अब क्यूबा और राऊल कास्त्रो अमेरिका के निशाने पर!

Now Cuba and Raul Castro are in America's sights!

(आलेख : एम ए बेबी, अंग्रेजी से अनुवाद : संजय पराते)

क्यूबा सदियों तक स्पेन का उपनिवेश रहा। गुलामी के इस दौर में, उसने उपनिवेशवाद के खिलाफ बहादुरी से लड़ाई लड़ी और अपने अधिकारों के लिए ज़बरदस्त संघर्ष करके आज़ादी हासिल की। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस बात के लिए अधीर हैं कि क्यूबा की आज़ादी फिर से छीन ली जाए और उसे गुलाम बनाकर उस पर राज किया जाए। दूसरी बार पद संभालने के बाद से, क्यूबा के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंधों को और कड़ा करना और 20 मई को वहां के पूर्व राष्ट्रपति राऊल कास्त्रो के खिलाफ आरोप तय करना, क्यूबा पर कब्ज़ा करने के इरादे की घोषणा के अलावा और कुछ नहीं है। असली मकसद समाजवादी क्यूबा को खत्म करना है।

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ट्रंप प्रशासन ने अब 1996 में हुई एक घटना के आधार पर राउल कास्त्रो और क्यूबा पर हमला करने की योजना बनाई है। 24 फरवरी 1996 को, क्यूबा के हवाई क्षेत्र में गैर-कानूनी तरीके से घुसे दो छोटे विमानों को क्यूबा की वायु सेना ने मार गिराया था। हवाई क्षेत्र का पहला नियम यह है कि पायलटों को बिना इजाज़त किसी दूसरे देश के हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होती है। जैसा कि ‘बैक चैनल टू क्यूबा : द हिडन0 हिस्ट्री ऑफ़ नेगोशिएशन्स बिटवीन वॉशिंगटन एंड हवाना’ (विलियम एम. लियोग्रांडे और पीटर कॉर्नब्लुह द्वारा सह-लिखित) किताब में बताया गया है, क्यूबा के लोगों का एक समूह, जो लगातार एक साल से अंतर्राष्ट्रीय हवाई क्षेत्र का उल्लंघन कर रहा था, बार-बार दी गई चेतावनियों को नज़रअंदाज़ करता रहा। क्यूबा ने साफ़ कर दिया था कि अगर वे अंतर्राष्ट्रीय हवाई क्षेत्र के नियमों का उल्लंघन करना जारी रखते हैं, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।

1996 में विमानों पर गोलीबारी*

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इस उकसावे वाली घुसपैठ, उसके बाद हुई गोलीबारी और चार क्यूबाई-अमेरिकी पायलटों की मौत के लिए कौन ज़िम्मेदार था? होज़े बासल्टो के अलावा और कौन हो सकता है, जो क्यूबा-विरोधी तख्तापलट की कई कोशिशों में सीधे तौर पर शामिल था — जिसमें फिदेल कास्त्रो की हत्या के लिए सीधा हमला और सबसे बढ़कर, सीआईए द्वारा नियोजित 1961 का कुख्यात ‘बे ऑफ़ पिग्स’ तख्तापलट भी शामिल है! उसने 1996 की विवादास्पद घटनाओं की योजना बनाने में सीधे तौर पर हिस्सा लिया था।

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1959 में क्यूबा की क्रांति की जीत के बाद, जहाँ ज़्यादातर लोगों ने क्रांति का स्वागत किया था, वहीं एक छोटा-सा संपत्तिशाली वर्ग अलग राय रखता था। तानाशाह फुल्जेन्सियो बतिस्ता के नेतृत्व वाली अमेरिकी कठपुतली सरकार के समर्थकों का एक छोटा समूह देश छोड़कर चला गया। उन्होंने मियामी, फ्लोरिडा और अमेरिका के उन इलाकों में, जो क्यूबा द्वीप के पास हैं, डेरा डालकर क्यूबा की क्रांति को पलटने की अपनी कोशिशें जारी रखीं। ऐसे दस्तावेज़ सामने आए हैं, जिनसे पता चलता है कि सीआईए ने क्रांतिकारी नेता फिदेल कास्त्रो की हत्या के लिए सीधे तौर पर और माफिया समूहों के ज़रिए 600 से ज़्यादा बार कोशिशें कीं। आतंकवादी होज़े बासुल्टो ने खुद ऐसी योजनाओं में हिस्सा लिया और उस हमलावर समूह का नेतृत्व किया, जो गैर-कानूनी तरीके से बार-बार क्यूबा के हवाई क्षेत्र में घुसता था और टकराव भड़काने की कोशिश करता था। हालाँकि, उसके साथ आए दो छोटे विमान मार गिराए गए, लेकिन बासुल्टो का विमान बिना किसी दुर्घटना के वापस लौट आया था।

