झारखंड में अपराध और भ्रष्टाचार चरम पर , आम जनता परेशान : देवेश तिवारी
Crime and corruption are at their peak in Jharkhand, common people are troubled: Devesh Tiwari
रांची। झारखंड राज्य में वर्तमान समय में अपराध और भ्रष्टाचार की स्थिति अत्यंत चिंताजनक हो गई है, जिसके कारण आम जनता गहरे असंतोष और भय के माहौल में जीवन यापन करने को विवश है। यह बातें राज्य स्तरीय दिशा समिति (झारखंड), ग्रामीण विकास मंत्रालय के सदस्य देवेश तिवारी ने पत्रकार वार्ता में कही। देवेश तिवारी ने कहा कि पलामू जिला, जो कभी पलाश, महुआ और लाह के लिए प्रसिद्ध था तथा 90 के दशक में नक्सलवाद के लिए जाना जाता था, आज बढ़ते अपराध के कारण नई पहचान बना रहा है। यह स्थिति अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि पलामू अब अपराध के मामलों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। राज्य में साक्षरता दर, रोजगार के अवसर तथा स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति में निरंतर गिरावट देखी जा रही है। पलामू जिले के पांकी क्षेत्र में मार्च माह के दौरान 400 से अधिक छात्रों का शैक्षणिक भविष्य सरकारी लापरवाही के कारण प्रभावित हुआ, जिससे उनके दो वर्ष नष्ट हो गए। हाल में ही पहली बार निट की हुई परीक्षा में हुई अनियमितता और प्रसासनिक लापरवाही के कारण 48 बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया । झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) की नियमावली में पलामू प्रमंडल की स्थानीय भाषाओं भोजपुरी एवं मगही को पुनः शामिल न करना यहाँ के निवासियों के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार है। यह निर्णय क्षेत्र की भाषाई पहचान एवं सांस्कृतिक विरासत की उपेक्षा दर्शाता है,पिछले तीन वर्षों में पलामू जिले में अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ा है। देवेश तिवारी ने कहा कि हत्या, फिरौती और लूटपाट जैसी घटनाएं आम हो चुकी हैं। संगठित अपराध तथा भू-माफियाओं के बढ़ते प्रभाव से पूरे जिले में भय का वातावरण व्याप्त है। इन आपराधिक गतिविधियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण अपराधियों का मनोबल बढ़ा हुआ है। आम जनता भयभीत है और कई लोग पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं, जो जिले के भविष्य के लिए गंभीर संकेत है। वर्ष 2019 से 2026 तक के कार्यकाल में पलामू जिले में एक भी नया स्कूल, कॉलेज या अस्पताल स्थापित नहीं किया गया, जिससे शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था अत्यंत कमजोर स्थिति में पहुंच गई है। राज्य में सरकारी कार्यालयों—अंचल, प्रखंड से लेकर जिला स्तर तक में अपने वैध कार्यों के लिए भी परेशान और त्रस्त है। राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन में अनियमितताओं के आरोप सामने आ रहे हैं, जिससे योजनाओं का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
पिछले एक वर्ष में पलामू जिले में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रतिदिन औसतन 2–3 लोगों की मृत्यु हो रही है, जिनमें 15 से 45 वर्ष आयु वर्ग के लोगों की संख्या लगभग 80 प्रतिशत है। दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों में खराब सड़क निर्माण, प्रशासनिक लापरवाही, सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता की कमी तथा दुर्घटना के बाद ‘गोल्डन ऑवर’ में समय पर उचित उपचार न मिल पाना शामिल है। यह स्थिति अत्यंत गंभीर है और तत्काल प्रभाव से ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
वहीं, पलामू जिले में लगातार खराब होती कानून-व्यवस्था और बहुचर्चित विनीत तिवारी अपहरण व हत्याकांड मामले को लेकर झारखंड पुलिस मुख्यालय ने कड़ा रुख अपनाया है। पुलिस महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय, रांची द्वारा पलामू प्रक्षेत्र के पुलिस उप-महानिरीक्षक को पत्र भेजकर इस पूरे मामले पर विस्तृत और अद्यतन रिपोर्ट तलब की गई है। बताते चलें कि राज्य स्तरीय दिशा समिति (झारखंड), ग्रामीण विकास मंत्रालय के सदस्य देवेश तिवारी द्वारा इस संबंध में पुलिस मुख्यालय को एक पत्र सौंपा गया था। इस पत्र में उन्होंने विनीत तिवारी के अपहरण के बाद उनकी हत्या किए जाने के मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई थी। साथ ही, उन्होंने पलामू जिले की वर्तमान कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी गहरी चिंता व्यक्त की थी।
मुख्यालय का निर्देश
पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी ज्ञापन (संख्या 199/एन.जी.ओ.) के अनुसार, पुलिस महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक के निर्देशों के आलोक में पलामू DIG को निर्देशित किया गया है कि वे:
विनीत तिवारी हत्याकांड की जांच की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करें।
मामले की अद्यतन रिपोर्ट जल्द से जल्द मुख्यालय को उपलब्ध कराएं। जिले की सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था को लेकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।


