Azamgarh News: बेटियों की सेहत भी जरूरी, बच्चों का भविष्य भी…”

आजमगढ़ बलरामपुर/पटवध से बबलू राय
“बेटियों की सेहत भी जरूरी, बच्चों का भविष्य भी…”
स्ट्रीट टू स्टेडियम एकेडमी में सर्वाइकल कैंसर जागरूकता सत्र, पूजा सिंह ने UPSC पेपर पर उठाए सवाल
आजमगढ़ जनपद रेलवे स्टेशन स्थित स्ट्रीट टू स्टेडियम एकेडमी में रविवार को ऐसा कार्यक्रम आयोजित हुआ, जहां बच्चों के स्वास्थ्य, भविष्य और शिक्षा व्यवस्था—तीनों मुद्दों पर गंभीर चर्चा देखने को मिली। कार्यक्रम में एक ओर जहां नौनिहालों को सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाव के प्रति जागरूक किया गया, वहीं दूसरी ओर देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा UPSC के प्रश्नपत्रों को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई।
कार्यक्रम में पहुंचे प्रसिद्ध स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. विपिन यादव तथा दुर्गा शक्ति सेवा ट्रस्ट की अध्यक्ष पूजा सिंह ने 9 से 14 वर्ष आयु वर्ग के छात्र-छात्राओं को सर्वाइकल कैंसर के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बच्चों को बेहद सरल भाषा में बताया गया कि यह बीमारी महिलाओं के लिए कितनी खतरनाक हो सकती है, लेकिन समय रहते जागरूकता और HPV वैक्सीनेशन के जरिए इससे बचाव संभव है।
डॉ. विपिन यादव ने कहा कि आज के समय में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता सबसे बड़ा बचाव है। उन्होंने बच्चों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने माता-पिता से HPV वैक्सीन के बारे में बात करें और समय पर टीकाकरण अवश्य कराएं, ताकि भविष्य सुरक्षित रह सके। उन्होंने यह भी बताया कि छोटी-सी सावधानी आने वाले जीवन को बड़ी बीमारी से बचा सकती है।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक सवाल पूछे और स्वास्थ्य संबंधी कई जानकारियां हासिल कीं। एकेडमी परिसर में जागरूकता का माहौल देखने को मिला, जहां बच्चे गंभीरता से हर बात को सुनते नजर आए।
इसी दौरान पूजा सिंह ने हाल ही में संपन्न हुई UPSC परीक्षा के प्रश्नपत्र को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि आज के बच्चे मेहनत तो कर रहे हैं, लेकिन प्रश्नपत्रों का स्तर इतना कठिन होता जा रहा है कि कई प्रतिभाशाली छात्र खुद को कमजोर समझने लगते हैं।
उन्होंने भावुक अंदाज में कहा,
“जब मेहनत करने वाला बच्चा खुद को ही कमतर समझने लगे, तब केवल परीक्षा नहीं, पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।”
पूजा सिंह ने कहा कि लोक सेवा आयोग द्वारा तैयार किए जा रहे प्रश्नपत्र अभ्यर्थियों के IQ लेवल से कहीं अधिक कठिन प्रतीत हो रहे हैं, जिससे छात्र मानसिक दबाव में आ रहे हैं और कई युवा अपनी रणनीति तक तय नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने आयोग से मांग की कि प्रश्नपत्रों का स्तर संतुलित रखा जाए, ताकि छात्रों की वास्तविक क्षमता और समझ का सही मूल्यांकन हो सके।
कार्यक्रम के अंत में बच्चों और अभिभावकों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने तथा शिक्षा में सकारात्मक सोच बनाए रखने का संदेश दिया गया। स्वास्थ्य जागरूकता और शिक्षा व्यवस्था पर हुई इस सार्थक चर्चा को उपस्थित लोगों ने काफी सराहा।



