जबलपुर:भाजपा सरकार के इशारों पर मशाल जुलूस की अनुमति निरस्त कर छात्रों की आवाज दबाने का प्रयास, एनएसयूआई ने टॉर्च जलाकर दर्ज कराया विरोध
Jabalpur: In an attempt to suppress the voice of students by revoking the permission of the torch procession on the instructions of the BJP government, NSUI registered a protest by lighting torches.

जबलपुर में मध्यप्रदेश एनएसयूआई के कैंपस चलो अभियान के तहत छात्रों के हितों की रक्षा और उनके अधिकारों के लिए आयोजित मशाल जुलूस को लेकर जिला प्रशासन और भाजपा सरकार की नीयत पर सवाल खड़े हो गए हैं। एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे के उपस्थिती में जिला उपाध्यक्ष अनुज यादव के नेतृत्व मे जबलपुर में आयोजित मशाल जुलूस की अनुमति जिला प्रशासन नेमंगलवार को कार्यक्रम से महज कुछ घंटों पूर्व बिना किसी स्पष्ट कारण के निरस्त कर दी। यह कदम प्रदेश सरकार की छात्रों के प्रति द्वेषपूर्ण और तानाशाही मानसिकता को उजागर करता है। प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा पहले से दी गई अनुमति को अचानक निरस्त करना, भाजपा सरकार की दमनकारी नीतियों और छात्र विरोधी रवैये का स्पष्ट प्रमाण है। एसडीएम के द्वारा अनुमति को निरस्त करना यह दर्शाता है कि प्रदेश सरकार छात्रों की आवाज को दबाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
एनएसयूआई प्रदेशअध्यक्ष आशुतोष चौकसे ने बताया कि जिला प्रशासन ने प्रदेश सरकार के इशारों पर यह कदम उठाया है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों और छात्रों के संवैधानिक अधिकारों का सीधा हनन है। यह बेहद निंदनीय है कि छात्रों के अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने तक का अधिकार भी सरकार छीनने का प्रयास कर रही है। जिला प्रशासन की इस कार्रवाई के बावजूद छात्रों और कार्यकर्ताओं ने मशाल की जगह टॉर्च के प्रतीकात्मक स्वरूप का उपयोग करते हुए दीनदयाल चौक से एसबीआई चौक तक पैदल मार्च किया और अपना विरोध दर्ज कराया।
एनएसयूआई की प्रमुख मांगें
-पेपर लीक पर कड़ा कानून:दोषियों को 20 साल की सजा और 10 करोड़ रुपये का जुर्माना।
-छात्रवृत्ति पर लोकसेवा गारंटी: समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के साथ फर्जी छात्रवृत्तियों को रोकने के लिए सख्त कानून।
-सबको शिक्षा-सबको प्रवेश: पाठ्यक्रम में सुधार और एससी/एसटी हॉस्टलों की संख्या बढ़ाई जाए।-छात्रसंघ चुनाव: तत्काल प्रभाव से शुरू किए जाएं।
जबलपुर से वाजिद खान की रिपोर्ट