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1996 में, तत्कालीन राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो ने बार-बार चेतावनी दी थी कि उनके देश की सीमा का बार-बार उल्लंघन करने के गंभीर परिणाम होंगे। इस बात के सबूत हैं कि अमेरिकी प्रशासन के मुख्य केंद्र व्हाइट हाउस, विदेश विभाग और संघीय उड्डयन प्रशासन (फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन – एफएए) ने इस मामले पर चर्चा की थी। एक ईमेल संदेश में बसुल्टो के क्यूबा-विरोधी समूह — जो ‘ब्रदर्स टू द रेस्क्यू’ नाम से काम करता है — पर नियंत्रण न होने के संभावित नतीजों की ओर इशारा किया गया था। गोलीबारी की घटना से एक महीने पहले भेजे गए उस संदेश में कहा गया था : “सबसे बुरा हाल यह हो सकता है कि किसी दिन क्यूबाई इनमें से किसी विमान को मार गिराएं और एफएए को इसके लिए पूरी तरह तैयार रहना चाहिए।”

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यह साफ़ है कि अमेरिकी अधिकारियों ने खुद इस बात पर चर्चा की थी कि अंतर्राष्ट्रीय विमानन नियमों का लगातार उल्लंघन करने पर उन छोटे विमानों को मार गिराया जा सकता है। ऊपर दिया गया ई-मेल संदेश इसका साफ़ सबूत है। दूसरे शब्दों में, 30 साल पहले हुई एक घटना — जिसमें क्यूबा के पास सीआईए की मदद से अपनी संप्रभुता को बार-बार चुनौती देने वाले दो छोटे विमानों को मार गिराने के अलावा कोई चारा नहीं था — का इस्तेमाल अब अमेरिका, राउल कास्त्रो को दोषी ठहराने के लिए कर रहा है। उस समय, जनरल राउल कास्त्रो — जो अब 95 साल के हैं (उनका जन्मदिन 3 जून को था) — क्यूबा के रक्षा मंत्री थे। डोनाल्ड ट्रंप, जो अंतर्राष्ट्रीय कानूनों को नज़रअंदाज़ करते हैं और अपनी मर्ज़ी को ही कानून मानते हैं, असल में राउल कास्त्रो को निशाना बनाकर पश्चिमी गोलार्ध के एकमात्र समाजवादी देश को खत्म करना चाहते हैं।

 

3 जनवरी 2026 को, अमेरिकी सैनिकों ने गैर-कानूनी तरीके से वेनेजुएला में घुसकर उस देश के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी, सेलिया फ्लोरेस को अगवा कर लिया। तब से उन पर अमेरिका में एक दिखावटी मुकदमा चलाया जा रहा है। अब यह बिल्कुल साफ है कि अमेरिका अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करके एक वैश्विक अपराधी देश की तरह काम कर रहा है। वेनेजुएला वाले मामले की तर्ज पर ही, क्यूबा के क्रांतिकारी नेता जनरल राउल कास्त्रो को अगवा करके अमेरिका लाने के लिए एक आतंकवादी कार्रवाई का रास्ता बनाने के मकसद से 1996 की घटना को फिर से हवा दी जा रही है।

 

1959 में सफल हुई क्यूबा की क्रांति ने अमेरिकी शासकों को चौंका दिया था। तब से वे, जितनी जल्दी हो सके, क्यूबा में तख्तापलट करके इस देश को अपने प्रभाव में लाने की योजना बना रहे हैं। साढ़े छह दशकों से ज़्यादा कोशिश करने के बाद भी, अमेरिकी शासक वर्ग सफल नहीं हो पाया है। इसीलिए अमेरिकी साम्राज्यवादी शासन और युद्ध-पिपासु राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, क्यूबा पर हमला करने और उस पर कब्ज़ा करने की एक भयानक योजना बनाने और उसे लागू करने के लिए कट्टर हैं।

 

*हमले की तैयारी*

 

