Azamgarh news:तालाब की सरकारी भूमि पर अतिक्रमण का मामला: नगर पंचायत अध्यक्ष पर आरोप, जांच शुरू

तालाब की सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप: लेखपाल ने नगर पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ दी तहरीर, जांच शुरू; आरोपों को अध्यक्ष ने बताया बेबुनियाद

माहुल/आजमगढ़। आजमगढ़ जनपद के अहिरौला थाना क्षेत्र स्थित माहुल नगर पंचायत में सरकारी तालाब की भूमि पर कथित अवैध कब्जे का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। हल्का लेखपाल द्वारा नगर पंचायत अध्यक्ष लियाकत अली के विरुद्ध गंभीर आरोप लगाते हुए अहिरौला थाने में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज करने तथा विधिक कार्रवाई की मांग किए जाने के बाद प्रशासनिक और राजस्व महकमे में हलचल तेज हो गई है। मामले को लेकर पुलिस और राजस्व विभाग ने जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। वहीं नगर पंचायत अध्यक्ष ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार, तथ्यहीन और राजनीतिक तथा व्यक्तिगत द्वेष से प्रेरित बताते हुए खारिज कर दिया है।मामले के अनुसार, राजस्व विभाग के हल्का लेखपाल द्वारा थानाध्यक्ष अहिरौला को दिए गए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि राजस्व ग्राम माहुल के अभिलेखों में सरकारी तालाब के रूप में दर्ज भूमि पर नगर पंचायत अध्यक्ष लियाकत अली द्वारा अवैध रूप से निर्माण कराया गया है। शिकायत में दावा किया गया है कि जिस गाटा संख्या की भूमि राजस्व अभिलेखों में तालाब के रूप में दर्ज है, उसी भूमि पर स्थायी निर्माण कर मकान बना लिया गया है, जो सरकारी संपत्ति पर अतिक्रमण की श्रेणी में आता है।लेखपाल ने अपने प्रार्थना पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि संबंधित व्यक्ति पूर्व में ग्राम प्रधान रह चुके हैं और अपने प्रभाव का उपयोग करते हुए सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर कब्जा किया गया। शिकायत के अनुसार, केवल एक स्थान ही नहीं बल्कि तालाब की अन्य भूमि पर भी अवैध अतिक्रमण किए जाने की बात सामने आई है। लेखपाल का कहना है कि इस प्रकार के कब्जे से सरकारी भूमि का स्वरूप प्रभावित हुआ है तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा है।

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उन्होंने संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कराते हुए विधिक कार्रवाई करने की मांग की है।राजस्व विभाग की ओर से दी गई शिकायत के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। थानाध्यक्ष अहिरौला मंतोष सिंह ने बताया कि हल्का लेखपाल की ओर से शिकायत प्राप्त हुई है। शिकायत के आधार पर तथ्यों की जांच की जा रही है। यदि जांच में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।दूसरी ओर, नगर पंचायत अध्यक्ष लियाकत अली ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों का स्पष्ट रूप से खंडन किया है। उनका कहना है कि उन्होंने किसी भी सरकारी तालाब अथवा सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जा नहीं किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग व्यक्तिगत और राजनीतिक कारणों से उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं। अध्यक्ष ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार हैं और जांच होने पर सच्चाई स्वयं सामने आ जाएगी।नगर पंचायत अध्यक्ष का कहना है कि यदि किसी प्रकार की जांच कराई जाती है तो वह उसका पूरा सहयोग करेंगे। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि बिना जांच के किसी भी व्यक्ति को दोषी मानना उचित नहीं होगा। उन्होंने भरोसा जताया कि जांच के बाद सभी आरोप असत्य साबित होंगे।इस पूरे मामले पर उपजिलाधिकारी फूलपुर अशोक कुमार ने कहा कि उन्हें प्रारंभिक स्तर पर शिकायत की जानकारी मिली है।

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यदि लेखपाल द्वारा विधिवत शिकायत प्रस्तुत की गई है तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि सरकारी तालाब की भूमि पर अतिक्रमण हुआ है तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जाएगी तथा सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी.गौरतलब है कि प्रदेश सरकार द्वारा पिछले कुछ वर्षों से सरकारी भूमि, ग्राम समाज की जमीन, तालाब, चारागाह, सार्वजनिक रास्तों और अन्य सार्वजनिक उपयोग की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। राजस्व विभाग समय-समय पर ऐसे मामलों की जांच कर रिपोर्ट तैयार करता है और जहां भी अवैध कब्जे की पुष्टि होती है, वहां प्रशासन द्वारा कार्रवाई की जाती है। इसी क्रम में माहुल नगर पंचायत का यह मामला भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.विशेषज्ञों का मानना है कि तालाब केवल जल संरक्षण का साधन नहीं हैं, बल्कि भूजल स्तर बनाए रखने, वर्षा जल के संचयन और पर्यावरण संरक्षण में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए न्यायालयों और शासन स्तर पर भी समय-समय पर तालाबों और अन्य जलाशयों की भूमि को संरक्षित रखने तथा अतिक्रमण हटाने के निर्देश जारी किए जाते रहे हैं।

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ऐसे में यदि किसी सरकारी तालाब की भूमि पर अवैध निर्माण या कब्जा पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है कि वे नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करें।स्थानीय लोगों के बीच भी इस मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोगों का कहना है कि यदि वास्तव में सरकारी भूमि पर कब्जा हुआ है तो प्रशासन को निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जाना चाहिए, ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय न हो।कानूनी जानकारों का कहना है कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे के मामलों में राजस्व अभिलेख, स्थल निरीक्षण, सीमांकन और अन्य दस्तावेज महत्वपूर्ण साक्ष्य होते हैं। इन्हीं के आधार पर यह तय किया जाता है कि संबंधित भूमि पर वास्तव में अतिक्रमण हुआ है या नहीं। यदि जांच में आरोप सिद्ध होते हैं तो एफआईआर दर्ज होने के साथ-साथ राजस्व विभाग द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी की जा सकती है।फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और तथ्यों के आधार पर की जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी। वहीं नगर पंचायत अध्यक्ष अपने ऊपर लगे आरोपों को लगातार निराधार बता रहे हैं। ऐसे में अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप सही हैं या नहीं।फिलहाल पुलिस और राजस्व विभाग दोनों स्तरों पर कार्रवाई जारी है।

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यदि जांच में सरकारी तालाब की भूमि पर अवैध कब्जे की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के साथ-साथ सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने की कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी। वहीं यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे प्रकरण ने माहुल नगर पंचायत सहित आसपास के क्षेत्र में व्यापक चर्चा का विषय बना दिया है।थाना अध्यक्ष अहिरौला का कहना है लेखपाल द्वारा प्रार्थना पत्र दिया गया है जांच कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी उठाओ

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