बहन-बेटी बुरी नहीं लगती, जब इज्जत उठाई लगे तो.मेरठ में बहन को गोली मारने वाले आरिश का बयान

मेरठ। आरिश थाने की हवलत के एक कोने में बैठा है। जो भी आता है, बरबस उसकी निगाह उस पर बनती है। हवलत की दीवार से कमर सताए आरिश का मासूम चेहरा देखकर कोई नहीं कह सकता था कि चांद घंटों पहले उसने उस बहन को मौत के घाट उतार दिया है, जिसे दुल्हन बनाकर पिया के घर भेजने का सपना देखा करता था। भावहीन चेहरा बिल्कुल सपाट था। उस पर न दर्द था, न ही दुख। डर तो दूर-दूर तक नहीं दिखा। कैसे बहन की कनपटी पर तमंचा सटाकर इस भाई ने गोली चलाई होगी ? क्या रही होगी उस समय इसकी मनोदशा ? हर कोई यह जानना समझा तो चाहता है, लेकिन आरिश ने जिस तरह घटना को अंजाम दिया, उसके बाद उससे आश्रित को कोई साहस नहीं कर पाया।
आखिर उससे पूछा क्यों मार दिया भाई बहन को?आरिश ने लटका चेहरा उठाया, बोझिल आंखों से देखा, सिर दीवार से हलका सा टकराया, बोला, क्या करता, आना जाना भी मुश्किल हो गया था। घर से निकलते ही लोग उसे देखकर इशारे करने लगते थे, एक दूसरे को उंगलियां मारते थे। कुटिल मुस्कान के साथ खांसते तो चलना भी मुश्किल हो जाता था। रोज मरता था मैं..भाई बहन-बेटी बुरी नहीं लगती है, जब इज्जत उठाने लगे तो आदमी हर पल आदमी मरता है।
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तीसरा ऑनर किलिंग की घटना
लोहियानगर में पिछले एक महीने में यह तीसरा ऑनर किलिंग की घटना है। दो मामलों में भाइयों ने बहन का बेरहमी से कत्ल किया। तीसरे में मामा ने सौतेले भांजे संग भाजी का पहले बेरहमी से कत्ल किया, फिर शव दूर फेंक आया।
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एक मामले में तो नाबालिग भाई ने अपनी से कई साल बड़ी बहन की उसके ही दुपट्टे से गला दबाकर हत्या कर दी। वह बहन को समझाकर घर की इज्जत का वास्ता देकर सुधरने की मिन्नत कर चुका था। इसके बाद भी बहन नहीं मानी, जब मन किया, जिसके साथ चाहा चली गई। जब मन किया वापस आ गई।
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लोगों के रोज-रोज तानों से तंग आकर भाई ने बहन का कत्ल कर जेल की गलियों को अपना ठिकाना बना लिया। भांजी की हत्या करने वाले मामा की भी पकड़े जाने पर कुछ ऐसी ही बयानगी थी। उसने कहा था कि गांव वालों के ताने उससे अब बंधे नहीं हो रहे थे।
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रात में किसी से बात करती थी अफशां
हवालात में बैठे आरिश कहता है, रात में वह कई बार जागा, देखा अफशां फोन पर बात कर रही है। वह जानता था, किससे उसकी बातचीत हो रही है। उसे सोने को कहने पर उसने फोन तो काटा, लेकिन फिर आंख खुली तो वह बात करती दिखाई दी। चारों भाई मजदूरी कर घर चला रहे थे, सिर पर बाप का साया नहीं था। इन हालातों को अफशां को बताने पर भी वह नहीं समझी। बातचीत के दौरान आरिश की आंखों में आंसू आए, सिसकते हुए बोला, अफशा को उसे नहीं मारना चाहिए था, पर उसे भी समझाना चाहिए था। सब उसकी बातें ही तो चाहते थे। रोते हुए आरिश बस इतना ही बोला.. सब कुछ बर्बाद हो गया भाई.. पता नहीं अब क्या होगा।
बहुत जिद्दी थी अफशां, साफ कह दिया था, प्रेमी से ही जाएगी शादी
पड़ोसियों का कहना था कि अफशां बहुत जिद्दी थी। हालांकि वह घर से कम ही निकलती थी। परिवार के लोगों की कोई बात उसे पसंद नहीं आती थी तो वह खुलकर विरोध करती थी। वह न मां से डरती थी, न भाइयों से। स्वजन ने उसके मोबाइल से बातचीत करने का विरोध किया तो उसने साफ कह दिया, वह ऐसी ही बात करेगी।
स्वजन को यकीन था कि वह प्रेमी से ही बात करती है। रोज-रोज के शेड के बाद जब स्वजन ने उसके रिश्ते की चर्चा की तो वह लगातार विरोध करती रही। जब उसे पता चला कि उसका रिश्ता कर दिया गया है तो उसने साफ कह दिया कि वह किसी भी सूरत में निकाह नहीं जाएगी। वह हाजीपुर के अपने प्रेमी संग ही रहेगी। पिछले तीन से इसी बात पर अफशां व स्वजन में विरोध चल रहा था। मां व भाइयों के बताए पर भी वह अपनी जिद पर अड़ी रही।
हमने क्या किया, क्यों किया गिरफ्तार?
अफशां की हत्या के बाद आरिश ने खुद को पुलिस के हवाले कर दिया। तीनों भाई घर से फरार हो गए। घर पर केवल मां कासिफा था। रोते हुए वह कह रही थी, उसे नहीं पता, वह तो नमाज पढ़ रही थी। तीनों बेटे दूसरे कमरे में सो रहे थे। गोली की आवाज सुनी तो बेटे कमरे की ओर दौड़े। वहां अफशां को लुहुलुहान देखा।
आरिश के हाथ में तमंचा था। आरिश को भला बुरा कहकर वह अफशां को लेकर अस्पाल दौड़े। वहां उसकी मौत के बाद जब घर वापस आए तो आरिश पानी से कमरे के फर्श पर फैला खून साफ कर रहा था। उसे जब अफशां के मौत की जानकारी दी तो वह घर से निकला और थाने पहुंच गया।


