Azamgarh news :आजमगढ़ बना ग्रामीण आवासीय सशक्तीकरण का मॉडल, हजारों परिवारों के सपनों को मिली पक्की छत

आजमगढ़ बना ग्रामीण आवासीय सशक्तीकरण का मॉडल, हजारों परिवारों के सपनों को मिली पक्की छत

सक्सेज स्टोरी

जनपद आजमगढ़ में मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण की एक मौन क्रांति – जहां हजारों परिवारों के सिर पर पक्की छत के साथ उनके सपनों को भी नया आसमान मिला है।

जनपद आजमगढ़ ने 96.23 प्रतिशत लक्ष्य पूर्ति के साथ हजारों परिवारों को कच्ची दीवारों से पक्के घरों तक पहुंचाया – यह केवल आंकड़ों की बात नहीं गरिमा की बात है

“सरकार ने हमें केवल मकान नहीं दिया, बल्कि हमारे बच्चों का भविष्य सुरक्षित किया है। अब हमें हर मौसम में घर टूटने या भीगने का डर नहीं रहता”- लाभार्थी गुड्डी

जब किसी गरीब परिवार को पक्की छत मिलती है, तो केवल दीवारें नहीं बनतीं—बनता है विश्वास, संवरता है भविष्य और मजबूत होती है आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत की नींव -जिलाधिकारी

आजमगढ़ ब्यूरो चीफ राकेश श्रीवास्तव

“पहले बरसात आते ही पूरी रात जागकर बर्तन बदलते रहते थे, ताकि टपकते पानी से बच्चों का सामान और बिस्तर बचा सकें। आज अपने पक्के घर की छत के नीचे निश्चिंत होकर सोते हैं। यह घर हमारे लिए सिर्फ मकान नहीं, हमारी सबसे बड़ी पूंजी है।”

जहानागंज विकास खण्ड के सेमा गांव की रहने वाली गुड्डी जब अपने नए पक्के आवास के सामने खड़ी होकर यह बातें कहती हैं, तो उनकी आंखों में वर्षों के संघर्ष के बाद मिली सुरक्षा और सम्मान की चमक साफ दिखाई देती है। उनके पीछे खड़ा मजबूत पक्का मकान केवल ईंट और सीमेंट का ढांचा नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की सफलता का जीवंत प्रमाण है।

संघर्षों से भरा था जीवन

गुड्डी और उनके पति दुर्गेश अनुसूचित जाति वर्ग से आते हैं। दोनों वर्षों से दैनिक मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते रहे। उनकी आय इतनी नहीं थी कि कभी अपने लिए पक्का घर बना सकें। परिवार एक जर्जर कच्चे मकान में रहता था। मिट्टी की दीवारें बारिश में गल जाती थीं, छत हर वर्ष टपकती थी और तेज हवाओं के समय पूरा परिवार भय के साये में रात गुजारता था। गर्मियों में तपिश, बरसात में पानी और सर्दियों में ठंड—हर मौसम उनके लिए नई चुनौती लेकर आता था। बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती थी। बरसात में किताबें और जरूरी सामान सुरक्षित रखना मुश्किल हो जाता था। परिवार का सबसे बड़ा सपना था—एक ऐसा घर, जहां सम्मान और सुरक्षा दोनों मिल सकें।

मुख्यमंत्री आवास योजना बनी उम्मीद की किरण

गुड्डी का चयन मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत हुआ। योजना के तहत उन्हें ₹1.20 लाख की आवासीय सहायता प्राप्त हुई। केवल आवास निर्माण ही नहीं, बल्कि योजना के अभिसरण मॉडल ने परिवार के जीवन में व्यापक परिवर्तन किया। उन्हें मनरेगा के माध्यम से 90 दिनों की अकुशल मजदूरी प्राप्त हुई, जिससे निर्माण अवधि में आय का भी सहारा मिला। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत ₹12,000 की लागत से शौचालय का निर्माण हुआ। पात्रता के अनुसार अन्य योजनाओं का लाभ भी मिला, जिससे घर केवल पक्का नहीं बना, बल्कि सुविधाओं से भी जुड़ गया।

आज मिला है सम्मान के साथ जीवन

आज गुड्डी का परिवार पक्के घर में सुरक्षित जीवन जी रहा है।

बरसात अब चिंता का कारण नहीं बनती। बच्चों की पढ़ाई नियमित हो रही है। परिवार के पास सुरक्षित रसोई, स्वच्छ शौचालय और सम्मानजनक आवास है। गांव में उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा भी बढ़ी है।

गुड्डी कहती हैं— “सरकार ने हमें केवल मकान नहीं दिया, बल्कि हमारे बच्चों का भविष्य सुरक्षित किया है। अब हमें हर मौसम में घर टूटने या भीगने का डर नहीं रहता।”

आजमगढ़ ने रचा नई उपलब्धि का इतिहास

मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के प्रभावी क्रियान्वयन में आजमगढ़ ने उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है। जनपद को 9,908 आवासों का लक्ष्य प्राप्त हुआ था, जिसके सापेक्ष 9,534 आवास पूर्ण कर लाभार्थियों को हस्तांतरित किए जा चुके हैं। अर्थात 96.23 प्रतिशत लक्ष्य पूर्ति, जो प्रदेश के उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जनपदों में आजमगढ़ की मजबूत प्रशासनिक कार्यशैली को दर्शाती है।

इन लाभार्थियों में प्राकृतिक आपदा प्रभावित परिवार, कुष्ठ रोग से प्रभावित परिवार, मुसहर समुदाय, विधवा महिलाएं, दिव्यांगजन तथा आर्थिक रूप से अत्यंत कमजोर वर्गों को प्राथमिकता दी गई।

एक योजना, अनेक सुविधाएं

मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत प्रत्येक पात्र परिवार को—

₹1,20,000 की आवासीय सहायता

मनरेगा के अंतर्गत 90 दिवस की मजदूरी

स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत ₹12,000 का शौचालय

पात्रतानुसार उज्ज्वला योजना, सौभाग्य योजना, हर घर जल सहित अन्य योजनाओं का लाभ

प्राप्त कराया गया। यही अभिसरण मॉडल इस योजना को केवल आवास निर्माण तक सीमित न रखकर समग्र ग्रामीण विकास का माध्यम बनाता है।

प्रशासनिक नेतृत्व बना सफलता की आधारशिला

इस उपलब्धि के पीछे जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार का दूरदर्शी नेतृत्व, मुख्य विकास अधिकारी परीक्षित खटाना का सतत अनुश्रवण, विकास खण्ड स्तर पर नियमित समीक्षा तथा ग्राम पंचायतों की सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण रही।

मासिक समीक्षा बैठकों, निर्माण कार्यों की सतत निगरानी, पारदर्शी लाभार्थी चयन तथा विभिन्न योजनाओं के प्रभावी अभिसरण ने आजमगढ़ को मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के सफल क्रियान्वयन का उदाहरण बना दिया।

एक घर नहीं, बदल गया पूरा जीवन

गुड्डी की कहानी हजारों लाभार्थियों की कहानी है। यह केवल एक परिवार को पक्का मकान मिलने की कहानी नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा, स्वच्छता और आत्मविश्वास से भरे नए जीवन की शुरुआत है।

जब किसी गरीब परिवार को पक्की छत मिलती है, तो केवल दीवारें नहीं बनतीं—बनता है विश्वास, संवरता है भविष्य और मजबूत होती है आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत की नींव।

आजमगढ़ में मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) ने यही मौन क्रांति की है—जहां हजारों परिवारों के सिर पर पक्की छत के साथ उनके सपनों को भी नया आसमान मिला है।

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