आजमगढ़ में धारा 107 बीएनएसएस के तहत अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई, 10 करोड़ रुपये की कथित अपराध से अर्जित संपत्ति कुर्क करने का आदेश
Azamgarh witnesses biggest ever action under Section 107 BNSS; orders confiscation of alleged criminal assets worth Rs 10 crore

आजमगढ़, 11 जुलाई। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जनपद में संगठित अपराध, भूमाफियाओं और गैंगस्टर गतिविधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस और प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए कथित रूप से अपराध से अर्जित लगभग 10 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्ति को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह कार्रवाई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 107 के अंतर्गत की गई है, जिसे जिला पुलिस अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई बता रही है।माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर गैंगस्टर, भूमाफिया, हिस्ट्रीशीटर और कुख्यात अपराधी बताए गए कृष्णचन्द्र राय उर्फ के.सी. राय की कथित रूप से अपराध की आय से निर्मित बहुमंजिला इमारत को कुर्क करने का आदेश जारी किया गया है। न्यायालय ने संपत्ति के प्रशासन के लिए संबंधित तहसीलदार को प्रशासक नियुक्त किया है।
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अपराध से अर्जित धन पर आर्थिक प्रहार
पुलिस के अनुसार अपराधियों के खिलाफ केवल गिरफ्तारी ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि अपराध से अर्जित आर्थिक संसाधनों को भी समाप्त करना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से बीएनएसएस की धारा 107 का उपयोग किया जा रहा है, जिसके तहत अपराध से अर्जित संपत्तियों की पहचान कर उन्हें कुर्क किया जा सकता है।आजमगढ़ पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई केवल एक व्यक्ति के विरुद्ध नहीं, बल्कि संगठित अपराध के आर्थिक नेटवर्क को ध्वस्त करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार जब अपराधियों की अवैध संपत्तियां कानून के दायरे में आती हैं तो उनके आर्थिक आधार पर सीधा प्रभाव पड़ता है और भविष्य में अपराध करने की क्षमता भी कमजोर होती है।
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फर्जी खतौनी और जमीन के नाम पर ठगी का आरोप
पुलिस की ओर से जारी जानकारी के अनुसार थाना कोतवाली में दर्ज मु0अ0सं0 92/2026 की विवेचना के दौरान यह तथ्य सामने आया कि कृष्णचन्द्र राय उर्फ के.सी. राय ने कथित रूप से फर्जी खतौनी तैयार कर जमीन बेचने के नाम पर लोगों से धोखाधड़ी की। आरोप है कि इसी प्रकार की विभिन्न आपराधिक गतिविधियों से प्राप्त धनराशि का उपयोग कर ग्राम कोडर अजमतपुर में वर्ष 2012 से भूमि खरीदने का सिलसिला शुरू किया गया।विवेचना में यह भी सामने आने का दावा किया गया कि अलग-अलग समय में आसपास की जमीनें खरीदकर अथवा कथित रूप से कब्जे में लेकर उन्हें एक बड़े परिसर का स्वरूप दिया गया। इसी परिसर में बहुमंजिला भवन का निर्माण कराया गया और समय-समय पर उसका विस्तार, पुनर्निर्माण तथा आधुनिक सुविधाओं से युक्त रिनोवेशन भी कराया गया।
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पुलिस का दावा है कि यह पूरा निर्माण वैध आय से नहीं, बल्कि अपराध से अर्जित धन के माध्यम से किया गया।
पांच गाटा संख्या में फैला बताया गया परिसर
विवेचना के दौरान पुलिस ने यह भी दावा किया कि वर्ष 2012 से लगातार आसपास की जमीनों को जोड़कर भवन का विस्तार किया जाता रहा। वर्तमान में यह परिसर कुल पांच अलग-अलग गाटा संख्याओं में फैला हुआ है।पुलिस के अनुसार इस पूरे परिसर का विकास धीरे-धीरे अपराध से अर्जित कथित धन के बल पर किया गया और समय के साथ यह एक विशाल आवासीय एवं व्यावसायिक परिसर का रूप लेता गया।
अपराधियों का कथित ठिकाना भी रहा भवन
जांच एजेंसियों के अनुसार संबंधित भवन केवल आवासीय उपयोग तक सीमित नहीं था। विवेचना में यह तथ्य भी सामने आने का दावा किया गया कि यह इमारत कथित रूप से गैंग के सदस्यों के एकत्र होने तथा विभिन्न आपराधिक गतिविधियों की योजनाएं बनाने का प्रमुख केंद्र रही।पुलिस का कहना है कि भवन के रखरखाव, मरम्मत, पुनर्निर्माण तथा विस्तार पर भी लगातार भारी धनराशि खर्च की गई, जिसका कोई वैध स्रोत जांच में सामने नहीं आया।
राजस्व और लोक निर्माण विभाग ने किया मूल्यांकन
संपत्ति के संबंध में प्रशासन ने राजस्व विभाग और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की सहायता से विस्तृत मूल्यांकन कराया।राजस्व विभाग द्वारा भूमि का सीमांकन और बाजार मूल्य का आकलन किया गया, जबकि लोक निर्माण विभाग ने भवन की तकनीकी जांच और निर्माण लागत का मूल्यांकन किया।दोनों विभागों की रिपोर्ट के आधार पर संबंधित अचल संपत्ति का अनुमानित बाजार मूल्य करीब 10 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया।इसी मूल्यांकन के आधार पर संपत्ति को अपराध से अर्जित धन से निर्मित मानते हुए न्यायालय में रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।
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न्यायालय की महत्वपूर्ण टिप्पणी
