देवरिया:सरकार छोड़कर समाज बनाने के कार्य में संलग्न हो गए थे बाबा राघवदास जी – प्रो.चितरंजन मिश्र

भारत की स्वतंत्रता के लिए समर्पित रहे बाबा जी - आन्जनेय दास,वैरागी रह समाज व राष्ट्र की सेवा में आजीवन संलग्न रहे बाबा राघवदास - प्रो.एस.एन चतुर्वेदी,बाबा जी में सिर्फ सेवा का भाव है समाहित - प्रो.महेश्वर मिश्र,बी.आर.डी.बी.डी.पी.जी.कालेजआश्रम बरहज में बाबा राघवदास का आयोजित हुआ 127 वीं जयंती समारोह

रिपोर्ट भगवान उपाध्याय

देवरिया:बरहज : स्थानीय बाबा राघवदास भगवानदास स्नातकोत्तर महाविद्यालय आश्रम बरहज में मंगलवार को अनंत पीठ परमहंसाश्रम के द्वितीय पीठाधीश्वर तथा पूर्वांचल के गांधी बाबा राघवदास की 127 वीं जयंती समारोह मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती एवं बाबा मंचासीन अतिथियों ने राघवदास के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन तथा पुष्पार्पण कर किया।

    मुख्य अतिथि पूर्व विभागाध्यक्ष हिंदी विभाग गोरखपुर विश्वविद्यालय तथा अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय वर्धा के पूर्व कुलपति प्रो.चितरंजन मिश्र ने कहा कि हम उनको इसलिए याद करते हैं कि उन्होंने समाज को गढ़ने का दिव्य कार्य किया है। उनकी आंखों में ऐसी करुणा दिखाई देती थी कि दूसरे लोग भी उनके साथ सेवा कार्य में लग जाते हैं। आज जहां सत्ता के लिए संघर्ष की राजनीति चरम पर है वहीं बाबा जी सरकार छोड़कर समाज बनाने के कार्य में लग गये थे।1921 में महात्मा गांधी ने गोरखपुर में आयोजित एक सभा में बाबा जी के कंधे पर हाथ रखकर कहा था कि यदि राघवदास जैसे पांच सेवक मिल जाए तो स्वराज मिल जाएगा। उन्होंने गन्ना किसानों के ऊपर कोल्हू लगाए जाने के कारण राजनीति व विधानसभा तक का त्यागकर सेवा को प्रधानता दी।
अपने आशीर्वचन में अनंत परमहंसाश्रम बरहज के पीठाधीश्वर आंजनेय दास ने कहा कि बाबा जी अनंत पीठ परमहंसाश्रम में रहते हुए भारत की स्वतंत्रता के लिए सक्रिय रहे। व जीवन पर्यन्त दरिद्र नारायण की सेवा में लगे रहे तथा विद्यालय निर्माण, कुष्ठ सेवाश्रम निर्माण, गोरक्षा, स्वच्छता जैसे कार्य कर पूर्वांचल की समृद्धि का कार्य किया। वे उन सेनानियों को आश्रम में जगह दी जिन्होंने गुलामी की बेड़ियों को तोड़ने का कार्य कर रहे थे।
विशिष्ट अतिथि दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय वाणिज्य विभाग के पूर्व अध्यक्ष एवं अधिष्ठाता प्रो.एस.एन.चतुर्वेदी  ने कहा कि बाबाजी महाराष्ट्र से पैदल चलकर 1914 में बरहज पधारे। यहां पहुंचने पर उन्हें बहुत शांति मिली तथा अनंत महाप्रभु का आशीर्वाद मिला। वे उनसे प्रभावित होकर उनके शिष्य बन गए। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र धन्य है जहां बाबा जी का पदार्पण हुआ। बाबा जी के परिजनों का प्लेग बीमारी में समाप्त होना उनके लिए काफी दुखद रहा और वे बैरागी जीवन जीकर समाज व राष्ट्र की सेवा में संलग्न हो गए। सादा जीवन उच्च विचार उनके जीवन की विशेषता रही। उन्होंने बाबा जी के सामाजिक, राजनीतिक व आध्यात्मिक जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर के भौतिक विज्ञान के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर महेश्वर मिश्र ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि बाबा राघवदास जी के कृतित्व और व्यक्तित्व में सिर्फ सेवा का भाव समाहित था। वह आजीवन मानव सेवा में संलग्न रहे। इसके लिए शिक्षण संस्थाएं, कुष्ठ सेवाश्रम, स्वच्छता कार्यक्रम आदि स्थापित करने का कार्य किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रोफेसर अजय कुमार मिश्र ने बाबा जी के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला। अतिथियों का महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. शंभुनाथ तिवारी ने माल्यार्पण करते हुए अंग वस्त्र एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। कुमारी अंकित तिवारी एवं प्रिंसी तिवारी ने बाबा जी का गीत तापसी त्यागी राघवदास.. गाया। मंगलाचरण कुमारी मोनी एवं निधि दिक्षित ने जबकि सरस्वती वंदना कुमारी नैंसी मिश्रा एवं दिव्या तिवारी ने प्रस्तुत किया। संचालन समाजशास्त्र विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ अमरेश त्रिपाठी ने किया। शंख ध्वनि  विनय कुमार मिश्र ने किया। इस दौरान प्रमुख रूप से डाॅ.विजय प्रकाश पांडेय, डाॅ.सूरज प्रकाश गुप्त, डाॅ.सज्जन कुमार गुप्ता, पारसनाथ यादव, जगदीश यादव, झब्बू प्रसाद मिश्र, डाॅ.किरन पाठक, अशोक शुक्ला, प्रेमशंकर पाठक, डाॅ.दर्शना श्रीवास्तव, डाॅ.मंजू यादव, डाॅ.ब्रजेश यादव, डॉ.धनन्जय तिवारी, डाॅ.अरविन्द पाण्डेय, डाॅ.रणधीर श्रीवास्तव, डाॅ.संजय कुमार सिंह, डाॅ.विनय तिवारी, डाॅ.गायत्री मिश्र, डाॅ.वेद प्रकाश सिंह, डाॅ.प्रभु कुमार, डाॅ.संजीव कुमार, डाॅ.अजय बहादुर, रवीन्द्र मिश्रा, मनीष श्रीवास्तव, राजीव पांडे, अनीता, आनंद मिश्रा आदि मौजूद रहे।

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