लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न मिलने पर मायावती के भतीजे ने करदी ये मांग,अखिलेश यादव ने किया चौंकाने वाला दवा

भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न देने की घोषणा के बाद से यूपी में सियासत तेज हो गई है. जहां एक ओर इसको लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने चौंकाने वाला दावा किया है.तो दूसरी ओर बसपा सुप्रीमो मायावती के भतीजे आकाश आनन्द ने कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग की है. हालांकि इस मामले में मायावती ने चुप्पी साध ली है. तो वहीं अखिलेश इसे चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं.यूपी के पूर्व सीएम व सपा मुखिया अखिलेश यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि ‘यह भारत रत्न अपने वोट को बांधने के लिए दिया जा रहा है.’ अखिलेश ने ये भी कहा कि भारत रत्न सम्मान में नहीं दिया जा रहा है. बल्कि वोट को बांधने के लिए दिया जा रहा है. इसी के साथ ही बलरामपुर पहुंचे अखिलेश ने योगी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘मैंने कई बार यह कहा कि कोई पुण्य काम होने जा रहा हो और PDA के लोग, 90% आबादी वाले दु:खी हो तो कैसे पुण्य होगा. जमीन घोटाला हुआ है वह भी अगर गोंडा, बलरामपुर, अयोध्या जैसी जगह पर तो सोचिए आप कि किस नाम पर इस सरकार में इस तरह का घोटाला हो रहा है.’ इसी के साथ अखिलेश ने ये भी कहा कि इनके सांसदों की परफार्मेंस देख लीजिए, दिल्ली की सरकार उनकी रही, कहीं भी उन्होंने कोई कारखाना लगवाया हो तो बता दें. 40 लाख करोड़ का अगर इन्वेस्टमेंट यूपी में आ रहा है तो बलरामपुर, गोंडा में निवेश क्यों नहीं आ रहा?’वहीं इस मामले में आकाश आनन्द ने एक्स पर पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि “देश के करोड़ों दलितों, शोषितों और अल्पसंख्यक समाज को राजनीतिक ताकत देने वाले, सामाजिक परिवर्तन के महानायक मान्यवर कांशीराम साहेब जी को अतिशीघ्र भारत सरकार “भारत रत्न सम्मान” से सम्मानित करे. सामाजिक और आर्थिक तौर पर देश के लोगों को सशक्त करने में मान्यवर साहेब का योगदान अतुलनीय है.” बता दें कि इससे पहले बिहार के दो बार मुख्यमंत्री रहे कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न सम्मान मिलने पर केन्द्र सरकार के फैसले का बसपा सुप्रीमो मायावती ने स्वागत किया था. साथ ही मांग की थी कि दलितों एवं अन्य उपेक्षितों को आत्म-सम्मान के साथ जीने व उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए बीएसपी के जन्मदाता एवं संस्थापक कांशीराम का योगदान ऐतिहासिक व अविस्मरणीय है, जिन्हें करोड़ों लोगों की चाहत अनुसार भारत रत्न की उपाधि से सम्मानित करना जरूरी,

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