20 मई को अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा राउल कास्त्रो के ख़िलाफ़ आरोप तय किए जाने को, मादुरो मॉडल की तरह ही उन्हें अगवा करने और अमेरिकी सरकार द्वारा एक दिखावटी मुक़दमा चलाने की योजना की सार्वजनिक घोषणा की शुरुआत के तौर पर देखा जाना चाहिए। अमेरिकी अटॉर्नी जेसन ए. रेडिंग क्विनोन्स और असिस्टेंट अटॉर्नी एबी डी. वैक्समैन और माइकल ई. गिलफ़ार्ब के हस्ताक्षर वाला यह आरोप-पत्र, अपने आप में किसी फ़ैसले जैसा ही है।

 

संघीय जांच ब्यूरो (फ़ेडरल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन – एफबीआई) के डायरेक्टर कश्यप (काश) प्रमोद पटेल भारतीय मूल के हैं, इसलिए इन घटनाक्रमों में भारतीय जुड़ाव भी है। पटेल ने कहा है कि राउल कास्त्रो और पांच अन्य क्यूबाई नागरिकों के ख़िलाफ़ आरोप तय किया जाना इस बात का सबूत है कि एफबीआई कभी कुछ भी नहीं भूलती और यह आरोप तय करना जवाबदेही की दिशा में एक बड़ा कदम है।

 

14 मई को, राउल कास्त्रो पर आरोप लगने से छह दिन पहले, अमेरिकी वायु सेना का बोइंग सी-40बी क्लिपर जेट हवाना के मशहूर होज़े मार्टी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरा। सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (सीआईए) के अधिकारियों का एक ग्रुप, जिसके मुखिया जॉन रैटक्लिफ़ थे, क्यूबा के एक अहम प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत में शामिल हुआ। क्यूबा के प्रतिनिधिमंडल में राउल कास्त्रो के पोते, राउल गुइलेर्मो रोड्रिग्ज़ कास्त्रो भी अहम भूमिका में थे। वे कुछ समय से अमेरिकी प्रशासन के प्रमुख अधिकारियों के साथ क्यूबा की तरफ़ से समानांतर बातचीत करने वाली टीम का हिस्सा रहे थे।

 

सीआईए प्रमुख ने क्यूबा के प्रतिनिधिमंडल को डराने-धमकाने की कोशिश की। क्यूबाई प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें याद दिलाया कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी की सुरक्षा में तैनात 32 क्यूबाई सुरक्षा गार्डों को मारकर उनका अपरहण किया गया था। असल में, वेनेजुएला की राजधानी काराकस में 32 क्यूबाई नागरिकों की हत्या के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर क्यूबा की आपराधिक अदालत में मुकदमा चलना चाहिए। हिरोशिमा और नागासाकी पर बम गिराने के लिए अमेरिका को कभी सज़ा नहीं मिली (याद रहे, यह हारे हुए जापान में हुआ था)! परमाणु हथियारों का जखीरा रखने वाला ऐसा वैश्विक बदमाश कहता है कि क्यूबा के हवाई क्षेत्र का बार-बार उल्लंघन करने पर दो छोटे विमानों को मार गिराना अंतर्राष्ट्रीय कानून के हिसाब से बहुत बड़ा अपराध है!

 

*क्यूबा तैयार है*

 

अमेरिका की एक मुख्य मांग यह है कि क्यूबा अपनी राजनीतिक और आर्थिक नीतियों में बदलाव करे और समाजवादी रास्ता छोड़ दे। क्यूबा के नेताओं का जवाब बिल्कुल साफ है कि ऐसी बात सोचने की भी ज़रूरत नहीं है! क्यूबा ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिकी धमकियों के आगे नहीं झुकेगा। सीआईए को अच्छी तरह पता है कि क्यूबा के खिलाफ किसी भी कदम का जवाब वेनेजुएला के मामले से अलग होगा। सिर्फ़ 1.1 करोड़ आबादी वाला देश क्यूबा, अमेरिकी सैन्य समूहों के हमले के खतरे का लगातार सामना कर रहा है। अमेरिका और उसके ज़्यादातर सहयोगियों ने साढ़े छह दशकों से जो नाकेबंदी लागू कर रखी है, उससे इस छोटे-से देश को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। इसके अलावा, लगभग एक साल से अलग-अलग स्तरों पर ईंधन की भारी कमी बनी हुई है। अभी क्यूबा में दिन में लगभग 22 घंटे बिजली नहीं रहती है।

