विश्व पर्यावरण दिवस पर रीफाइबर ने मुंबई में शुरू किया बड़ा टेक्सटाइल वेस्ट संग्रह और अपसाइक्लिंग अभियान
कपड़ा कचरे को संसाधन में बदलने की पहल, रीफाइबर ने लॉन्च किया अपसाइक्लिंग अभियान

मुंबई, 5 जून 2026: विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर, ओटररी (OterRi) द्वारा संचालित रीफाइबर (ReFiber) ने एक टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मुंबई का बड़ा पोस्ट-कंज्यूमर टेक्सटाइल वेस्ट (इस्तेमाल किए गए कपड़ों का कचरा) संग्रह और अपसाइक्लिंग अभियान शुरू किया। इस पहल का उद्देश्य पुराने और उपयोग किए गए कपड़ों को इकट्ठा करना, उन्हें पुनः उपयोग के लिए तैयार करना और उनसे नए उपयोगी उत्पाद बनाना है। इसके माध्यम से कपड़ों के कचरे को कम करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और समाज के लिए सकारात्मक प्रभाव पैदा करने का प्रयास किया जाएगा।
इस पहल के तहत, रीफाइबर (ReFiber) 5 जून से 12 जून तक पूरे मुंबई में पुराने कपड़े इकट्ठा करने का विशेष अभियान चलाएगा। इस दौरान नागरिकों, संस्थाओं और विभिन्न समुदायों से अपील की जाएगी कि वे अपने इस्तेमाल किए हुए कपड़े रीफाइबर के कलेक्शन सेंटरों या डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से दान करें।
कार्यक्रम में रीफाइबर अपसाइक्ल्ड प्रोडक्ट्स मार्केटप्लेस का भी शुभारंभ किया गया। इस मंच पर टिसर (Tisser) से जुड़ी महिला कारीगरों द्वारा बनाए गए हस्तनिर्मित उत्पाद प्रदर्शित किए गए। यह प्लेटफॉर्म पुराने कपड़ों और कपड़ा कचरे को उपयोगी और मूल्यवान उत्पादों में बदलने के लिए बनाया गया है। साथ ही, यह देशभर के स्वयं सहायता समूहों (Self-Help Groups) को रोजगार के अवसर प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में मदद करेगा।
कार्यक्रम में टेक्सटाइल कचरा प्रबंधन के लिए तकनीक आधारित समाधानों, भारत के वस्त्र उद्योग में सर्कुलर इकॉनमी को बढ़ावा देने और भविष्य में ‘जीरो-वेस्ट’ (शून्य कचरा) व्यवस्था बनाने के लिए साझेदारी बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा की गई।
इस अवसर पर महाराष्ट्र सरकार की टेक्सटाइल कमिश्नर वृंदा देसाई ने कहा, “भारत ने कपड़ा रीसाइक्लिंग और सर्कुलर इकॉनमी के क्षेत्र में अच्छी प्रगति की है, लेकिन हमारे घरों से निकलने वाले पुराने कपड़ों को दोबारा उपयोग में लाने की अभी भी बहुत बड़ी संभावना है। रीफाइबर जैसे संग्रह और अपसाइक्लिंग अभियान यह दिखाते हैं कि सरकार, उद्योग और नागरिक मिलकर कपड़ों के कचरे को एक मूल्यवान संसाधन में बदल सकते हैं और साथ ही टिकाऊ रोजगार के अवसर भी पैदा कर सकते हैं। जागरूकता, नवाचार और लोगों की भागीदारी बढ़ाकर हम एक अधिक टिकाऊ और सर्कुलर टेक्सटाइल व्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ सकते हैं।”
टिसर (Tisser) की संस्थापक डॉ. मेघा फणसलकर ने कहा, “टिसर में हमारा मानना है कि कचरा वास्तव में एक ऐसा संसाधन है जिसे नए रूप में उपयोग किया जा सकता है। टेक्सटाइल अपसाइक्लिंग के माध्यम से हम फेंके गए कपड़ों और कपड़ों के टुकड़ों को उपयोगी और मूल्यवान उत्पादों में बदल रहे हैं। इसके साथ ही हम महिलाओं को रोजगार के अवसर देकर उन्हें सशक्त भी बना रहे हैं। रीफाइबर जैसी पहल लोगों के लिए सर्कुलर इकॉनमी का हिस्सा बनना और कपड़ा कचरा कम करने में योगदान देना आसान बनाती है। एक टिकाऊ और बेहतर भविष्य बनाने के लिए सभी की सामूहिक भागीदारी जरूरी है। हर वह कपड़ा जो कचरे के ढेर (लैंडफिल) में जाने से बचाया जाता है, एक अधिक जिम्मेदार और पर्यावरण-अनुकूल दुनिया की ओर बढ़ाया गया कदम है।”
