल्ली के सामने घुटने टेकना बंद कीजिए। कल उनकी नजरें झुकी थीं, शायद उन्हें पता था कि क्या होने वाला है। पंजाब का संदेश साफ है, हम दिल्ली वाले, यानी केजरीवाल को, यहां जीतने नहीं देंगे। वह राज्यसभा के लिए यह सब कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी कह रही है कि ये खबरें झूठी हैं। तो केजरीवाल खुद कह दें कि वह राज्यसभा जाना नहीं चाहते। संजीव अरोड़ा कोई जननेता नहीं, बल्कि कारोबारी हैं। यह सीट जीतें या हारें, आम आदमी को फर्क नहीं पड़ता, फर्क पड़ता है तो बस केजरीवाल को, जो राज्यसभा की कुर्सी चाहते हैं।

साल 1984 के सिख दंगे के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुक्रिया अदा करते हैं कि 41 साल बाद सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। कांग्रेस ने हमेशा सिखों के खिलाफ हो रहे अन्याय को दबाने की कोशिश की थी, लेकिन पीएम मोदी की सरकार ने सीबीआई से सबूत जुटवाकर और न्याय दिलवाकर इस मुद्दे पर अहम फैसला लिया। यह फैसला न केवल सिख समुदाय के लिए, बल्कि देश के कानून पर विश्वास को भी मजबूत करेगा। यह अल्पसंख्यक समुदाय, विशेषकर सिखों, को यह विश्वास दिलाता है कि न्याय का कोई न कोई रास्ता निकलता है और उन्हें इंसाफ मिलेगा। यह फैसला देर से सही, लेकिन महत्वपूर्ण है।”

–आईएएनएस

पीएसके/एकेजे

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इनपुट. आईएएनएस के साथ

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