 

अमेरिकी नाकेबंदी की क्रूरता के बावजूद, जिसने खासकर आर्थिक रूप से, जीवन की स्थितियों को मुश्किल बना दिया है, क्यूबा के लोगों ने कम्युनिस्ट पार्टी के खिलाफ रुख नहीं किया है और न ही सरकार के खिलाफ बगावत की है। लंबे समय से साम्राज्यवादी और पूंजीवादी ताकतें यह गलत अनुमान लगाती रही हैं कि वहां सत्ता परिवर्तन होगा। ऐसा क्यों नहीं हुआ? कम्युनिस्ट पार्टी और वहां के मजदूर, युवा, किसान, महिलाएं और छात्र लगातार जनता के सभी तबकों के बीच मजबूत और धैर्यपूर्ण राजनीतिक प्रतिरोध की गतिविधियां चला रहे हैं। इसी के तहत, पूरे क्यूबा में नौ पन्नों की एक पुस्तिका बांटी जा रही है। अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच, संभावित सैन्य हमले की स्थिति में, व्यावहारिक उपायों के साथ नागरिक प्रतिरक्षा द्वारा एक पारिवारिक निर्देशिका जारी की गई है। इसमें हर क्यूबावासी के लिए सुरक्षा, प्रतिरोध और बचाव से जुड़े कर्तव्यों की रूपरेखा दी गई है। इसमें हवाई हमले की स्थिति में सुरक्षित स्थान पर जाने, प्राथमिक चिकित्सा प्रदान करने और क्यूबा की धरती पर अमेरिकी हमले की स्थिति में अमेरिका का मुकाबला करने और उसे हराने के बारे में विस्तृत निर्देश दिए गए हैं।

 

*राउल कास्त्रो – एक क्रांतिकारी योद्धा*

 

कुछ लोग राउल कास्त्रो को सिर्फ़ क्रांतिकारी नेता फिदेल कास्त्रो के छोटे भाई के तौर पर जानते हैं। असल में, राउल कास्त्रो एक क्रांतिकारी योद्धा हैं, जो क्यूबा की आज़ादी की हर लड़ाई में हमेशा फिदेल के साथ खड़े रहे। आधुनिक क्यूबाई क्रांति का पहला दौर 26 जुलाई 1953 को सैंटियागो डी क्यूबा में मोनकाडा बैरकों पर अचानक हुए हमले के साथ शुरू हुआ। उस समय फिदेल 27 साल के थे और राउल 22 साल के। मोनकाडा संघर्ष को दबा दिए जाने के बाद, दूसरों के साथ-साथ फिदेल और राउल को भी गिरफ़्तार कर लिया गया था। मुकदमे के दौरान फिदेल की दलीलें अब ‘हिस्ट्री विल एब्सॉल्व मी’ (इतिहास मुझे बरी करेगा) नाम की एक मशहूर किताब के रूप में उपलब्ध हैं। उनकी रिहाई के लिए हुए जन-विरोध के बाद, फिदेल, राउल और उनके दूसरे साथियों को लंबी जेल की सज़ा के बाद रिहा कर दिया गया।

 

मेक्सिको में ही, जहाँ क्यूबाई समूह छिपा हुआ था, उनकी मुलाक़ात चे ग्वेरा से हुई — एक क्रांतिकारी सितारे, जो दुनिया भर के युवाओं के लिए हमेशा प्रेरणा बने रहे। राउल कास्त्रो ने ही चे को फिदेल से मिलवाया था। उसके बाद जो हुआ, वह इतिहास बन गया। फिदेल, राउल और चे 80 से ज़्यादा लड़ाकों के साथ ‘ग्रानमा’ नाम की नाव से क्यूबा के लिए रवाना हुए। क्रांति को सफल बनाने के लिए उन्होंने सिएरा माएस्ट्रा पहाड़ों के जंगलों में गुरिल्ला युद्ध और ग्रामीण इलाकों में जन-आंदोलनों को एक साथ मिलाया। इसमें फिदेल, चे, राउल और कैमिलो सिएनफ्यूगोस ने मुख्य भूमिका निभाई। राउल कास्त्रो, फिदेल से पहले ही मार्क्सवाद और कम्युनिस्ट पार्टी के संपर्क में आ चुके थे। उस समय क्यूबा में कम्युनिस्ट पार्टी को ‘पॉपुलर सोशलिस्ट पार्टी’ के नाम से जाना जाता था। अपनी युवा शाखा के नेता के तौर पर, राउल कास्त्रो ने 1953 में वियना में आयोजित ‘वर्ल्ड यूथ फेस्टिवल’ में हिस्सा लिया था।

