भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चा झारखंड इकाई ने जमीन की खरीद-बिक्री में नई व्यवस्था लाने का दिया सुझाव

The Jharkhand unit of the Anti-Corruption Front has suggested introducing a new system for the buying and selling of land.

रांची। सुप्रीम कोर्ट के कुछ अधिवक्ता, पत्रकारों और बुद्धिजीवियों द्वारा भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चा का गठन किया गया है। देश भर में जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चा की झारखंड प्रदेश इकाई ने पदाधिकारियों का मानना है कि वर्तमान परिवेश में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति या समाज हो जो व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार के दुष्प्रभाव से मुक्त हो । भ्रष्टाचार की असह्य वेदना से पीड़ित आम आदमी के जख्मों पर मरहम लगाने, पर्दे के पीछे चल रहे भ्रष्टाचारी कुकृत्यों को प्रकाश में लाने और भ्रष्टाचार के रोगाणुओं के विरुद्ध एंटीबायोटिक अवरोध की लड़ाई में तत्पर रहने का कार्य “भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चा ” राष्ट्रीय ,प्रांतीय और जिला स्तर पर कर रहा है । यह संगठन माननीय सर्वोच्च न्यायालय के कुछ अधिवक्ताओं के द्वारा उद्भूत , समाज के प्रबुद्ध-चेता सामाजिक कार्यकर्ताओं का समूह है । व्यक्ति में अनाधिकृत गैर कानूनी लाभ की चेष्टा , उसके द्वारा इसके लिए अथक प्रयास और हर बात में हस्तक्षेपि प्रशासन व्यवस्था के कारण उपजे दुर्गुणों ने भ्रष्टाचार के लिए बड़े-बड़े दरवाजे और खिड़कियाँ खोल रखे हैं । भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चा झारखंड इकाई का कहना है कि चल रहे भ्रष्टाचारी व्यवस्था को आनन-फानन में जड़ से उखाड़ देने का दावा तो नहीं करता, लेकिन समस्याओं के इस शांत झील में अकेला पत्थर फेंक कर सतह पर हलचल जरूर पैदा करते आ रहे हैं । इसी परिप्रेक्ष्य में वर्तमान में व्याप्त समस्याओं की ओर भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चा निम्न बातों का ध्यान आकृष्ट करना चाहता है : पलामू जिला मुख्यालय मेदिनीनगर के आस-पास के गाँव जब से नगर-निगम में शामिल हुए हैं ,स्थानीय निकाय प्रशासन के फलस्वरूप ग्रामीणों को कोई नगरीय सुविधा तो अब तक नहीं मिल पाई ,
लेकिन इन ग्रामों में जहां हरेक खेती की जमीन को आवासीय या व्यापारिक नजर से देखा जाने लगा। ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों में नगर निगम के क्षेत्र में आवास स्थापित करने की होड़ लग गयी। जमीन की कीमतें कई गुनी बढ़ी वहीं इसी के साथ जमीन खरीदने और बेंचने वाले सहायक बिचौलियों की भी बाढ़ आ गयी। बिना मेहनत और विशेष योग्यता के जमीन बिचौलिया और माफिया जो भी कहें उन्हें बेशुमार कमाई का अवसर मिल गया। जमीन की इस खरीद-बिक्री के लिए करोड़ो-अरबो रुपये के वित्त-पोषण के लिए financer के रूप में सम्पन्न-वर्ग भी खड़ा हो गया । इस संदर्भ में उल्लेखनीय है कि नगरीय क्षेत्र का भू-माप और बंदोबस्ती का काम आधा-अधूरा अटका हुआ है , 1932 के बाद आजतक पूरा नहीं हो पाया है । ऐसी स्थिति में लगभग 90-95 वर्षों के बाद जमीन के स्वरूप में जमीन -आसमान का अंतर आ गया है । बे-लगान , बकाश्त और काबिल लगान जमीन के लिए लगान-निर्धारण का कार्य भी सुगम नहीं हो पाया । केवल जमीन की निबंधित खरीद बिक्री के आधार पर हुए मनमाने दाखिल-खारिज के आधार पर ही सरकारी लगान की वसूली होती रही । बाद में , वर्ष 2010 से भूमि अभिलेखों का digitization के कार्यक्रम सरकार की ओर से चलाए गए , जिसके अंतर्गत खतियान और पंजी-|| के आंकड़े सरकारी वेबसाइट पर डाले जाने थे । पिछले सर्वे के खतियान जिला अभिलेखागार में या तो फटे थे, नहीं थे या कई जगहों पर आग में जल जाने की बात कही गयी , साथ ही पंजी || का घटिया रख-रखाव और उसमें प्रविष्टियों के साथ राजस्व कर्मचारियों की मनमानी entry और छेड़-छाड़ ही जमीन digitization के आधार बने । राजस्व अंचल के कर्मचारी , अमीन ,निरीक्षक , अंचल अधिकारियों के द्वारा मनमाने तरीके से सरकारी रसीद निर्गत करना , पंजी || में फ़र्ज़ी और काल्पनिक लगान निर्धारण केस संख्या की प्रविष्टि दर्ज कर और छेड़-छाड़ कर लगान निर्धारण की वैधता प्रदान करना, सरकारी website पर online प्रविष्टि दिखला कर जमीन की मिल्कियत साबित करना बड़े व्यवसाय के रूप में वर्तमान में फल-फूल रहा है, जिसको आगे बढ़ाने में जमीन बिचौलियों और उनके लिये वितपोषक पैसेवाले लोगों की सहभागिता जगजाहिर है । ये सभी अपने अपने निजी हितसाधन के लिए संगठित गिरोह (syndicate) की तरह काम कर रहे हैं । अंचल कार्यालय, जमीन बिचौलिए नाजायज लेनदेन में पैसा लगानेवाले लोगो के सहयोग और मिलीभगत से नये नए जमीन विवाद उत्पन्न हो रहै है। जमीन माफिया के द्वारा land grabbing की भी बाढ़ आ गयी है । जहां जमीन माफियाओं के निजी हित टकराते हैं, वहीं हत्या-प्रतिहत्या की स्थिति उत्पन्न होती है, साथ ही इसमें खेल शुरू होता है। भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चा की झारखंड प्रदेश इकाई का इस संदर्भ में सुझाव है कि निदान स्वरूप पंचायत, प्रखंड या जिला स्तर पर कोई अधिसूचित website अस्तित्व में लाया जाए जिस पर जमीन के बिक्रेता और खरीददार जमीन की मिल्कियत से जुड़े कागजातों की विवरणी , जमीन के details और खरीद -बिक्री की इच्छा रजिस्टर कर सकें , जहां से जानकारी हासिल कर के खरीद-बिक्री के पक्षकार खुद संपर्क कर अपने हित में निर्णय ले सकें ताकि बिचौलिया-व्यवस्था का हस्तक्षेप की गुंजाइश नहीं रहे । वर्णित स्थितियों में अपेक्षित है और भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चा मांग करता है कि प्रशासन कोई निष्पक्ष और पारदर्शी कदम उठाए जिससे इस जमीन grabbing, उसके legitimization के लिए onlie सबूतों की manufacturing उद्योग की और जमीन बिचौलियों के साथ जमीन की खरीद-बिक्री में शामिल पूरी व्यवस्था का आतंक थम सके ।

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