Azamgarh News:भटौली इब्राहिमपुर की रामलीला में जीवंत हुआ रामायण का अद्भुत प्रसंग, हनुमान के पराक्रम और लक्ष्मण के अभिनय ने लूटी वाहवाही
आजमगढ़ बलरामपुर/पटवध से बबलू राय
कम उम्र के कलाकारों ने राधेश्याम रामायण के मंचन से बांधा समां, राम-सुग्रीव मित्रता, बाली वध, सीता को रावण की धमकी और लंका दहन का दृश्य देख भावविभोर हुए दर्शक
आजमगढ़ जनपद के सगड़ी तहसील अंतर्गत अजमतगढ़ ब्लॉक के ग्राम सभा भटौली इब्राहिमपुर में आयोजित रामलीला में राम-सुग्रीव मित्रता, बाली वध, रावण द्वारा माता सीता को तलवार का भय दिखाकर विवाह के लिए विवश करने तथा हनुमान जी द्वारा लंका दहन का प्रसंग बेहद आकर्षक और भावपूर्ण रहा। गांव के युवा कलाकारों ने अपने शानदार अभिनय से मंच पर ऐसा समां बांधा कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठे।
रामचंद्र जी का आशीर्वाद लेकर हनुमान जी का लंका पहुंचना, अशोक वाटिका में माता सीता से भेंट करना और विश्वास के प्रतीक स्वरूप प्रभु श्रीराम की मुद्रिका देना दर्शकों के लिए भावुक क्षण रहा। माता सीता की आज्ञा लेकर हनुमान जी ने फल खाए, वाटिका उजाड़ी और रावण की सेना को चुनौती दी। इसके बाद लंका दहन का दृश्य इतना जीवंत रहा कि ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो साक्षात हनुमान जी मंच पर अवतरित हो गए हों।
हनुमान के रूप में प्रखर सिंह ने अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लिया, वहीं लक्ष्मण के किरदार में अंश सिंह की प्रस्तुति भी विशेष आकर्षण का केंद्र रही।** कम उम्र में संवाद अदायगी, भाव-भंगिमा और अभिनय पर उनकी पकड़ दर्शाती है कि इन बच्चों ने मंचन के लिए कितनी मेहनत और लगन से तैयारी की है।
राम के रूप में छोटू सिंह, लक्ष्मण के रूप में अंश सिंह, सीता के रूप में राजेश गुप्ता उर्फ गुड्डू गुप्ता, हनुमान के रूप में प्रखर सिंह, सुग्रीव के रूप में विश्वेश्वर सिंह, बाली के रूप में हर्षित सिंह, जामवंत के रूप में राजेश सिंह दादा तथा रावण के रूप में हरिशंकर उपाध्याय ने अपनी-अपनी भूमिकाओं को प्रभावशाली ढंग से निभाया।
विशेष बात यह है कि भटौली इब्राहिमपुर की रामलीला का मंचन राधेश्याम रामायण के संवादों और शैली पर आधारित है। यहां के युवा कलाकार तन-मन से अभ्यास कर पारंपरिक रामलीला की संस्कृति को आगे बढ़ा रहे हैं। यही वजह है कि आसपास के गांवों के साथ दूर-दराज से भी सैकड़ों की संख्या में लोग इस अनूठे मंचन को देखने पहुंचते हैं। दर्शक बच्चों की प्रतिभा और उनके अभिनय की जमकर सराहना करते हैं।
यह रामलीला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि ग्रामीण प्रतिभाओं को निखारने, नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने और आने वाली पीढ़ियों तक रामायण के आदर्शों को पहुंचाने का एक प्रेरणादायक मंच बन चुकी है। भटौली इब्राहिमपुर के इन नन्हे और युवा कलाकारों का समर्पण निश्चित रूप से प्रशंसा का पात्र है।



