Azamgarh news:ऐतिहासिक मां शीतला धाम जाने वाला मार्ग पानी युक्त कीचड़ युक्त हुआ 

Azamgarh news: The road leading to the historical Maa Shitala Dham became filled with water and mud.

प्रेम प्रकाश दुबे की रिपोर्ट

निजामाबाद/आजमगढ़।ऐतिहासिक शक्तिपीठ के रूप में स्थापित शीतला मां धाम जाने वाले मार्ग में पानी और कीचड़ होने के कारण श्रद्धालुओं को हो रही है भारी दिक्कत।मंदिर क्षेत्र हिन्दू धर्मानुसार माता शीतला का स्थान ब्रम्ह सत्ता में स्वास्थ्य मंत्री का माना जाता है।

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क्योंकि क्षेत्र में जब भी महामारी चेचक,खसरे का प्रकोप फैलता है तो उससे राहत के लिए माता रानी को धार व फूल अर्पित कर उन्हें मनाया जाता है, जिससे कि बीमार व्यक्ति को शीतलता प्रदान हो सके।मरीज के स्वस्थ होने पर माता रानी के दरबार सपरिवार पहुंच कर हलुआ पुड़ी का भोग लगाने की प्रथा है।इस मंदिर पर वासंतिक एवं शारदीय नवरात्र अवसर के साथ ही पूरे वर्ष भर मेला लगता है।इस मंदिर में सुबह एवं रात्रि में प्रति दिन कीर्तन पूजन भक्तों के द्वारा संपन्न होती है।माता की शयन आरती के बाद मंदिर का कपाट बंद कर दिया जाता है।

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क्षेत्र में मान्यता है कि माता के दर्शन पूजन से मन शांत रहता है,साथ ही शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है।माता की कृपा से परिवार में सभी सदस्य निरोग रहते है।।माता रानी शीतला के क्षेत्र में रहने वाला प्रत्येक हिंदू परिवार चाहे वह जीविकोपार्जन के लिए सुदूर प्रदेशों में क्यों न रहता हो फिर भी परिवार में किसी भी मांगलिक शुभ कार्य की संपन्नता के साथ ही साल में एक बार वार्षिक पूजा के लिए मां के दरबार में अवश्य हाजिरी लगाता है।यह पौराणिक मंदिर जिले के साथ ही पूर्वांचल के जनपदों में स्थित सुप्रसिद्ध देवी मंदिरों में अपना अलग स्थान रखता है।पुराणों के अनुसार राजा दक्ष द्वारा शिव के अपमान से क्षुब्ध गौरा यज्ञ कुंड में कूद गई।यह समाचार सुन भगवान शिव पहुंचकर गौरा को यज्ञ कुंड से उठाकर हवा मार्ग से चल दिए।

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पुराणों के अनुसार मां की कुछ रक्त की बूंदे निजामाबाद की इस धरती पर गिरी तब से मां गौरा के अंश के रूप में मां शीतला दरबार प्रसिद्ध हो गया।इतने ऐतिहासिक शक्तिपीठ के रूप में स्थापित मां शीतला के धाम पर जाने के लिए श्रद्धालुओं को कचड़े और पानी में चल कर जाना पड़ता है।जिम्मेदार लोगों की आंखें बंद हो गई है।शासन प्रशासन संज्ञान में लेकर इस रास्ते की मरम्मत कराए।जिससे श्रद्धालुओं को मंदिर तक जाने में असुविधा का सामना न करना पड़े।

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