Deoria news:भगवान के नाम स्मरण से ही सभी पापों का नाश हो जाता है

भगवान के नाम स्मरण ही सभी पापों का नाश हो जाता है। आचार्य बृजेश मणि त्रिपाठी।
देवरिया।
जनपद के ग्राम बनकटा मिश्र भाटपार रानी में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा के विश्राम दिवस पर श्रद्धालुओं को कथा का रसपान कराते हुए आचार्य बृजेश श्री त्रिपाठी ने कहा कि नाम संकीर्तनं यस्य सर्व पाप प्रणाशनम्, प्रणामो दु:ख शमनस्तं नमामि हरिं परम् ।।
नाम-संकीर्तन के द्वारा संकीर्तन करने वाले, सुनने वाले को और स्वयं भगवान को भी आनंद प्राप्त होता है। इसीलिए स्वयं भगवान वेदव्यास ने श्रीमद्भागवत महापुराण के अंतिम श्लोक में संकीर्तन की महिमा का वर्णन करते हुए लिखा है,
मैं उन परम प्रभु श्री हरि को सादर प्रणाम करता हूँ, जिनके पवित्र नामों का सामूहिक कीर्तन समस्त पापों का नाश कर देता है, तथा जिन्हें नमस्कार करने से समस्त भौतिक कष्ट दूर हो जाते हैं।
हम जी रहे हैं- यह धारणा सत्य नहीं है। सत्य तो यह है कि हम मर रहे हैं। जितने वर्ष चले गये, उतने हम मर गये। हम निरन्तर मर रहे हैं, जीवनसे दूर जा रहे हैं, पर वहम होता है कि हम जी रहे हैं।
यह संसार ‘मृत्युसंसारसागर’ है। इसमें हर चीज मर रही है। इसलिये सावधान हो जाओ। सिवाय भगवान्‌के कोई आपकी रक्षा करनेवाला नहीं है। जो सम्पूर्ण दोषोंका खजाना है, वह कलियुग बड़ी तेजीसे आ रहा है। अतः निरन्तर नामजप करते रहें। यह नामरूपी धन आप निरन्तर संग्रह करते रहें। जीवनका कोई भरोसा नहीं है। मरना निश्चित है। सब चीजें महँगी हो रही हैं। भगवान्‌का भजन भी महँगा हो रहा है! मृत्युका कोई समय निश्चित नहीं है, इसलिये हर समय भजन करते रहो – ‘सर्वेषु कालेषु मामनुस्मर’ (गीता ८।७)। हर समय भजन करना बीमा है। बीमा कराकर निश्चिन्त हो जाओ। भगवान् शंकरके लिये कुछ भीकरना, जानना और पाना बाकी नहीं है, फिर भी वे माँगते हैं-
बार बार बर मागउँ हरिष देहु श्रीरंग।
पद सरोज अनपायनी भगति सदा सतसंग॥
कथा के दौरान मुख्य यजमान सहित क्षेत्र ग्रामवासी काफी संख्या में उपस्थित रहे।

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