आजमगढ़:बंदरों का आतंक: दो माह में 100 से अधिक लोग हुए हमले का शिकार, घर से निकलना हुआ मुश्किल
Azamgarh: Monkey terror: Over 100 people attacked in two months, making it difficult to leave home.

बरदह/आजमगढ़। बरदह गांव और बाजार में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले दो महीनों के दौरान 100 से अधिक बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और अन्य लोग बंदरों के हमले का शिकार हो चुके हैं। स्थिति यह हो गई है कि लोगों में घर से बाहर निकलने तक का डर बैठ गया है। खासकर छोटे बच्चों और महिलाओं को बंदर अधिक निशाना बना रहे हैं।ग्रामीणों के अनुसार बंदरों के झुंड सुबह से लेकर शाम तक बाजार और गांव में घूमते रहते हैं। कई बार राह चलते लोगों पर अचानक हमला कर देते हैं। बाजार से खाने-पीने का सामान लेकर घर जाना भी मुश्किल हो गया है। लोगों का कहना है कि बंदरों के भय से बच्चों को अकेले बाहर भेजने से भी डर लगने लगा है।
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बंदरों के हमले में घायल होने वालों में विशाल तिवारी, हेमंत तिवारी, , सावित्री, संजना, आरती, विनय विश्वकर्मा, अशोक तिवारी, प्रमोद तिवारी सहित सैकड़ों लोग शामिल हैं, जिन्होंने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर एंटी रेबीज के इंजेक्शन लगवाए हैं।
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ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग से शिकायत करने पर अधिकारियों ने इसे ग्राम पंचायत का मामला बताया, जबकि ग्राम पंचायत के अधिकारियों का कहना है कि बंदरों को पकड़ना वन विभाग की जिम्मेदारी है। दोनों विभागों के बीच जिम्मेदारी तय न होने से समस्या जस की तस बनी हुई है।ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर भी शिकायत दर्ज कराई है और प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की है।
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बरदह के अधीक्षक डॉ. सोमेश रंजन मिश्रा ने बताया कि पिछले दो महीनों में बंदरों के काटने के मामलों में काफी वृद्धि हुई है। सभी घायलों को एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्ध कराई जा रही है तथा निर्धारित डोज भी लगाई जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते बंदरों के आतंक पर नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और वन विभाग से बंदरों को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर भेजने तथा लोगों को इस समस्या से शीघ्र राहत दिलाने की मांग की है।



