परीक्षा रद्द, सपने टूटे: छात्रों पर बढ़ता मानसिक दबाव

लगातार पेपर लीक से करोड़ों छात्रों में बढ़ी निराशा

(आलेख : आफताब आलम)

नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार हो रहे पेपर लीक और गड़बड़ियों ने देश के करोड़ों युवाओं और उनके परिवारों को गहरे संकट में डाल दिया है। सरकार अब एयरफोर्स के विमानों से परीक्षा के पर्चे भेजने की बात कर रही है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह असली समस्या से ध्यान भटकाने की कोशिश है। युवाओं की मांग है कि जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो, परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाया जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम की गारंटी दी जाए।

भविष्य जलता रहा, सत्ता हेडलाइन बनाती रही

लेख में आरोप लगाया गया है कि 2014 से 2026 तक देश में दर्जनों पेपर लीक मामलों ने करोड़ों छात्रों का भविष्य प्रभावित किया है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में भर्ती परीक्षाओं और बोर्ड परीक्षाओं में लगातार गड़बड़ियां सामने आई हैं। सीबीएसई मूल्यांकन प्रक्रिया में भी कॉपियों की अदला-बदली, अंकों की गलत गणना और डेटा सुरक्षा पर सवाल उठे हैं।

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इन घटनाओं का छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ा है। परीक्षा रद्द होने और भविष्य की अनिश्चितता के कारण कई छात्रों द्वारा आत्महत्या करने की घटनाएं सामने आई हैं। एनसीआरबी के अनुसार, 2024 में छात्र आत्महत्याओं की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।

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लेख में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही की कमी है। पेपर लीक रोकने के लिए बनाए गए कानूनों के बावजूद ठोस कार्रवाई नजर नहीं आती। साथ ही कोचिंग माफिया और राजनीतिक संरक्षण के आरोप भी लगाए गए हैं।

( आइडियल पत्रकार संगठना राष्ट्रीय प्रभारी संपूर्ण भारत: संपर्क 9936788786)

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