Azamgarh News: नियमों की अनदेखी पर बड़ी कार्रवाई,प्रभारी DIOS के खिलाफ एफआईआर, संस्कृत विद्यालय में अवैध अनुमोदन का मामला

आजमगढ़ बलरामपुर से बबलू राय

आजमगढ़ जनपद के श्री देवानन्द संस्कृत उच्च माध्यमिक विद्यालय, दानशनिचरा रामगढ़ में प्रधानाचार्य एवं शिक्षकों के कथित नियमविरुद्ध अनुमोदन के प्रकरण ने तूल पकड़ लिया है। मामले में संयुक्त शिक्षा निदेशक (जेडी) आजमगढ़ मंडल नवल किशोर की तहरीर पर शहर कोतवाली में प्रभारी जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) आजमगढ़ वीरेन्द्र प्रताप सिंह के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने प्रकरण की जांच शुरू कर दी है।
तहरीर में उल्लेख किया गया है कि विद्यालय में रिकी यादव (प्रधानाचार्य), प्रियंका (साहित्य) तथा अल्का त्रिपाठी (साहित्य) के अनुमोदन की प्रक्रिया उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद अधिनियम-2000 एवं विनियमावली-2009 के निर्धारित प्रावधानों का पालन किए बिना पूरी की गई। संबंधित विद्यालय वर्तमान में अनुदान सूची से बाहर है और अनुदान बहाली का मामला शासन स्तर पर विचाराधीन है।
जांच में यह तथ्य सामने आया कि विद्यालय को वर्ष 2015 में अनुदान सूची में शामिल किया गया था, लेकिन 2016 में प्राप्त शिकायतों के आधार पर अनुदान रोक दिया गया। इसके बाद विद्यालय प्रबंधन ने अनुदान बहाली के लिए शासन को प्रत्यावेदन भेजा, जिस पर अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। ऐसे में अनुदान बहाली लंबित रहने के बावजूद प्रभारी DIOS द्वारा केवल विद्यालय प्रबंधक के पत्र के आधार पर अनुमोदन जारी कर देना अधिकार क्षेत्र से बाहर और नियमों के विपरीत माना गया है।
प्रभारी DIOS की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण में कहा गया कि संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय में तैनात प्रधान सहायक विधिचन्द यादव ने उन्हें गुमराह कर हस्ताक्षर करा लिए। वहीं, प्रधान सहायक ने अपने जवाब में किसी भी प्रकार की भूमिका से स्पष्ट इंकार किया है। दोनों पक्षों के स्पष्टीकरण का परीक्षण करने के बाद संयुक्त शिक्षा निदेशक ने पाया कि पहले अनुमोदन जारी किया गया और बाद में उसे निरस्त कर दिया गया, जो गंभीर प्रशासनिक अनियमितता की श्रेणी में आता है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जेडी द्वारा मुकदमा दर्ज कराने की संस्तुति की गई, जिस पर शहर कोतवाली पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई प्रारंभ कर दी है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जांच के निष्कर्ष के आधार पर जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ विभागीय तथा विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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