रीफाइबर (ReFiber) और ओटररी (OterRi) के मुख्य परिचालन अधिकारी (COO) मनोज वनवारी ने कहा ,”रीफाइबर की शुरुआत एक अधिक जिम्मेदार और सर्कुलर टेक्सटाइल व्यवस्था की दिशा में सामूहिक प्रयास की शुरुआत है। हमारी तकनीकी प्रणाली, कलेक्शन नेटवर्क और विभिन्न साझेदारियों के माध्यम से हम कपड़ा कचरे की रिकवरी और पुनः उपयोग की प्रक्रिया को हर नागरिक के लिए आसान, सुलभ और प्रभावी बनाना चाहते हैं। जिसे अक्सर लोग कचरा समझते हैं, वह वास्तव में एक मूल्यवान संसाधन है जिसे दोबारा प्राप्त किया जा सकता है, नए उत्पादों में बदला जा सकता है और फिर से अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनाया जा सकता है। रीफाइबर के माध्यम से हम उपभोक्ताओं को कपड़ा कचरा कम करने में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर दे रहे हैं। साथ ही यह पहल टिकाऊ रोजगार को बढ़ावा देने और वस्त्र उद्योग में सर्कुलर इकॉनमी को तेज़ी से आगे बढ़ाने में भी मदद करेगी।”
क्लोदिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CMAI) के अध्यक्ष संजय कटारिया ने कहा, “यह पहल केवल पुराने कपड़ों को इकट्ठा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा अभियान है जो कचरे को अवसर में बदलने का काम करता है। उद्योग, सरकार, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों को एक साथ जोड़कर हम एक ऐसी सर्कुलर टेक्सटाइल व्यवस्था बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहे हैं, जो कचरे को लैंडफिल में जाने से कम करेगी, प्राकृतिक संसाधनों की बचत करेगी और अपसाइक्लिंग के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाएगी। CMAI में हमारा मानना है कि
टिकाऊ विकास (सस्टेनेबिलिटी) और आर्थिक प्रगति साथ-साथ चलनी चाहिए। हमें इस पहल का समर्थन करने पर गर्व है, क्योंकि यह पर्यावरण और समाज दोनों के लिए सकारात्मक प्रभाव पैदा कर रही है।”
इस कार्यक्रम में सरकार, उद्योग, पर्यावरण और विकास क्षेत्र से जुड़े कई प्रमुख विशेषज्ञों और नेताओं ने भी भाग लिया। इनमें मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. विजय कलंत्री (अध्यक्ष, वर्ल्ड ट्रेड सेंटर मुंबई), संतोष कटारिया (अध्यक्ष, सस्टेनेबिलिटी कमेटी, CMAI), डॉ. पंकज कुमार (नेशनल प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर, UNIDO), डॉ. मेघा फणसलकर (संस्थापक, टिसर), लायन मनोज बाबुर (डिस्ट्रिक्ट गवर्नर, लायंस इंटरनेशनल), सूर्य वल्लूरी (मुख्य सस्टेनेबिलिटी अधिकारी, ग्रासिम इंडस्ट्रीज), नवीन सैनानी, देवांशु रहलान, सौरभ डे, आयुषी पांडे, नेहा गुप्ता, जिग्नेश पी. जैन, डॉ. सुरंजना गांगोपाध्याय और प्रसन्ना एच.आर. शामिल थे। इन सभी विशेषज्ञों ने भारत के वस्त्र उद्योग में सर्कुलर इकॉनमी को बढ़ावा देने, नवाचार अपनाने और टिकाऊ विकास को आगे बढ़ाने के लिए अपने विचार और सुझाव साझा किए।
मुंबई में शुरू हुआ यह शहरव्यापी अभियान इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि सरकार, उद्योग, विकास संस्थाएं और आम नागरिक मिलकर पर्यावरण और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। पुराने और बेकार समझे जाने वाले कपड़ों को पुनः उपयोग और रोजगार के अवसरों में बदलकर रीफाइबर और उसके सहयोगी एक ऐसे टिकाऊ भविष्य की नींव रख रहे हैं, जहां कचरे को फेंका नहीं जाता, बल्कि उसे एक मूल्यवान संसाधन के रूप में नए रूप में इस्तेमाल किया जाता है।



