आजमगढ़:डॉक्टर बनाम पत्रकार विवाद: रंगदारी, लूट और धमकी के आरोप में कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ एफआईआर
पत्रकार ने आरोपो को बताया निराधार मुकदमे में फंसाया गया, बुजुर्ग महिला से मारपीट का वीडियो वायरल होने से खफा हैं डॉक्टर

डॉक्टर बनाम पत्रकार विवाद: रंगदारी, लूट और धमकी के आरोप में कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ
एफआईआर,पत्रकार ने आरोपो को बताया निराधार मुकदमे में फंसाया गया, बुजुर्ग महिला से मारपीट का वीडियो वायरल होने से खफा हैं डॉक्टर
आजमगढ़।जिला मंडलीय अस्पताल से जुड़ा डॉक्टर और पत्रकार के बीच चल रहा विवाद अब कानूनी लड़ाई का रूप ले चुका है। न्यायालय के आदेश पर कोतवाली पुलिस ने एक सरकारी चिकित्सक की शिकायत पर पत्रकार सहित तीन लोगों के खिलाफ रंगदारी, लूट, धमकी और एससी/एसटी एक्ट की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं नामजद पत्रकार ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए इसे सच्चाई उजागर करने का परिणाम और प्रतिशोध की कार्रवाई करार दिया है।एफआईआर के अनुसार मंडलीय अस्पताल मे तैनात चिकित्सक डॉ. विनोद कुमार ने आरोप लगाया है कि आरोपी पत्रकार मधुर श्रीवास्तव स्वयं को पत्रकार बताते हुए उनसे प्रति सप्ताह 10 हजार रुपये की रंगदारी मांगता था। आरोप है कि रुपये देने से इनकार करने पर उन्हें सरकारी नौकरी छुड़वाने, झूठी खबरें चलाकर बदनाम करने और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई।डॉक्टर का यह भी आरोप है कि 18 मार्च 2026 की सुबह अस्पताल जाते समय रास्ते में पत्रकार मधुर श्रीवास्तव, देवेंद्र सिंह और एक अन्य व्यक्ति ने उन्हें रोक लिया। उनके साथ गाली-गलौज की गई, जान से मारने की धमकी दी गई और जेब में रखे तीन हजार रुपये निकाल लिए गए। शिकायत के मुताबिक घटना की सूचना तत्काल पुलिस को दी गई, लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। इसके बाद उन्होंने न्यायालय की शरण ली, जहां से आदेश मिलने के बाद कोतवाली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 352, 351(3), 303(2), 132 तथा एससी/एसटी एक्ट की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।
वहीं इस मामले में नामजद पत्रकार मधुर श्रीवास्तव ने डॉक्टर के सभी आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि जिस घटना के बाद यह विवाद शुरू हुआ, उसमें अस्पताल परिसर में एक बुजुर्ग महिला के साथ कथित मारपीट हुई थी, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। उन्होंने दावा किया कि उसी मामले की खबर प्रकाशित करने के बाद डॉक्टर और उनके सहयोगी उनसे नाराज हो गए थे।मधुर श्रीवास्तव का कहना है कि अस्पताल में डॉक्टर पर पहले से कई तरह के आरोप लगते रहे हैं और पूरे प्रकरण की जानकारी संबंधित अधिकारियों को भी थी। उनका आरोप है कि जब अन्य स्तरों पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी तो उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाने के लिए न्यायालय के माध्यम से एफआईआर दर्ज कराई गई। उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और वह कानूनी प्रक्रिया का पूरी मजबूती से सामना करेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुकदमे में दूसरे नामजद व्यक्ति वही हैं, जो कथित रूप से मारपीट का शिकार हुई बुजुर्ग महिला के पुत्र हैं।फिलहाल मामला जांच के अधीन है। पुलिस का कहना है कि न्यायालय के आदेश के अनुपालन में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष विवेचना की जाएगी। दोनों पक्षों के दावों की सत्यता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा



