Deoria news, भागवत कथा से युवा विकास तक बरहज में लाइव टूल बॉक्स फाउंडेशन की प्रेरक पहल
*भागवत कथा से युवा विकास तक: बरहज में लाइफटूलबॉक्स फाउंडेशन की प्रेरक पहल।
देवरिया।
बरहज में हाल ही में बच्चों के सर्वांगीण विकास को लेकर एक अनूठी और विचारोत्तेजक पहल देखने को मिली, जिसकी प्रेरणा भागवत कथा से मिली।
यह भागवत कथा हिमांशु शुक्ला के निवास पर उनके पिता डॉ. ओम प्रकाश शुक्ला (सेवानिवृत्त विभागाध्यक्ष, बाबा राघवदास कॉलेज) एवं परिवार के लिए आयोजित की गई थी।
कथा केवल एक धार्मिक आयोजन न रहकर, जीवन और व्यक्तित्व निर्माण से जुड़ा एक गहरा प्रश्न छोड़ गई।
*एक विचार जिसने दिशा बदल दी*
कथा के दौरान एक महत्वपूर्ण विचार उभरा—
भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से मिलने वाली सीख को लोग अक्सर जीवन की कठिन परीक्षाओं या सेवानिवृत्ति के बाद ही क्यों समझते हैं?
क्या ये जीवन-मूल्य बचपन में नहीं सिखाए जा सकते, जब व्यक्तित्व और सोच का निर्माण हो रहा होता है?
इसी विचार ने बच्चों के लिए एक श्रृंखलाबद्ध विकासात्मक गतिविधियों की नींव रखी।
*कृष्ण कोड: गीता की सीख, जीवन के लिए*
इस पहल का पहला चरण “कृष्ण कोड” रहा, जिसमें बच्चों को भगवद गीता के चयनित श्लोक सरल, व्यवहारिक और बाल-अनुकूल भाषा में समझाए गए।
इन सत्रों के माध्यम से बच्चों ने सीखा—
• भावनात्मक स्थिरता कैसे सफलता की मजबूत नींव बनती है
• हमारी सोच और मानसिकता जीवन की दिशा कैसे तय करती है
• आत्म-नियंत्रण और सकारात्मक दृष्टिकोण चुनौतियों का सामना करने में कैसे सहायक होते हैं
*दिल से बोलो चैम्पियनशिप: आत्म-अभिव्यक्ति का मंच*
दूसरी प्रमुख गतिविधि रही “दिल से बोलो चैम्पियनशिप”, जिसमें बच्चों को पारंपरिक भाषण विषयों से हटकर आत्मचिंतन आधारित विषय दिए गए।
बच्चों ने जैसे प्रश्नों पर अपने मन की बात रखी—
• जब मैं दुखी होता/होती हूँ, तब मैं क्या करता/करती हूँ?
• मैं किसी कठिन परिस्थिति या चुनौती का सामना कैसे करता/करती हूँ?
यह मंच बच्चों के लिए केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि भावनाओं को समझने, स्वीकार करने और आत्मविश्वास के साथ व्यक्त करने का अनुभव बन गया।
*नेतृत्व संवाद: जीवन कौशल की तैयारी*
इसके साथ एक नेतृत्व संवाद का भी आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों को यह समझाया गया कि आज के समय में—
• केवल अंक ही पर्याप्त नहीं हैं
• भावनात्मक बुद्धिमत्ता
• प्रभावी संवाद कौशल
• और नेतृत्व क्षमता
भी उतनी ही आवश्यक हैं, जितनी अकादमिक उपलब्धियाँ।
*दृष्टि और नेतृत्व*
इन सभी गतिविधियों का संचालन कृतिका, आयकर विभाग की उप आयुक्त (आईआरएस), के मार्गदर्शन में किया गया।
इस पूरी पहल में हिमांशु शुक्ला, लाइफटूलबॉक्स फाउंडेशन के संस्थापक एवं आईएएस कोच, की सक्रिय और दूरदर्शी भूमिका रही
बरहज में आयोजित यह पहल इस बात का सशक्त उदाहरण है कि यदि बच्चों को सही समय पर सही जीवन कौशल सिखाए जाएँ, तो वे न केवल अकादमिक रूप से, बल्कि भावनात्मक, सामाजिक और नेतृत्व के स्तर पर भी भविष्य की चुनौतियों के लिए अधिक सक्षम बन सकते हैं।



