Azamgarh News:आज जनता दर्शन में आई छात्रा की पढ़ाई हेतु गांव से आजमगढ़ मुख्यालय आने-जाने हेतु डीएम ने बनवाया निःशुल्क एमएसटी पास

आजमगढ़ बलरामपुर /पटवध से बबलू राय
आज जनता दर्शन में आई छात्रा की पढ़ाई हेतु गांव से आजमगढ़ मुख्यालय आने-जाने हेतु डीएम ने बनवाया निःशुल्क एमएसटी पास
डीएम के निर्देश पर एआरएम ने तत्काल बनाया निःशुल्क एमएसटी पास, आगे की शिक्षा-दीक्षा का खर्च स्वयं वहन करने की ली जिम्मेदारी
निशुल्क एमएसटी पास व आगे की पढ़ाई की जिम्मेदारी लेने पर छात्रा ने जिलाधिकारी व एआरएम को धन्यवाद व आभार व्यक्त किया
आजमगढ़, 20 अगस्त, 2026/
मा0 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की सर्वोदय एवं अन्त्योदय की कार्यभावना को जनपद आजमगढ़ में जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार के कुशल निर्देशन में प्रभावी रूप से साकार किया जा रहा है। शासन की मंशा के अनुरूप जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार द्वारा प्रत्येक कार्यदिवस पूर्वान्ह 10 से 12 बजे तक जनता दर्शन में जनसामान्य की समस्याओं एवं शिकायतों को गंभीरतापूर्वक सुना जाता है तथा पात्र व्यक्तियों की समस्याओं का त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाता है।
इसी क्रम में आज 20 अगस्त गुरुवार को जनता दर्शन में तहसील बूढ़नपुर के अतरौलिया क्षेत्र के ग्राम खानपुर फतेह निवासी मेनका प्रजापति पुत्री स्व0 अमरजीत प्रजापति ने जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार को प्रार्थना पत्र देकर अपनी आर्थिक स्थिति एवं पढ़ाई से संबंधित समस्या से अवगत कराया। प्रार्थिनी ने बताया कि वह गरीब परिवार से है और आजमगढ़ शहर में एसएससी परीक्षा की तैयारी कर रही है। प्रतिदिन अतरौलिया स्थित अपने घर से आजमगढ़ शहर आने-जाने के लिए उसे बस का किराया देना पड़ता है। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण अब उसका परिवार नियमित रूप से बस का किराया वहन करने में असमर्थ है।
प्रार्थिनी ने बताया कि यदि आवागमन का खर्च वहन नहीं हो पाया तो उसकी पढ़ाई प्रभावित होने के साथ ही आगे की शिक्षा अधूरी रह जाने का संकट उत्पन्न हो जाएगा। उसने जिलाधिकारी से मानवीय आधार पर प्रतिदिन आजमगढ़ आने-जाने के लिए निःशुल्क एमएसटी पास उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।
जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार ने छात्रा की समस्या को गंभीरता एवं संवेदनशीलता से सुना तथा उसकी पढ़ाई-लिखाई, पारिवारिक पृष्ठभूमि और आर्थिक स्थिति के संबंध में जानकारी ली। जिलाधिकारी ने कहा कि आर्थिक अभाव के कारण किसी भी विद्यार्थी की शिक्षा बाधित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने छात्रा की शिक्षा को निरंतर जारी रखने के उद्देश्य से एआरएम रोडवेज अजय सिंह को तत्काल आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी के निर्देश का तत्काल अनुपालन करते हुए एआरएम अजय सिंह ने छात्रा के लिए निःशुल्क एमएसटी पास तत्काल बनवाकर उपलब्ध कराया। इससे छात्रा को प्रतिदिन अतरौलिया से आजमगढ़ शहर आने-जाने में होने वाले आर्थिक बोझ से राहत मिली और उसकी पढ़ाई जारी रखने का रास्ता सुगम हुआ।
इतना ही नहीं, एआरएम अजय सिंह ने मानवीय संवेदना एवं सामाजिक सरोकार का परिचय देते हुए छात्रा को गोद लेते हुए उसकी आगे की शिक्षा-दीक्षा का खर्च स्वयं वहन करने की जिम्मेदारी भी ली। उनकी इस पहल से छात्रा एवं उसके परिवार को बड़ी राहत मिली है। एआरएम की इस संवेदनशील पहल की जिलाधिकारी सहित उपस्थित अधिकारियों ने सराहना की।
जिलाधिकारी ने कहा कि जरूरतमंद विद्यार्थियों की शिक्षा को आगे बढ़ाने में समाज के सक्षम एवं संवेदनशील लोगों की सहभागिता महत्वपूर्ण है। ऐसे प्रयास न केवल किसी विद्यार्थी को आर्थिक कठिनाइयों से उबारते हैं, बल्कि उसके भविष्य को संवारने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य है कि जनता की समस्याओं का समाधान केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहे, बल्कि जरूरतमंद व्यक्ति को वास्तविक राहत मिले।
निःशुल्क एमएसटी पास मिलने और आगे की शिक्षा-दीक्षा के खर्च के लिए सहयोग का भरोसा मिलने से छात्रा मेनका प्रजापति बेहद प्रसन्न हुई। उसने जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार एवं एआरएम अजय सिंह के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आर्थिक कठिनाइयों के बीच मिली यह सहायता उसके लिए बहुत बड़ी राहत है। अब वह बिना आवागमन के खर्च की चिंता किए अपनी एसएससी की तैयारी को जारी रख सकेगी और अपने भविष्य के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पूरी मेहनत करेगी।
जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनता दर्शन में प्राप्त प्रत्येक प्रार्थना पत्र को संवेदनशीलता के साथ लेते हुए पात्र व्यक्तियों की समस्याओं का त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जाए। विशेष रूप से गरीब, जरूरतमंद एवं विद्यार्थियों से संबंधित मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उन्हें शासन की मंशा के अनुरूप हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाए।
जिलाधिकारी की इस मानवीय पहल तथा एआरएम रोडवेज अजय सिंह द्वारा छात्रा की शिक्षा-दीक्षा का खर्च स्वयं वहन करने की जिम्मेदारी लेने की पहल की जनपदभर में सराहना की जा रही है। यह प्रकरण प्रशासनिक संवेदनशीलता, सामाजिक सरोकार और सामूहिक जिम्मेदारी का प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सामने आया है।



