आजमगढ़ में हत्या के तीन दोषियों को आजीवन कारावास, 50-50 हजार रुपये जुर्माना
Three murder convicts in Azamgarh were sentenced to life imprisonment and a fine of Rs 50,000 each.

आजमगढ़, 10 जुलाई 2026।जनपद आजमगढ़ पुलिस के “ऑपरेशन कनविक्शन” अभियान के तहत अपराधियों को सजा दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल हुई है। पुलिस की गुणवत्तापूर्ण विवेचना,मॉनिटरिंग सेल की प्रभावी निगरानी और अभियोजन पक्ष की मजबूत पैरवी के परिणामस्वरूप हत्या के एक मामले में न्यायालय ने तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही न्यायालय ने तीनों दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।जिला एवं सत्र न्यायालय, आजमगढ़ द्वारा सुनाए गए इस महत्वपूर्ण फैसले के बाद पुलिस विभाग ने इसे न्यायिक प्रक्रिया में प्रभावी पैरवी और बेहतर अनुसंधान का परिणाम बताया है। पुलिस के अनुसार, इस कार्रवाई से अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान को मजबूती मिली है और पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम पूरा हुआ है।
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पुरानी रंजिश में हुई थी हत्या
यह मामला थाना अहरौला क्षेत्र से संबंधित है। पुलिस के अनुसार, दिनांक 30 सितंबर 2024 को थाना अहरौला में आलमपुर निवासी विनोद चौहान पुत्र स्वर्गीय श्रीराम चौहान द्वारा लिखित तहरीर दी गई थी। तहरीर में आरोप लगाया गया था कि पुरानी रंजिश को लेकर आरोपियों ने उनके पिता श्रीराम चौहान की गोली मारकर हत्या कर दी।वादी विनोद चौहान की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी। इस मामले में आरोप लगाया गया था कि आलमपुर निवासी शुभम चौहान पुत्र सुरेन्द्र, राम सेवक चौहान पुत्र छांगुर और सुरेन्द्र पुत्र राम सेवक चौहान ने मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया।पुलिस ने मामले की विवेचना करते हुए घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों, गवाहों के बयान और अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों को एकत्र किया। जांच के दौरान आरोपियों के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया।
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थाना अहरौला में दर्ज हुआ था मुकदमा
पुलिस के अनुसार, इस संबंध में थाना अहरौला पर मुकदमा अपराध संख्या 417/2024 पंजीकृत किया गया था। आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं तथा आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई की गई थी।मामले की विवेचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर जांच प्रक्रिया को गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा किया गया। पुलिस की मॉनिटरिंग सेल द्वारा मुकदमे की लगातार निगरानी की गई, जिससे न्यायालय में मजबूत पैरवी सुनिश्चित हो सके।12 गवाहों की हुई गवाहीमुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष द्वारा कुल 12 गवाहों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। गवाहों के बयान, पुलिस विवेचना के दौरान जुटाए गए साक्ष्य और अभियोजन पक्ष की प्रभावी दलीलों के आधार पर न्यायालय ने पूरे मामले की सुनवाई की।अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष घटना से संबंधित सभी महत्वपूर्ण तथ्यों को मजबूती के साथ रखा। पुलिस की ओर से उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर न्यायालय ने आरोपियों को हत्या के अपराध में दोषी पाया।
न्यायालय ने सुनाई उम्रकैद की सजा
दिनांक 10 जुलाई 2026 को जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट, आजमगढ़ ने मामले में फैसला सुनाते हुए तीनों आरोपियों को दोषसिद्ध घोषित किया।न्यायालय ने आरोपी शुभम चौहान पुत्र सुरेन्द्र, राम सेवक चौहान पुत्र छांगुर और सुरेन्द्र पुत्र राम सेवक चौहान, सभी निवासी आलमपुर थाना अहरौला जनपद आजमगढ़ को हत्या के अपराध में दोषी मानते हुए प्रत्येक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।इसके अलावा न्यायालय ने तीनों दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड जमा न करने की स्थिति में अतिरिक्त दंड का प्रावधान किया गया है।
पुलिस की प्रभावी पैरवी से मिली सफलता
आजमगढ़ पुलिस ने इस निर्णय को “ऑपरेशन कनविक्शन” अभियान के तहत महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य गंभीर अपराधों में संलिप्त अपराधियों को न्यायालय से कठोर सजा दिलाना है, जिससे अपराधियों में कानून का भय बना रहे और पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके।पुलिस की ओर से बताया गया कि इस मामले में विवेचना अधिकारी द्वारा सभी आवश्यक साक्ष्यों को एकत्र कर समयबद्ध तरीके से कार्रवाई की गई। इसके साथ ही मॉनिटरिंग सेल और अभियोजन विभाग के समन्वय से मुकदमे की प्रभावी पैरवी की गई, जिसका परिणाम न्यायालय के फैसले के रूप में सामने आया।
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अपराध नियंत्रण की दिशा में पुलिस का प्रयासआजमगढ़ पुलिस लगातार गंभीर अपराधों में आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हत्या, लूट, डकैती जैसे जघन्य अपराधों में शामिल अपराधियों के खिलाफ मजबूत साक्ष्य जुटाकर उन्हें न्यायालय से सजा दिलाना पुलिस की प्राथमिकताओं में शामिल है।
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ऑपरेशन कनविक्शन अभियान के अंतर्गत पुलिस और अभियोजन विभाग के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया जा रहा है, ताकि अपराधियों को कानून के शिकंजे से बच निकलने का मौका न मिले।
इस मामले में भी पुलिस की कार्रवाई से यह स्पष्ट हुआ है कि बेहतर विवेचना, मजबूत साक्ष्य संकलन और न्यायालय में प्रभावी पैरवी के माध्यम से गंभीर अपराधों में दोषियों को सजा दिलाई जा सकती है।
पीड़ित परिवार को मिला न्याय
करीब दो वर्ष तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले से मृतक श्रीराम चौहान के परिवार को न्याय मिला है। हत्या जैसे गंभीर अपराध में दोषियों को आजीवन कारावास की सजा मिलने से पीड़ित पक्ष को राहत मिली है।पुलिस का कहना है कि अपराधियों के विरुद्ध इसी प्रकार प्रभावी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। कानून व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने और आम नागरिकों में सुरक्षा की भावना पैदा करने के लिए पुलिस द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।



