ममता का महाकुंभ को 'मृत्यु कुंभ' कहना उस स्थिति के लिए उपयुक्त : स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती 

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बेमेतरा (पश्चिम बंगाल), 20 फरवरी (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी के महाकुंभ को ‘मृत्यु कुंभ’ बताने वाले बयान पर साधु-संतों में नाराजगी है। हालांकि बुधवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए इस बयान का समर्थन किया।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा, “जब मृत्यु होती है, तो उसे मृत्यु के अलावा और क्या कहा जाना चाहिए? अगर उन्होंने ऐसा कहा है, तो इसका कारण यह है कि वास्तव में ऐसा ही हुआ था और इस्तेमाल किए गए शब्द उस स्थिति के लिए उपयुक्त थे।”

उन्होंने कहा, “जब मौत हुई, तो उसे मौत के अलावा और कुछ नहीं कहा जा सकता। अगर ममता बनर्जी ने इन शब्दों का इस्तेमाल किया है, तो यह वास्तविक स्थिति को दर्शाता है। हमारे पास सीमित जगह और सीमित दिन थे और फिर भी हमने करोड़ों लोगों को आमंत्रित किया, जिससे वे खतरनाक स्थिति में फंस गए। जो हुआ, वह सभी के सामने है। लोगों की जान चली गई और अधिकारियों ने घंटों तक अफवाह बताकर मौतों के बारे में सच्चाई छिपाने की कोशिश की।”

प्रयागराज में भगदड़ से निपटने के सरकार के तरीके पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि इतने दिनों बाद भी मौतों की संख्या स्पष्ट नहीं है। अगर कोई नेता इस वास्तविकता के बारे में बोलता है, तो हम इसका विरोध कैसे कर सकते हैं?

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने महाकुंभ में योजना की कमी और भीड़भाड़ के बारे में भी बात की। उन्होंने आयोजन को सफल कहने पर भी सवाल उठाया।

कुंभ में पानी की गुणवत्ता पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि प्रयागराज में कई घाटों का पानी नहाने लायक नहीं पाया गया, फिर भी करोड़ों श्रद्धालुओं को पवित्र स्नान के नाम पर स्नान कराया गया। उन्होंने कहा, “केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने औद्योगिक कचरे और अनुपचारित सीवेज के कारण पानी के दूषित होने के बारे में पहले ही चिंता जताई थी। इसके बावजूद अधिकारियों ने उसके अनुसार कार्रवाई नहीं की और लाखों लोगों ने ऐसे पानी में स्नान किया जो उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक था।”

उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से कार्रवाई न किए जाने पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, “उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का यह बयान कि उन्होंने खुद पानी में डुबकी लगाई, पानी की गुणवत्ता को लेकर उठाई गई चिंताओं का वैज्ञानिक जवाब नहीं है। उन्हें पानी की जांच के नतीजे और उसमें मौजूद स्थितियों को दिखाते हुए रिपोर्ट पेश करनी चाहिए थी। इसकी बजाय, उन्होंने यह कहकर राजनीतिक प्रतिक्रिया दी कि उन्होंने खुद पानी में स्नान किया था। उन्होंने पानी में डुबकी लगाई, इसका मतलब यह नहीं है कि यह बाकी सभी के लिए सुरक्षित था।”

–आईएएनएस

एससीएच/एकेजे

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इनपुट. आईएएनएस के साथ

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