Azamgarh News:रात की अघोषित बिजली कटौती से बिलरियागंज (पटवध कौतुक) क्षेत्र में हाहाकार
आजमगढ़ बलरामपुर/पटवध से बबलू राय
रात की अघोषित बिजली कटौती से बिलरियागंज (पटवध कौतुक) क्षेत्र में हाहाकार
शाम होते ही रोस्टिंग के नाम पर गुल हो रही बिजली, उमस भरी गर्मी में रातभर जागने को मजबूर उपभोक्ता
आजमगढ़ जनपद के विद्युत उपकेंद्र पटवध कौतुक से आपूर्ति पाने वाले दर्जनों गांवों में इन दिनों रात के समय हो रही अघोषित विद्युत कटौती ने उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दिन में बिजली आपूर्ति अपेक्षाकृत ठीक रहने के बाद जैसे ही शाम ढलती है, रोस्टिंग के नाम पर बार-बार बिजली गुल होने लगती है। इससे उमस भरी गर्मी में बच्चे, बुजुर्ग और बीमार मरीज सबसे अधिक परेशान हैं। रात में लगातार कटौती के चलते क्षेत्र के लोगों में विभाग और शासन के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि अब वह दौर भी नहीं रहा जब बिजली जाने पर लोग लालटेन या ढेवरी जलाकर रात गुजार लेते थे। लेकिन मिट्टी का तेल बंद होने के कारण अधिकांश घरों में लालटेन और डेवरी का इस्तेमाल भी संभव नहीं है। जिन घरों में इनवर्टर नहीं है, वहां लोग मोमबत्ती की रोशनी में रहने अथवा अंधेरे में रात काटने को मजबूर हैं। वहीं जिन घरों में इनवर्टर लगे हैं, बार-बार की कटौती के कारण उनकी बैटरी भी पूरी तरह चार्ज नहीं हो पा रही है।
शुक्रवार की रात कटौती का आलम यह रहा कि बिजली व्यवस्था ने लोगों की नींद ही छीन ली। उपभोक्ताओं के अनुसार शाम करीब 5:11 बजे दो घंटे की रोस्टिंग का मैसेज आया और बिजली चली गई। करीब 7:11 बजे आपूर्ति बहाल हुई, लेकिन लगभग 8:30 बजे फिर दो घंटे की रोस्टिंग का संदेश आया और बिजली गुल हो गई। रात करीब 10:30 बजे बिजली आई, लेकिन लगभग 11:30 बजे दोबारा दो घंटे की रोस्टिंग का मैसेज आने के बाद आपूर्ति बंद हो गई। इसके बाद रात करीब 1:30 बजे बिजली आई तो कुछ राहत मिली, लेकिन तड़के करीब 2:30 बजे फिर बिजली चली गई। इसके बाद लगभग 7:00 बजे बिजली आपूर्ति बहाल हुई।
उपभोक्ताओं का सवाल है कि जब हर एक-दो घंटे में बिजली काट दी जाएगी तो इनवर्टर की बैटरी आखिर चार्ज कैसे होगी? लगातार कटौती से इनवर्टर भी कुछ ही समय में जवाब देने लगते हैं। ऐसे में जिन परिवारों में छोटे बच्चे, बुजुर्ग अथवा बीमार लोग हैं, उनके लिए रात काटना बेहद मुश्किल हो जाता है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि दिन में यदि बिजली की कटौती करनी ही है तो कर दी जाए, लेकिन रात के समय कम से कम लगातार विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि दिनभर मेहनत करने के बाद लोग रात में चैन की नींद सो सकें। उमस और गर्मी के बीच पंखे और कूलर बंद होने से बच्चों और बुजुर्गों की हालत और खराब हो जाती है।
उपभोक्ताओं का आरोप है कि सरकार और विद्युत विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 20 घंटे बिजली आपूर्ति किए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे काफी अलग दिखाई दे रही है। शाम से सुबह तक लगातार कई चरणों में होने वाली कटौती ने विभाग के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस संबंध में जब विद्युत विभाग के जेई और एसडीओ से बातचीत की गई तो उनका कहना था कि रोस्टिंग ऊपर से की जा रही है। इसमें स्थानीय स्तर से कुछ नहीं किया जा सकता। अधिकारियों के इस जवाब से भी उपभोक्ताओं में निराशा है। लोगों का कहना है कि यदि विभागीय स्तर पर समस्या का समाधान नहीं हुआ तो लगातार परेशान हो रहे उपभोक्ताओं का आक्रोश कभी भी सड़क पर दिखाई दे सकता है।
क्षेत्रवासियों ने विद्युत विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि रात के समय होने वाली बार-बार की रोस्टिंग पर तत्काल रोक लगाई जाए और कम से कम रात में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि लोगों को उमस भरी गर्मी में राहत मिल सके और बच्चे, बुजुर्ग तथा बीमार मरीज चैन की नींद सो सकें।



