केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने किया द आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर का दौरा
Union Minister of State for Defence Sanjay Seth visited the Art of Living International Centre.

कभी लोग मानते थे कि ध्यान सिर्फ गुफाओं और हिमालय के लिए है, लेकिन गुरुदेव इसे हर घर तक ले आए है: संजय सेठ केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री
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संजय पांडेय वरिष्ट पत्रकार
‘द आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर’ इन दिनों देश और दुनिया की प्रतिष्ठित हस्तियों के आगमन का केंद्र बना हुआ है। पिछले 45 वर्षों से गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर द्वारा तनाव-मुक्त और हिंसा-मुक्त समाज के निर्माण के लिए किए जा रहे असाधारण मानवीय कार्यों को सम्मान देने हेतु शासन, उद्योग, आध्यात्मिकता, नीति-निर्माण और कला जगत की अनेक प्रमुख हस्तियां यहां एकत्रित हो रही हैं। इसी क्रम में आज सायंकाल केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ ने ‘द आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर’ पहुंचकर गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर से आत्मीय भेंट की तथा नवनिर्मित ‘ध्यान मंदिर’ में आयोजित विशेष सत्संग में भाग लिया। उल्लेखनीय है कि इस भव्य ध्यान मंदिर का उद्घाटन इसी माह 10 मई 2026 को माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया था। इस अवसर पर कर्नाटक के राज्यपाल श्री थावरचंद गहलोत, राष्ट्रमंडल सचिवालय (लंदन) के वरिष्ठ निदेशक श्री सुरेश यादव, रैपिडो के सह-संस्थापक श्री ऋषिकेश एस.आर. तथा लोकप्रिय अभिनेता श्री शरमन जोशी भी उपस्थित रहे। सत्संग के दौरान अपने विचार साझा करते हुए श्री संजय सेठ ने कहा,
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जब-जब देश को मार्गदर्शन और दिशा की आवश्यकता हुई है, तब-तब इस धरती ने गुरुदेव जैसे महान संतों को जन्म दिया है। लोग कभी मानते थे कि ध्यान केवल गुफाओं और हिमालय में ही संभव है, लेकिन गुरुदेव ने ध्यान को हर घर तक पहुंचा दिया है। आश्रम के विभिन्न प्रकल्पों का अवलोकन
दौरे के दौरान सभी गणमान्य अतिथियों ने आश्रम के विस्तृत हरित परिसर का भ्रमण किया। उन्होंने ‘श्री श्री गौशाला’ का दौरा किया, जहां भारत की 19 दुर्लभ देशी नस्लों की 1,600 से अधिक गायों का संरक्षण किया जा रहा है। यह पहल भारत की स्वदेशी गोवंश परंपरा के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
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अतिथियों ने गुरुकुल, ‘वेद आगम पाठशाला’ तथा ‘द आर्ट ऑफ लिविंग हेरिटेज स्कूल’ का भी अवलोकन किया, जहां प्राचीन वैदिक ज्ञान, मंदिर परंपराओं और आधुनिक शिक्षा का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। श्री संजय सेठ ने गुरुकुल परिसर स्थित ‘प्रताप गणपति मंदिर’ में श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना भी की। बच्चों की अद्भुत प्रतिभा ने किया मंत्रमुग्ध। द आर्ट ऑफ लिविंग के ‘इंट्यूशन प्रोसेस’ कार्यक्रम से प्रशिक्षित बच्चों की प्रस्तुतियों ने सभी अतिथियों को विशेष रूप से प्रभावित किया। यह कार्यक्रम इस सिद्धांत पर आधारित है कि जब मन शांत और केंद्रित होता है, तब बच्चों की सहज अंतर्ज्ञान क्षमता स्वाभाविक रूप से विकसित होने लगती है। कार्यक्रम से जुड़े बच्चों ने आंखों पर पट्टी बांधकर पढ़ने, रंग पहचानने और पहेलियां हल करने जैसी अद्भुत क्षमताओं का प्रदर्शन किया। हालांकि, इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल प्रदर्शन नहीं, बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास, एकाग्रता और मानसिक संतुलन विकसित करना है।
द आर्ट ऑफ लिविंग की साढ़े चार दशक लंबी यात्रा पर विचार व्यक्त करते हुए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ‘ध्यान मंदिर’ के उद्घाटन अवसर पर कहा था,
“आज यह हमारे सामने एक विशाल वटवृक्ष की तरह खड़ा है, जिसकी हजारों शाखाएं दुनिया भर में अनगिनत लोगों के जीवन को स्पर्श कर रही हैं। झारखंड के घाटशिला क्षेत्र में अपना पहला आदिवासी विद्यालय शुरू किया था। एक छोटे प्रयास के रूप में आरंभ हुई यह पहल आज लगभग 70 विद्यालयों के व्यापक नेटवर्क का रूप ले चुकी है। वर्तमान में घाटशिला, खूंटी, रांची, जमशेदपुर और गुमला सहित कई क्षेत्रों में हजारों विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान की जा रही है, जिनमें 60 गांवों में संचालित 30 आदिवासी विद्यालय भी शामिल हैं। इन विद्यालयों में शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है। यहां प्रत्येक दिन की शुरुआत ध्यान और योग से होती है। विज्ञान जैसे विषयों को ‘सरहुल’ जैसे स्थानीय आदिवासी उत्सवों और परंपराओं के माध्यम से पढ़ाया जाता है। बच्चों को हिंदी और अंग्रेजी के साथ-साथ मुंडारी और उरांव जैसी क्षेत्रीय जनजातीय भाषाओं का भी प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके अतिरिक्त, विद्यालय परिसरों में संचालित कौशल विकास केंद्र ग्रामीण महिलाओं को सिलाई प्रशिक्षण तथा युवाओं को विद्युत कार्यों का प्रशिक्षण देकर शिक्षा को आत्मनिर्भरता और आजीविका से जोड़ रहे हैं। गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर का यह विचार कि, हर अपराधी के भीतर एक पीड़ित सहायता के लिए पुकार रहा होता है, जब पीड़ित का उपचार होता है, तो अपराधी समाप्त हो जाता है।
झारखंड की जेलों में चल रहे पुनर्वास कार्यक्रमों की प्रेरणा बना है। इन पहलों ने सैकड़ों बंदियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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इसी प्रकार, द आर्ट ऑफ लिविंग ने नक्सल-प्रभावित क्षेत्रों में भी शांति और संवाद का मार्ग प्रशस्त किया है। झारखंड के संवेदनशील क्षेत्र ‘पटमदा’ में नक्सली नेताओं के साथ गुरुदेव के प्रत्यक्ष संवाद ने विश्वास और संचार के नए रास्ते खोले। वहीं, 35,000 से अधिक ग्रामीणों की उपस्थिति वाला विशाल सत्संग वर्षों से हिंसा और अशांति से प्रभावित समुदायों के लिए आशा और परिवर्तन का महत्वपूर्ण अवसर बना। संस्था द्वारा समर्थित प्राकृतिक खेती की पहलें बंजर भूमि को पुनर्जीवित करने, किसानों को टिकाऊ कृषि पद्धतियों से पुनः जोड़ने तथा रासायनिक खेती से प्रभावित आजीविकाओं को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
द आर्ट ऑफ लिविंग अपने 45वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है और झारखंड में उसका कार्य गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर के उस अटूट विश्वास का जीवंत उदाहरण है कि स्थायी परिवर्तन, चाहे वह किसी व्यक्ति के भीतर हो या पूरे समाज में, उसकी शुरुआत भीतर से ही होती है।



