पीएम मोदी की अप्रूवल रेटिंग बनी हुई है मजबूत, पुरुषों से अधिक महिलाओं का मिल रहा समर्थन

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नई दिल्ली, 6 मार्च (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीसरे कार्यकाल में भी अपने प्रदर्शन और लोकप्रियता के पायदान पर निरंतर स्थिर हैं। 70 प्रतिशत से अधिक महिलाओं ने उनके शासन को अपना समर्थन दिया है, यह बात इप्सोस इंडियाबस पीएम अप्रूवल रेटिंग द्वारा किए गए सर्वेक्षण में स्पष्ट हुई है।

इस सर्वेक्षण के निष्कर्षों से पता चलता है कि 10 उत्तरदाताओं में से 7 से अधिक महिलाएं मोदी सरकार के प्रदर्शन से आश्वस्त और संतुष्ट हैं।

दिलचस्प बात यह है कि प्रमुख रेटिंग एजेंसी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रदर्शन के लिए अपना समर्थन दिखाने में महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक है, क्योंकि 72 प्रतिशत महिला उत्तरदाताओं ने उनके शासन का समर्थन किया है। जबकि, 64 प्रतिशत पुरुष उत्तरदाताओं का उनको समर्थन मिल रहा है।

यह निष्कर्ष इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पिछले सर्वेक्षणों की तुलना में महिलाओं का पीएम मोदी के प्रति बढ़ते और व्यापक समर्थन को दर्शाता है।

‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसी योजनाओं के माध्यम से महिला सशक्तीकरण पर केंद्र का ध्यान, ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के माध्यम से महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रस्ताव और ‘महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास’ दृष्टिकोण के साथ अर्थव्यवस्था को आकार देने से महिलाओं का अधिक समर्थन पीएम मोदी और उनकी सरकार को मिल रहा है।

क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के संदर्भ में, पीएम मोदी की अपील और करिश्मा उत्तरी और पश्चिमी क्षेत्रों में बरकरार है, जबकि दक्षिणी क्षेत्रों में इसमें गिरावट आई है।

उत्तरी क्षेत्र के लोगों ने 86 प्रतिशत, पश्चिमी क्षेत्र के लोगों ने 74 प्रतिशत और दक्षिणी क्षेत्र के लोगों ने 32 प्रतिशत समर्थन पीएम मोदी के प्रति व्यक्त किया है।

जिन क्षेत्रों में मोदी सरकार ने रेटिंग में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है, उनमें शिक्षा, स्वच्छता और सफाई, स्वास्थ्य सेवा प्रणाली और अन्य शामिल हैं। जिन क्षेत्रों में प्रदर्शन संकेतकों पर जनता की राय विभाजित रही, उसमें प्रदूषण, गरीबी, मुद्रास्फीति, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार शामिल हैं।

श्रेणी के अनुसार, विभिन्न मापदंडों पर मोदी सरकार के लिए स्वीकृति शिक्षा में 65 प्रतिशत, स्वच्छता और सफाई में 49 प्रतिशत और स्वास्थ्य सेवा में 42 प्रतिशत रही।

गरीबी, मुद्रास्फीति और बेरोजगारी जैसे अन्य कारकों पर सरकार को सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली।

इस पर अपनी बात साझा करते हुए, इप्सोस इंडिया के ग्रुप सर्विस लाइन लीडर पारिजात चक्रवर्ती ने कहा, “इस पर अनुमोदन करने वालों, तटस्थ विचारों वाले वर्ग और असहमति रखने वालों के बीच विचार लगभग समान रूप से विभाजित हैं। इनमें से कुछ मुद्दे वैश्विक कारकों और प्रभावों की वजह से परेशान करने वाले हैं, क्योंकि भारत वैश्विक आर्थिक मंदी, वैश्विक मुद्रास्फीति की स्थिति और वैश्विक नौकरी में कटौती से अछूता नहीं है।”

–आईएएनएस

जीकेटी/

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इनपुट. आईएएनएस के साथ

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