Azamgarh News: आजमगढ़ कनेक्शन, दिल्ली में चार संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार, सिकंदरपुर आईमा का युवक भी शामिल

आजमगढ़ बलरामपुर/पटवध से बबलू राय

आजमगढ़ कनेक्शन, दिल्ली में चार संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार, सिकंदरपुर आईमा का युवक भी शामिल

आजमगढ़ जनपद एक बार फिर आया सुर्खियों में, राजधानी दिल्ली में सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चार संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है। इन गिरफ्तार आरोपियों में एक युवक उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के महाराजगंज थाना क्षेत्र के सिकंदरपुर आईमा गांव का रहने वाला बताया जा रहा है। इस खुलासे के बाद एक बार फिर आजमगढ़ का नाम सुरक्षा एजेंसियों की जांच के दायरे में आ गया है।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान मोसैब अहमद के रूप में हुई है। उसके पिता इस्तखार अहमद शेख लंबे समय से मुंबई में रह रहे थे और पिछले लगभग छह वर्षों से सऊदी अरब में बताए जा रहे हैं। गांव के लोगों के अनुसार, मोसैब का परिवार पहले बेहद साधारण स्थिति में था और करीब 20 साल पहले उनका कच्चा मकान भी गिर चुका है।
बताया जा रहा है कि परिवार के कुछ सदस्य बिलरियागंज थाना क्षेत्र के नसीरपुर में भी रहते हैं, हालांकि स्थानीय पुलिस को इस संबंध में कोई ठोस जानकारी नहीं है। पुलिस की इस अनभिज्ञता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
दिल्ली की स्पेशल सेल द्वारा पकड़े गए चारों आरोपियों का संबंध अलग-अलग राज्यों से है। भुवनेश्वर का शेख इमरान
बिहार का सोहेल
मुंबई का मोहम्मद हम्माद
और आजमगढ़ का मोसैब अहमद
इस नेटवर्क के उजागर होने से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं और अन्य संभावित कड़ियों की तलाश तेज कर दी गई है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, ये सभी आरोपी कट्टरपंथी सोच को बढ़ावा देने और युवाओं को भड़काने का काम कर रहे थे। ये लोग सोशल मीडिया के गुप्त ग्रुप्स के जरिए जुड़े हुए थे, जहां जिहाद, हथियार और हिंसक गतिविधियों से संबंधित चर्चाएं होती थीं।
बताया जा रहा है कि आरोपी “गजवा-ए-हिंद” जैसी खतरनाक विचारधारा का प्रचार-प्रसार कर रहे थे और दूसरों को भी इसके लिए उकसा रहे थे।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने दिल्ली के प्रमुख और संवेदनशील स्थलों जैसे इंडिया गेट और लाल किला की रेकी की थी। इससे उनके इरादों की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
स्पेशल सेल को आरोपियों के पास से फर्जी आईडी बनाने के उपकरण और अन्य संदिग्ध सामग्री भी मिली है। हैरानी की बात यह है कि ये सभी आरोपी साधारण परिवारों से जुड़े हुए और कम शिक्षित बताए जा रहे हैं, इसके बावजूद ये तकनीकी गतिविधियों में शामिल थे।
इस पूरे मामले में बिलरियागंज थाना पुलिस की निष्क्रियता भी सवालों के घेरे में है। स्थानीय स्तर पर आरोपियों की गतिविधियों की भनक तक न लग पाना पुलिस की सतर्कता पर सवाल खड़ा करता है।
दिल्ली में हुई इस गिरफ्तारी ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि आतंकवाद के नेटवर्क अब छोटे कस्बों और गांवों तक भी अपनी पहुंच बना रहे हैं। ऐसे में स्थानीय पुलिस और खुफिया एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और सतर्कता बेहद जरूरी हो गई है।

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