Azamgarh News:आस्था का केंद्र बाबा भंवरनाथ मंदिर, लेकिन पीछे का ऐतिहासिक पोखरा बदहाली का शिकार; सुंदरीकरण की उठी मांग

आजमगढ़ बलरामपुर/पटवध से बबलू राय

आस्था का केंद्र बाबा भंवरनाथ मंदिर, लेकिन पीछे का ऐतिहासिक पोखरा बदहाली का शिकार; सुंदरीकरण की उठी मांग

आजमगढ़ शहर का प्राचीन एवं आस्था का प्रमुख केंद्र बाबा भंवरनाथ मंदिर वर्षभर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना रहता है। श्रावण मास में हजारों कांवड़िए और शिवभक्त यहां जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं, जबकि मंदिर परिसर में पूरे वर्ष विवाह सहित विभिन्न धार्मिक आयोजन भी संपन्न होते हैं। लेकिन मंदिर के पीछे स्थित ऐतिहासिक पोखरा और उससे जुड़ा मार्ग आज भी उपेक्षा का दंश झेल रहा है।

मंदिर के पीछे से होकर एक मुख्य मार्ग कई गांवों और नई बसी कॉलोनियों को जोड़ता है। इसी मार्ग के किनारे स्थित पोखरा बदहाल स्थिति में है। चारों ओर झाड़-झंखाड़ फैला हुआ है, जबकि केवल एक तरफ सीढ़ियां बनी हैं। शेष तीन ओर लगातार कटान होने से पोखरे का अस्तित्व भी खतरे में पड़ता जा रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि छठ महापर्व पर बड़ी संख्या में महिलाएं इसी पोखरे में भगवान सूर्य को अर्घ्य देती हैं, लेकिन साफ-सफाई और मूलभूत सुविधाओं के अभाव में उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। शासन स्तर पर तालाबों और पोखरों के सुंदरीकरण की योजनाएं चल रही हैं, लेकिन यह ऐतिहासिक पोखरा अब तक उन योजनाओं से वंचित है।

ग्रामीणों और कॉलोनीवासियों का कहना है कि यदि इस पोखरे का समुचित सुंदरीकरण कराया जाए, चारों ओर पक्की सीढ़ियों का निर्माण हो, हरियाली विकसित की जाए और इसे पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाए तो यह शहर के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है। उनका सुझाव है कि उचित योजना के तहत यहां नौका विहार जैसी सुविधा भी विकसित की जा सकती है। मंदिर के पीछे लगे कूड़े करकट को सफाई कराया जाए।

लोगों ने यह भी बताया कि पोखरे के पास बना सुलभ शौचालय अधिकांश समय बंद रहता है। सुबह-शाम कुछ समय के लिए खुलने के बाद दिनभर उस पर ताला लटका रहता है, जिससे श्रद्धालुओं और राहगीरों को भारी असुविधा होती है।

स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि बाबा भंवरनाथ मंदिर की गरिमा के अनुरूप पीछे स्थित पोखरे का शीघ्र सुंदरीकरण कराया जाए, मंदिर के पीछे कूड़ा करकट को साफ कर कर पार्क बनवाया जाए, संपर्क मार्ग को दुरुस्त किया जाए तथा श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

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