Jaunpur news:नरौली में सड़क निर्माण विवाद गहराया, मुख्यमंत्री से जांच की मांग

पीडब्ल्यूडी की सड़क पर उठे सवाल, किसान बोला- मेरी पूरी जमीन हो जाएगी खत्म

जौनपुर। सरायख्वाजा थाना क्षेत्र के नरौली गांव में विधायक निधि से लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा कराए जा रहे सड़क निर्माण कार्य को लेकर नया विवाद सामने आया है। गांव निवासी तिलकधारी पुत्र रामभरत ने मुख्यमंत्री सहित जिला प्रशासन को प्रार्थना पत्र भेजकर आरोप लगाया है कि सड़क का निर्माण निर्धारित सेक्टर मार्ग संख्या 1222 के वास्तविक स्थान पर न कराकर दूसरे स्थान पर कराया जा रहा है, जिससे उनकी पूरी कृषि भूमि समाप्त होने की स्थिति पैदा हो गई है।

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प्रार्थी के अनुसार ग्राम नरौली में विधायक निधि से सड़क निर्माण कार्य चल रहा है। आरोप है कि सेक्टर मार्ग संख्या 1222 का पश्चिमी भाग लगभग 48 मीटर लंबाई तक निर्माण की जद में है, जबकि उक्त मार्ग अपने वास्तविक स्थान पर चिन्हित नहीं किया गया है। तिलकधारी का कहना है कि यदि सड़क का निर्माण वर्तमान प्रस्तावित स्थान पर किया गया तो उनकी चक संख्या 1107, जिसका क्षेत्रफल मात्र 0.025 हेक्टेयर है, पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। इसके अलावा अन्य चकधारक भी प्रभावित होंगे।

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शिकायतकर्ता का दावा है कि उन्होंने 2 जून से लेकर 16 जून 2026 तक मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी सदर को कई बार प्रार्थना पत्र देकर सेक्टर मार्ग संख्या 1222 की राजस्व टीम गठित कर पैमाइश कराने की मांग की थी। उनका कहना है कि जिलाधिकारी ने मामले में टीम बनाकर पैमाइश कराने के निर्देश भी दिए थे।

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प्रार्थी ने क्षेत्रीय लेखपाल राजेश कुमार की आख्या रिपोर्ट पर भी सवाल खड़े किए हैं। आरोप है कि लेखपाल द्वारा जो रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है, उसमें तथ्यों को गलत तरीके से दर्शाया गया है। तिलकधारी का कहना है कि 1 जून को केवल सेक्टर मार्ग संख्या 1149 की पैमाइश की गई थी, जबकि रिपोर्ट में चकमार्ग संख्या 1112, 1113 तथा सेक्टर मार्ग 1222 की पैमाइश दर्शा दी गई। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि मौके पर उनकी फोटो और हस्ताक्षर लिए गए, लेकिन उनका संबंध केवल सेक्टर मार्ग 1149 की पैमाइश से था।

प्रार्थी ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि सड़क निर्माण से पहले सेक्टर मार्ग संख्या 1222 की राजस्व एवं तकनीकी टीम द्वारा निष्पक्ष पैमाइश कराकर सही स्थान चिन्हित किया जाए तथा उसी आधार पर निर्माण कराया जाए। उनका कहना है कि यदि बिना पैमाइश के पुराने अथवा विवादित स्थान पर सड़क बना दी गई तो भूमि विवाद और तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

मामले को लेकर ग्रामीणों में भी चर्चा का माहौल है। अब निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि शिकायत की जांच के बाद सड़क निर्माण को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है।

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