Azamgarh News: शिकायतकर्ताओं की शिकायतें बरकरार, फाइलों में निस्तारण हुआ कई बार

शिकायतकर्ताओं की शिकायतें बरकरार, फाइलों में निस्तारण हुआ कई बार
जिस बाबू को बताया भ्रष्टाचारी, उसके साहब ही बने जांच अधिकारी
रिपोर्ट : कमलाकांत शुक्ल, महराजगंज (आजमगढ़)
अदम गोंडवी का मशहूर शेर ‘तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, मगर यह आंकड़े झूठे हैं, और दवा किताबी है ।’
संभवत: प्रशासनिक अमले की कार्यशैली पर सटीक बैठता हुआ नजर आता है । भले ही जिला प्रशासन आंकड़ों में जनसुनवाई के मामले में अव्वल स्थान दर्ज कराकर अपनी पीठ थपथपा रहा हो लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जनसुनवाई में शिकायतकर्ताओं की शिकायतें या तो बरकरार हैं अथवा वह थक हार कर बैठ चुके हैं । मामला तब और हास्यास्पद लगता है जब सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं की शिकायतें भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती है । ऐसा ही कुछ मामला बिलरियागंज विकासखंड के खानपुर भगतपट्टी गांव से जुड़ा हुआ देखने को मिला जहां गांव के रणविजय सिंह द्वारा प्रधान व सचिव पर बिना कार्य के ही भुगतान कराने और वित्तीय अनियमितता की शिकायत जिलाधिकारी के जनसुनवाई में 30 जून 2025 को की गई । शिकायत के परिपेक्ष में खंड विकास अधिकारी बिलरियागंज को विधिक कार्यवाही करने के लिए निर्देशित किया गया तो उन्होंने संबंधित सचिव की आख्या रिपोर्ट के आधार पर यह कहते हुए निस्तारण कर दिया कि विभिन्न मदों से कराए गए कार्यों का तकनीकी परीक्षण व मापी के उपरांत ही नियमानुसार भुगतान किया जाता है ।इसलिए शिकायत पोषड़ीय नहीं है । उक्त के सम्बन्ध में पुनः 13 फरवरी 2026 को गांव निवासी पूर्व मंडल उपाध्यक्ष भाजपा कमलेश सिंह ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र दिया और निस्तारण संतोषजनक न होने पर शपथ पत्र के साथ आठ बिंदुओं पर जांच हेतु आयुक्त आजमगढ़ के यहां शिकायत दर्ज कराई गयी । आयुक्त के निर्देशोपरान्त जांच टीम गठित कर जांच की गई । किंतु शिकायतकर्ता का आरोप था कि जांच में शिकायती बिंदुओं की जांच न कर एक जगह बैठकर परियोजना निदेशक के लिपिक द्वारा भ्रष्टाचार के वशीभूत मामले का निस्तारण कर दिया गया । जिसकी शिकायत आइजीआरएस पोर्टल के माध्यम से 21 अप्रैल 2026 को कुछ अन्य मामलों का भी उल्लेख करते हुए उपमुख्यमंत्री के यहां की गई । जिसे पुनः जिलाधिकारी आजमगढ़ के पास भेजा गया जिसमें परियोजना निदेशक द्वारा 21 मई 2026 की अपनी रिपोर्ट में शिकायतकर्ता पर आए दिन शिकायत करने का आरोप लगाते हुए जांच आख्या को सही करार देते हुए निस्तारण कर दिया गया । किंतु अभी भी शिकायतकर्ता का आरोप है कि मामले की जांच व निस्तारण सही ढंग से नहीं किया गया है । वैसे जो भी हो शिकायतकर्ता की शिकायतें अभी बरकरार हैं । आंकड़ों में भले ही निस्तारण करके मामले का कोरम पूरा कर लिया गया हो । अब देखना यह है कि कथित भ्रष्टाचार की सच्चाई जनता के सामने आती है अथवा नहीं ।



