Azamgarh News:विकसित कृषि संकल्प योजनान्तर्गत प्राकृतिक खेती कार्यशाला का हुआ भव्य आयोजन

आजमगढ़ बलरामपुर /पटवध से बबलू राय

विकसित कृषि संकल्प योजनान्तर्गत प्राकृतिक खेती कार्यशाला का हुआ भव्य आयोजन

प्राकृतिक खेती से बढ़ेगी भूमि की उर्वरता व अनाज की गुणवत्ता-पूर्व कैबिनेट मंत्री आनन्द स्वरूप शुक्ला

प्रगतिशील कृषकों को सम्मानित कर नि:शुल्क मिनीकिट का किया गया वितरण

500 से अधिक किसानों ने किया सहभाग, प्राकृतिक खेती की तकनीकों का दिया गया व्यावहारिक प्रशिक्षण

 

कार्यशाला में किसानों को दी गई आधुनिक एवं प्राकृतिक कृषि की जानकारी

 

आजमगढ़, 19 जून 2026।

केन्द्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर संचालित समेकित जन-कल्याण एवं जन-जागरूकता अभियान के अंतर्गत विकसित कृषि संकल्प योजना के तहत हरिऔध कला केन्द्र सभागार में प्राकृतिक खेती कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व कैबिनेट मंत्री आनन्द स्वरूप शुक्ला, पूर्व प्रदेश महामंत्री किसान मोर्चा घनश्याम पटेल, जिलाध्यक्ष ध्रुव कुमार सिंह, लालगंज के विनोद राजभर सहित अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।

 

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित घनश्याम पटेल, पूर्व प्रदेश महामंत्री किसान मोर्चा ने कृषकों को गौ-आधारित प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल उत्पादन लागत को कम करती है, बल्कि भूमि की उर्वरता एवं पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस अवसर पर विनोद राय, पूर्व क्षेत्रीय महामंत्री तथा अखिलेश मिश्र, सदस्य प्रदेश कार्य समिति ने भी किसानों को संबोधित करते हुए प्राकृतिक खेती की उपयोगिता एवं इसके व्यापक लाभों पर प्रकाश डाला।

 

कार्यशाला में जनपद के विभिन्न विकास खण्डों एवं ग्रामीण क्षेत्रों से आए 500 से अधिक किसानों एवं संबंधित व्यक्तियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को जीवामृत, बीजामृत, प्राकृतिक खाद एवं जैविक कीटनाशक तैयार करने की प्रक्रिया का ‘‘लाइव डेमो जोन’’ के माध्यम से व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिससे किसान प्राकृतिक खेती की तकनीकों को सीधे तौर पर समझ सकें और अपने खेतों में अपनाने हेतु प्रेरित हों।

 

कार्यक्रम में गौ-आधारित प्राकृतिक खेती एवं जल संरक्षण विषय पर विशेष तकनीकी सत्र आयोजित किया गया। साथ ही ‘‘कम लागत, अधिक आय’’ विषयक किसान संवाद कार्यक्रम के माध्यम से कृषकों को टिकाऊ कृषि पद्धतियों एवं आय वृद्धि के उपायों की जानकारी दी गई। क्षेत्रवार फसल आधारित प्राकृतिक खेती मॉडल भी प्रस्तुत किए गए तथा प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले सफल किसानों को सम्मानित किया गया।

 

कार्यशाला स्थल पर प्राकृतिक खाद, उन्नत बीज, जैविक कीटनाशक, मोटे अनाज (मिलेट्स), स्थानीय कृषि उत्पादों तथा आधुनिक सिंचाई तकनीकों से संबंधित आकर्षक स्टॉल लगाए गए, जहां किसानों को विभिन्न योजनाओं एवं तकनीकों की जानकारी उपलब्ध कराई गई।

 

तकनीकी सत्र में कृषि विज्ञान केन्द्र, कोटवा, आजमगढ़ के वैज्ञानिकों एवं प्रगतिशील प्राकृतिक खेती कृषक महेन्द्र सिंह द्वारा किसानों को प्राकृतिक खेती के माध्यम से आय बढ़ाने, भूमि की गुणवत्ता बनाए रखने तथा पर्यावरण संरक्षण के विषय में विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती वर्तमान समय में टिकाऊ कृषि विकास का प्रभावी माध्यम बनकर उभर रही है।

 

उप कृषि निदेशक आशीष कुमार ने किसानों को प्राकृतिक खेती की विभिन्न तकनीकों, जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत तथा अन्य जैविक उपायों के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि जनपद में प्राकृतिक खेती एवं मिलेट्स को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं तथा किसानों को निरंतर तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती को अपनाकर लाभकारी, टिकाऊ एवं पर्यावरण अनुकूल कृषि व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।

 

कार्यक्रम के दौरान कृषि एवं संबद्ध विभागों द्वारा लगाए गए विभिन्न स्टॉलों के माध्यम से कृषकों को योजनाओं, आधुनिक तकनीकों एवं कृषि नवाचारों की जानकारी प्रदान कर लाभान्वित किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करना तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना रहा। कार्यशाला में विभिन्न जन प्रतिनिधिगण और कृषक उपस्थित रहे।

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