Deoria news, भगवान कृष्ण रुक्मणी विवाह प्रसंग को सुन हर्षित हुए श्रद्धालु
भगवान कृष्ण रुक्मणी के विवाह के प्रसंग सुनकर हर्षित हुए श्रद्धालु।
देवरिया।
बरहज नगर , नंदना वार्ड पश्चिम, डॉक्टर ओमप्रकाश शुक्ला के निज निवास पर चल रहे श्रीमद्भागवत ने, श्रद्धालुओं को कथा का रसपानकरते हुए डॉ श्री प्रकाश मिश्रा ने कथा के विश्राम दिवस पर कहा कि
रुक्मणी जी महालक्ष्मी है भगवान कृष्ण नारायण के अवतार हैं इसलिए महालक्ष्मी नारायण का ही वरण करती हैं कमी शिशुपाल को नहीं कथा को आगे बढ़ते हुए उन्होंने कहा कि शास्त्रों में लक्ष्मी के तीन रूप बताए गए हैं लक्ष्मी अलक्ष्मी महालक्ष्मी, नीति और अनीति पूर्वक प्राप्त धन साधारण लक्ष्मी है जिसका कुछ सदुपयोग भी होगा और कुछ दुरुपयोग भी होगा धर्म के अनुसार प्राप्त धन महालक्ष्मी है महालक्ष्मी नारायण को ही प्राप्त हो सकती हैं आगे उन्होंने कहा कि भीष्म राजा के पंच पुत्र थे सबसे जेष्ठ पुत्र का नाम रुक्मी व कन्या का नाम रुक्मणी था रुक्मणी भगवान श्री कृष्ण की कथा सुनकर पति के रूप में मन ही मन-बरण कर लिया, यह जानकर रुक्मी अपनी बहन का विवाह शिशुपाल से तय कर बरात सहित आने का निमंत्रण दे दिया शिशुपाल बारात लेकर आ भी गया रुक्मणी ने सुखदेव नामक ब्राह्मण देवता को बुलाकर सात श्लोक द्वारका लिखा हुआ पत्र देकर श्री कृष्णा को देने का आग्रह किया पत्र लेकर रातों-रात द्वारिका पुरी में कृष्ण को दे दिया पत्र पाकर इस समय द्वारिका से विदर्भ नगरी में आकर जरासंध शिशुपाल आदि राजाओं को हराकर रुक्मणी सहित द्वारिका में आकर पानी ग्रहण संस्कार के द्वारा भगवान श्री कृष्ण ने विवाह किया।
कथा के इस अवसर पर मुख्य यजमान डॉ ओमप्रकाश शुक्ला ने भगवान कृष्ण रुक्मणी का कन्यादान समस्त पुत्र और पुत्र वधुओं के साथ कर अपने को धन्य हो गए
कार्यक्रम के अंतिम दिन जयप्रकाश शुक्ला, मनीष शुक्ला ,सुधांशु शुक्ला, स्वधा शुक्ला, हिमांशु शुक्ला ,कृतिका शुक्ला, राज कोकिल शुक्ला, देवेंद्र, नागेंद्र ,अनिल, सच्चिदानंद ,वीरेंद्र ,प्रदीप, अजय ,अमित ,ऋषभ, धर्मेश ,अभिषेक ,अनुज, प्रियांशु, आरव, विराज, सिया, निर्मल गुप्ता, परशुराम पांडे ,विश्राम शुक्ला ,बच्चा उपाध्याय, प्रभु नाथ शर्मा ,कृष्ण मुरारी तिवारी, कमलकांत कुशवाहा ,तारकेश्वर शुक्ला, केशव शुक्ला, जय हरी शुक्ला ,प्रदीप गुप्त, अभिषेक जायसवाल, बलभद्र तिवारी ,डॉक्टर महंत प्रसाद कुशवाहा, सहित अन्य श्रद्धालुओं काफी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के विश्राम दिवस पर उर्मिला मिश्रा विनय कुमार मिश्र शकुंतला मिश्रा में मुख्य आचार्य श्री प्रकाश मिश्र सहित सभी सहयोगियों को अंग वस्त्र से सम्मानित किया।



