Jharkhand News; मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण वाले दस्तावेजों को परमानेंट डॉक्यूमेंट के रूप में रखे जाएंगे
मधुलता पांडेय विशेष संवाददाता।
रांची। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण वाले दस्तावेजों को परमानेंट डॉक्यूमेंट के रूप में संरक्षित रखे जाएंगे। इस हेतु सभी जिलों में इसे डिजिटाइज करते हुए फिजिकल डॉक्यूमेंट को संधारित करने की व्यवस्था रखें। उन्होंने कहा कि मतदाता इन्यूमरेशन फॉर्म भरते समय वर्तमान के अपनी सभी जानकारियों को सही सही भरें, वर्तमान के अन्य दस्तावेज में यदि कोई त्रुटि है तो उसे केवल मिलान करने के लिए वोटर आईडी में त्रुटि वाले जानकारी न भरें। उन्होंने कहा कि मैपिंग वाले कॉलम में जानकारियों को भरते समय उसे विगत के एसआईआर सूची में जो जानकारी दी गई है उसे ठीक वैसा ही भरें। श्री के रवि कुमार जूम मीट के माध्यम से सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारी, ईआरओ, एईआरओ, उप निर्वाचन पदाधिकारियों के साथ राज्य में चल रहे मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण से संबंधित कार्यों की समीक्षा कर रहे थे ।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि झारखंड विशेष गहन पुनरीक्षण में बीएलओ द्वारा मतदाताओं के घर-घर तक दो प्रतियों में इन्यूमरेशन फॉर्म पहुंचाया जा रहा है। फॉर्म के सबसे ऊपरी हिस्से पर मतदाता के क्षेत्र की बूथ लेवल अधिकारी का नाम और मोबाइल नंबर अंकित होता है, जिससे किसी भी समस्या के समाधान के लिए उनसे संपर्क किया जा सके। फॉर्म के सबसे ऊपरी और पहले भाग में मतदाता का नाम, एपिक नंबर, पता, भाग संख्या, विधानसभा क्षेत्र और राज्य का नाम जैसी आवश्यक जानकारियां पहले से ही प्रिंटेड होती हैं। इसके साथ ही एक यूनिक क्यूआर कोड और पुरानी मुद्रित फोटो भी दी गई होती है, जिसके ठीक बगल में मतदाता को अपनी नई रंगीन पासपोर्ट साइज फोटो चिपकानी होगी या बीएलओ अपने बीएलओ ऐप में भी फोटो अपलोड कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि फॉर्म के दूसरा भाग में पिछले SIR में दर्ज विवरण को मतदाता की जन्म तिथि के अनुसार तीन अलग-अलग स्थितियों में भरना होता है:
पहली स्थिति: यदि मतदाता का जन्म 1 जुलाई 1987 से पहले भारत में हुआ है, तो प्रपत्र के बाएं हिस्से में विगत एसआईआर के मतदाता सूची के हूबहू केवल स्वयं का नाम, एपिक नंबर, पिता का नाम, संबंध, जिला, राज्य, विधानसभा क्षेत्र संख्या और भाग व क्रम संख्या दर्ज करनी होगी।
दूसरी स्थिति: यदि जन्म 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच हुआ है, तो फॉर्म के दाएं हिस्से में विगत एसआईआर के मतदाता सूची के हूबहू माता या पिता में से किसी एक का विवरण (नाम, एपिक संख्या, उनके पिता का नाम, संबंध, जिला, राज्य और पूर्व दर्ज विधानसभा क्षेत्र व भाग/क्रम संख्या) भरना होगा।