 

*आर्थिक नाकेबंदी*

 

क्यूबा एक छोटा-सा देश है, जो हिम्मत और बहादुरी की पहचान है। ट्रंप प्रशासन ने क्यूबा के खिलाफ सीधे हमले की योजना का ऐलान किया है। साथ ही, अमेरिका ने उन देशों के खिलाफ भी प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है, जो क्यूबा के साथ कोई भी आर्थिक और व्यावसायिक साझा उपक्रम करते हैं। इस प्रतिबंध की वजह से क्यूबा में पर्यटन, उड्डयन, शिपिंग, खनन, ऊर्जा, स्वास्थ्य और दवा निर्माण जैसे क्षेत्र में भारी संकट और ठहराव आ गया है। उदाहरण के लिए, कनाडा की एक बड़ी बहुराष्ट्रीय खनन कंपनी, शेरिट इंटरनेशनल, दशकों से क्यूबा में निकेल और कोबाल्ट का खनन कर रही है। अमेरिका के नए प्रतिबंधों के कारण वह क्यूबा से अपना कारोबार समेट रही है। कनाडाई कंपनी ने क्यूबा से उस 27.7 करोड़ डॉलर की रकम को वापस करने को कहा है, जो उसने संयुक्त उपक्रम में निवेश किया था। अनुमान है कि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण क्यूबा को हर साल 66,775 करोड़ रुपये से 76,314 करोड़ रुपये (7 अरब डॉलर से 8 अरब डॉलर के बीच) का नुकसान हो रहा है। छह दशकों से भी ज़्यादा समय में कुल नुकसान 152.63 लाख करोड़ रुपये (160 अरब डॉलर) का हुआ है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण क्यूबा पड़ोसी देश वेनेजुएला या मैक्सिको से कच्चा तेल भी नहीं ले पा रहा है।

 

क्यूबा की आज़ादी की लड़ाई के बाद जन्मे और देश की क्रांति के बाद की पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करने वाले मिगुएल डियाज़-कैनेल देश के वर्तमान राष्ट्रपति और क्यूबा की कम्युनिस्ट पार्टी के प्रथम सचिव हैं। ट्रम्प की धमकी का जवाब देते हुए उन्होंने कहा है : देश की संप्रभुता पर कोई बहस नहीं हो सकती ; हम हार नहीं मानेंगे। हम युद्ध नहीं चाहते। लेकिन हम तैयार रहेंगे। हम अपनी ज़िंदगी क्रांति के लिए समर्पित करते हैं। पार्टी कांग्रेस में अपने भावुक समापन भाषण में, राउल ने घोषणा की कि वे उम्र के कारण अपनी प्रशासनिक नेतृत्व की ज़िम्मेदारियों से हट रहे हैं, ठीक वैसे ही, जैसे उनके बड़े भाई फिदेल ने किया था। उनके शब्द मज़बूत और साहसी थे : अब समय आ गया है कि नई पीढ़ी मुख्य ज़िम्मेदारियों को संभाले। मैं नेतृत्व की ज़िम्मेदारियों से हट रहा हूँ। लेकिन अगर देश और क्रांति के सामने कोई मुश्किल घड़ी आती है, तो मैं लड़ाई में आपके साथ शामिल होने के लिए एक सशस्त्र स्वयंसेवक के रूप में मौजूद रहूँगा।

 

अब, जब साम्राज्यवादी ताकतें उस योद्धा को निशाना बना रही हैं — और यह सब उनके 95वें जन्मदिन के कुछ ही दिनों बाद हो रहा है — तो युवा, बच्चे और बुजुर्ग क्यूबा के साथ-साथ अमेरिका समेत दूसरे देशों में भी साम्राज्यवाद-विरोधी रैलियां कर रहे हैं। अमेरिका की कम्युनिस्ट पार्टी ने क्यूबा पर हमला करने की अमेरिकी सरकार की योजना की निंदा करते हुए इसे अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। ‘पास्टर्स फॉर पीस’ (शांति के लिए प्रचारक) नाम का अमेरिकी आंदोलन क्यूबा के साथ एकजुटता दिखाते हुए सबसे आगे खड़ा है।

 

