Deoria news:कृष्ण सुदामा मित्रता की कथा सुन भाव विभोर हुए श्रोता

कृष्ण-सुदामा मित्रता की कथा सुन भाव विभोर हुए श्रोता ।
देवरिया।
खुखुंदू: जीवन में मित्रता श्रीकृष्ण व सुदामा जैसी होनी चाहिए। कृष्ण-सुदामा जैसी मित्रता हो जाए तो दुनिया से अमीरी गरीबी व भेद भाव दूर हो जाय। श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिन कथा मर्मज्ञ नारायण दत्त ने खुखुंदू बाजार में कथा के दौरान कही। उन्होंने कहा कि भगवान अपने भक्त में उच नीच का भाव नहीं देखते। भगवान कृष्ण के मित्र रहे सुदामा एक बहुत ही गरीब ब्राह्मण परिवार से थे। बच्चों को पेट भरना भी मुश्किल हो गया था। गरीबी से तंग आकर एक दिन सुदामा की पत्‍नी शुशीला ने उनसे कहा- वह खुद भूखे रह सकती हैं, लेकिन बच्चों को भूखा नहीं देख सकतीं। सुदामा की पत्नी ने कहा- द्वारका के राजा श्रीकृष्ण आपके मित्र है। आपकी हालत देखकर बिना मांगे ही कुछ न कुछ दे देंगे। बड़ी मुश्किल से अपने सखा श्रीकृष्ण से मिलने के लिए सुदामा तैयार हुए। वह कृष्ण के पास पहुंच तो गए, लेकिन अपनी व्यथा कह न सके, लेकिन श्रीकृष्ण उनके मनोभाव जान गये और उन्होंने सुदामा को महल का राज प्रदान कर दिया। उनकी पत्नी ने कहा- हमारी गरीबी दूर कर कृष्ण ने हमारे सारे दुःख हर लिए। सुदामा को कृष्ण का प्रेम याद आया। कृष्ण व सुदामा की कथा सुन श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे।कथा समापन के साथ ही प्रसाद वितरण का कार्यक्रम आयोजित किया गया।इस‌ दौरान डॉ मृत्युंजय अमृत त्रिपाठी, भोलेनाथ त्रिपाठी, धरनी धर तिवारी, हरिओम मद्धेशिया, संजय त्रिपाठी, सुभाष मद्धेशिया, नारद मद्धेशिया, प्रमोद मद्धेशिया, नीरज श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।

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