पुलिस के अनुसार न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों, विवेचना रिपोर्ट तथा प्रस्तुत दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद यह माना कि अभियुक्त ने कथित रूप से अपराध से अर्जित धन के आधार पर व्यापक संपत्ति का निर्माण किया और उसका लगातार विस्तार किया।न्यायालय ने यह भी पाया कि भवन निर्माण के लिए कोई वैध आय का स्रोत उपलब्ध नहीं कराया गया। इसके अतिरिक्त भवन निर्माण के लिए लिए गए ऋण की किश्तों का भुगतान करने के लिए भी किसी वैध आय का प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया जा सका.इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने धारा 107 बीएनएसएस के अंतर्गत संपत्ति कुर्क करने का आदेश पारित किया।
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तहसीलदार बनाए गए संपत्ति के प्रशासक
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश के बाद संबंधित तहसीलदार को उक्त संपत्ति का प्रशासक नियुक्त किया गया है।अब कुर्की की पूरी प्रक्रिया न्यायालय के आदेशों के अनुरूप प्रशासनिक अधिकारियों की देखरेख में संपन्न कराई जाएगी। संपत्ति का संरक्षण, रखरखाव और आगे की कानूनी कार्रवाई निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।
आरोपी पहले से जेल में बंद
पुलिस के अनुसार कृष्णचन्द्र राय उर्फ के.सी. राय वर्तमान समय में जेल में निरुद्ध है।बताया गया कि प्रशासनिक कारणों से उसे पूर्व में आजमगढ़ से स्थानांतरित कर अम्बेडकरनगर कारागार भेजा जा चुका है।जेल में बंद रहने के बावजूद उसके विरुद्ध दर्ज विभिन्न मामलों की विवेचना और न्यायालयी कार्यवाही लगातार जारी है।
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वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में हुई कार्रवाई
यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन में संचालित अभियान के अंतर्गत की गई।पूरी कार्रवाई अपर पुलिस अधीक्षक नगर मधुवन कुमार सिंह के पर्यवेक्षण तथा क्षेत्राधिकारी नगर शुभम तोदी की उपस्थिति में संपन्न हुई।इस दौरान थाना कोतवाली पुलिस, राजस्व विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों ने संयुक्त रूप से कार्रवाई को अंजाम दिया।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अपराध से अर्जित संपत्तियों की पहचान करने, उनके दस्तावेजों की जांच करने तथा न्यायालय के समक्ष पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत करने में कई विभागों ने समन्वित रूप से कार्य किया।
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लंबा आपराधिक इतिहास
पुलिस के अनुसार कृष्णचन्द्र राय उर्फ के.सी. राय के विरुद्ध वर्ष 2011 से लेकर वर्ष 2026 तक विभिन्न थानों में कई मुकदमे दर्ज हैं।इन मामलों में धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेज तैयार करना, आपराधिक न्यासभंग, धमकी, मारपीट, षड्यंत्र, अपहरण, गैंगस्टर्स एक्ट तथा अन्य गंभीर धाराओं के अंतर्गत मुकदमे शामिल बताए गए हैं।दर्ज मामलों में कप्तानगंज, कोतवाली, कंधरापुर, बरदह, सिधारी, जीयनपुर तथा बिलरियागंज सहित विभिन्न थानों में अपराध पंजीकृत होने की जानकारी पुलिस ने दी है।पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी हिस्ट्रीशीटर भी है तथा उसके विरुद्ध गैंगस्टर्स एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जा चुकी है।
वर्ष 2011 से 2026 तक दर्ज हुए कई मुकदमे
पुलिस के अनुसार आरोपी के विरुद्ध वर्ष 2011 में पहली बार धोखाधड़ी और जालसाजी से संबंधित मुकदमे दर्ज हुए। इसके बाद अलग-अलग वर्षों में कई अन्य आपराधिक मामले सामने आए।वर्ष 2018 में आपराधिक न्यासभंग और जालसाजी, वर्ष 2019 में आपराधिक षड्यंत्र, वर्ष 2021 में धोखाधड़ी, वर्ष 2022 में न्यासभंग, वर्ष 2023 में धोखाधड़ी तथा एससी-एसटी एक्ट से संबंधित मामला, वर्ष 2024 में मारपीट, वर्ष 2025 में गैंगस्टर्स एक्ट सहित कई गंभीर मुकदमे दर्ज किए गए।वर्ष 2026 में भी धोखाधड़ी और जालसाजी सहित विभिन्न धाराओं में नए मुकदमे पंजीकृत किए गए हैं।
धारा 107 बीएनएसएस क्यों महत्वपूर्ण
बीएनएसएस लागू होने के बाद अपराध से अर्जित संपत्तियों के विरुद्ध कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से धारा 107 का उपयोग किया जा रहा है।इस प्रावधान के तहत यदि जांच में यह स्थापित होता है कि कोई संपत्ति अपराध से अर्जित आय से बनाई गई है, तो न्यायालय आवश्यक साक्ष्यों के आधार पर उसे कुर्क करने का आदेश दे सकता है।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह प्रावधान पीड़ितों से हड़पी गई संपत्ति की वापसी और अपराधियों के आर्थिक ढांचे को कमजोर करने का एक प्रभावी कानूनी माध्यम है।
संगठित अपराध के विरुद्ध जारी रहेगा अभियान
आजमगढ़ पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जनपद में संगठित अपराध, गैंगस्टर गतिविधियों, भूमाफियाओं तथा अपराध से अर्जित अवैध संपत्तियों के विरुद्ध अभियान भविष्य में भी जारी रहेगा।पुलिस का कहना है कि अपराधियों के विरुद्ध केवल आपराधिक मुकदमे दर्ज करना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि उनके द्वारा कथित रूप से अर्जित अवैध धन और संपत्तियों पर भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी ताकि अपराध से होने वाले आर्थिक लाभ को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।