*क्यूबा के साथ एकजुटता जरूरी*

 

क्यूबा के साथ एकजुटता की गतिविधियों को मज़बूत करना और इसका विस्तार करना एक ज़रूरी काम है, क्योंकि ईरान के साथ युद्ध विराम लागू होने के बाद ट्रंप क्यूबा पर ध्यान केंद्रित करने की योजना बना रहे हैं। ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से क्यूबा पर कब्ज़ा करने का अपना सपना ज़ाहिर किया है। उन्होंने क्यूबा के तट पर अमेरिकी विमान वाहक पोत यूएसएस निमित्ज़ को भेजा है। उन्हें गलतफ़हमी है कि क्यूबा का नेतृत्व डरकर घुटने टेक देगा। लेकिन क्यूबा ने साफ़ कर दिया है कि अगर उस पर हमला हुआ, तो साम्राज्यवाद को क्यूबा के लोगों के असली वीरतापूर्ण चरित्र का पता चल जाएगा!

 

क्यूबा के सामने मुश्किल और अहम दिन आने वाले हैं। उसके साथ आज मज़बूत अंतर्राष्ट्रीय एकजुटता की ज़रूरत है। क्यूबा अकेला नहीं है, प्रगतिशील मानवता उसके साथ खड़ी है। हमें उम्मीद है कि क्यूबा के आज के लड़ाके — जो होज़े मार्टी, फिदेल, चे, कैमिलो सिएनफ्यूगोस और फ्रैंक पाइस के वंशज हैं — अपने पूर्वजों की वीरतापूर्ण मिसाल पर चलने के लिए तैयार रहेंगे।

 

कुछ समय पहले मलयालम विचारक और कहानीकार पॉल ज़कारिया ने क्यूबा का दौरा किया था। अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से आई मुश्किलों के बावजूद, उन्होंने वहाँ देखी गई ज़िंदगी की ख़ासियतों का ज़िक्र किया है। यह एक ऐसा समाज है, जहाँ चोर नहीं हैं, आम तौर पर बराबरी का माहौल है और अश्वेत और श्वेत लोगों के बीच कोई भेदभाव नहीं है। उनका कहना है कि जो व्यक्ति पहले पूँजीवादी व्यवस्था की कुछ बातों का समर्थन करते थे, वे भी समाजवाद से सहमत हो जाएँगे, यदि क्यूबा में उन्होंने जो कुछ देखा है, अगर वह सचमुच समाजवाद है तो! मशहूर पत्रकार उल्लेख एन.पी. की चर्चित किताब ‘मैड अबाउट क्यूबा’ भी विस्तार से विश्लेषण करते हुए यही बात बताती है।

 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दुनिया के किसी भी देश के खिलाफ टैरिफ युद्ध या सशस्त्र हमला करने के मूड में हैं। इसके तहत क्यूबा पर हमला करने की आक्रामक योजना विश्व राजनीति में कई स्तरों पर एक निर्णायक मोड़ साबित होगी। ट्रंप की हाल-फिलहाल की घोषणा यह है कि ईरान से किसी भी तरह बाहर निकलने के बाद, उसका अगला कदम क्यूबा को आज़ाद कराना होगा। साम्राज्यवाद क्यूबा और वहां के लोगों को नष्ट करने के मिशन पर है। यह केवल ट्रंप और मार्को रुबियो का भ्रम है कि क्यूबा को वेनेजुएला की तरह गुलाम बनाया जा सकता है। क्यूबा के लोग एकजुट होकर इसका विरोध करेंगे। क्यूबा कभी नहीं झुकेगा। दुनिया क्यूबा के लोगों के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी।

 

शहरों, गांवों, कारखानों, विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, स्कूलों, वाचनालयों, खेल के मैदानों, कला और संस्कृति के स्थानों और खेतों में क्यूबा के साथ एक एकजुटता आंदोलन खड़ा होना चाहिए, और जितना हो सके, उतनी ज़ोर से आवाज उठनी चाहिए : क्यूबा अकेला नहीं है, क्यूबा से दूर रहो, राउल से दूर रहो! भींची हुई मुट्ठी की तरह, साम्राज्यवादविरोधी भावना पूरे देश में फैलनी चाहिए।

 

(लेखक माकपा के महासचिव और पूर्व सांसद हैं। अनुवादक अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध छत्तीसगढ़ किसान सभा के उपाध्यक्ष हैं।

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