तीसरी स्थिति: यदि मतदाता का जन्म 2 दिसंबर 2004 के बाद हुआ है, तो दाएं हिस्से को एक लकीर के माध्यम से दो भागों में विभाजित करके विगत एसआईआर के मतदाता सूची के हूबहू एक तरफ पिता और दूसरी तरफ माता, दोनों का विवरण स्पष्ट रूप से भरना है।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि इन्यूमरेशन फॉर्म के तीसरा भाग में सामान्य व्यक्तिगत जानकारी भरनी है। इस भाग को भरते समय वर्तमान के अन्य दस्तावेज में यदि कोई त्रुटि है तो उसे केवल मिलान करने के लिए वोटर आईडी में त्रुटि वाले जानकारी न भरें। इस भाग में मतदाता को अपनी कुछ सामान्य और मूलभूत जानकारियां दर्ज करनी होती हैं। इसमें जन्म तिथि (DD/MM/YYYY प्रारूप में), उपलब्ध होने पर आधार नंबर (वैकल्पिक), मोबाइल नंबर, पिता/अभिभावक का नाम और उनकी एपिक संख्या (यदि उपलब्ध हो), माता का नाम और उनकी एपिक संख्या, तथा आवश्यकतानुसार पति/पत्नी का नाम व उनकी मतदाता क्रमांक संख्या दर्ज करनी होती है।
श्री के रवि कुमार न कहा कि इन्यूमरेशन फॉर्म के चौथा भाग में घोषणा और हस्ताक्षर करना है फॉर्म के इस अंतिम हिस्से में तीन महत्वपूर्ण कानूनी घोषणाएं दी गई हैं। इनमें यह प्रमाणित करना होता है कि मतदाता ने किसी अन्य देश की नागरिकता प्राप्त नहीं की है, वह किसी अन्य विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल नहीं है, और दी गई सभी जानकारियां पूरी तरह सत्य हैं। यदि मतदाता स्वयं फॉर्म भर रहा है या परिवार का कोई वयस्क सदस्य किसी सदस्य की अनुपस्थिति में इसे भर रहा है, तो उन्हें सबसे नीचे दाहिनी तरफ अपने हस्ताक्षर करने होंगे। यदि कोई अन्य वयस्क सदस्य हस्ताक्षर कर रहा है, तो उसे मतदाता से अपने संबंध का उल्लेख भी करना होगा।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी न कहा कि मतदाता इन्यूमरेशन फॉर्म को प्राप्त होते ही जितनी जल्दी हो सके अपने बीएलओ को भरकर जमा करें। उन्होंने कहा कि इस फॉर्म के साथ किसी भी प्रकार का अन्य दस्तावेज संलग्न नहीं करना है। यह प्रक्रिया केवल पात्र भारतीय नागरिकों के लिए है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत किसी भी विदेशी नागरिक द्वारा अवैध रूप से फॉर्म भरना, गलत या भ्रामक जानकारी देना, अथवा बिना हस्ताक्षर किए फॉर्म जमा न करना एक दंडनीय अपराध है। ऐसा करने वाले विदेशी नागरिकों के खिलाफ ERO द्वारा सीधे FIR दर्ज की जाएगी। उन्होंने सभी पात्र भारतीय नागरिकों से अपील की है कि मतदाता सूची को शुद्ध और सटीक बनाने के लिए इस अभियान में अपना योगदान अवश्य दें।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि आगामी 14 जुलाई को सभी जिलों में बीएलओ एवं बीएलए 2 की बैठक करते हुए चुनाव पाठशाला का आयोजन करें। उक्त चुनाव पाठशाला में एब्सेंट, शिफ्टेड, डेथ, डुप्लिकेट एवं रिफ्यूज टू साइन (गैर भारतीय) कि तैयार की हुई सूची को पढ़कर सुनाएं । उन्होंने कहा कि मतदाताओं से भरे हुए फॉर्म वापस लते हुए इसे डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया में तेजी लाएं। इस अवसर पर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने राज्य में चल रहे मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर पदाधिकारियों के शंकाओं का समाधान किया एवं दिशा निर्देश दिए।
इस अवसर पर जूम मीट के माध्यम से अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री सुबोध कुमार, राज्य ट्रेनिंग नोडल पदाधिकारी श्री देवदास दत्ता, उप निर्वाचन पदाधिकारी श्री धीरज कुमार ठाकुर, अवर निर्वाचन पदाधिकारी श्री सुनील कुमार सिंह सहित सभी जिलों के जिला निर्वाचन पदाधिकारी, ईआरओ, एईआरओ एवं उप निर्वाचन पदाधिकारी उपस्थित थे ।
( मधुलता पांडेय आइडियल पत्रकार संगठन महिला विंग की झारखंड प्रदेश प्रभारी हैं)



