आप-आपके गुंडो में अगर दम है,…. अखिलेश यादव को ओमप्रकाश राजभर ने किया चलेंगे
ओम प्रकाश राजभर का अखिलेश यादव पर तीखा हमला, बोले-लोकतांत्रिक तरीके से लड़ें, गुंडागर्दी से नहीं'; बलिया विवाद के बाद सियासी संग्राम तेज

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। प्रदेश सरकार में पंचायती राज मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर तथा समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बीच जुबानी जंग लगातार तीखी होती जा रही है। हाल के दिनों में दोनों नेताओं के बीच कई मुद्दों पर आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले हैं और अब बलिया में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद यह राजनीतिक टकराव और अधिक मुखर हो गया है।बलिया में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी और उसके कार्यकर्ताओं पर निशाना साधते हुए सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लंबी पोस्ट लिखी। उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ बड़ी संख्या में समाजवादी पार्टी से जुड़े लोग सड़क पर उतरे, लेकिन इससे वह विचलित होने वाले नहीं हैं। राजभर ने अपने बयान में अखिलेश यादव पर कई राजनीतिक आरोप लगाए और लोकतांत्रिक तरीके से मुकाबला करने की चुनौती भी दी।
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बलिया की घटना के बाद गरमाई राजनीति
बलिया में मंत्री ओम प्रकाश राजभर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शनकारियों ने उनके खिलाफ नारेबाजी की और काले कपड़े पहनकर विरोध दर्ज कराया। इस घटना के बाद प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया। विरोध प्रदर्शन के जवाब में राजभर ने समाजवादी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह सब राजनीतिक हताशा का परिणाम है।उन्होंने कहा कि विरोध करने वालों ने लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करने के बजाय दबाव बनाने की राजनीति अपनाई है। उनके अनुसार विरोध के पीछे समाजवादी पार्टी की मानसिकता झलकती है, जो राजनीतिक असहमति को स्वीकार करने के बजाय विरोध और दबाव की राजनीति करती रही है।
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एक्स पोस्ट के जरिए अखिलेश यादव पर साधा निशाना
ओम प्रकाश राजभर ने अपनी एक्स पोस्ट में सीधे समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए लिखा कि वह अपने समर्थकों की गतिविधियों को देखें। उन्होंने आरोप लगाया कि बलिया में बड़ी संख्या में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता उनके खिलाफ सड़क पर उतर आए, क्योंकि उन्हें उनके द्वारा कही जा रही बातें पसंद नहीं आ रही हैं।राजभर ने कहा कि वह केवल सच बोल रहे हैं और यही कारण है कि विपक्ष परेशान है। उन्होंने दावा किया कि सच को स्वीकार करने के बजाय उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन कराया जा रहा है।उन्होंने अपने पोस्ट में कहा कि समाजवादी पार्टी लंबे समय से गैर-यादव पिछड़े वर्ग के प्रति सम्मानजनक दृष्टिकोण नहीं रखती रही है। उनका आरोप था कि पार्टी की राजनीति विशेष जातीय समीकरणों तक सीमित रही है और अन्य पिछड़े वर्गों की उपेक्षा की जाती रही है।
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गैर-यादव ओबीसी राजनीति का उठाया मुद्दा
ओम प्रकाश राजभर ने अपने बयान में गैर-यादव ओबीसी समाज का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा से गैर-यादव पिछड़े वर्ग को बराबरी का सम्मान देने में विफल रही है।उन्होंने दावा किया कि अब पिछड़ा समाज राजनीतिक रूप से पहले की तुलना में अधिक जागरूक हो चुका है और वह अपने हितों को बेहतर तरीके से समझ रहा है। राजभर के अनुसार, गैर-यादव ओबीसी वर्ग अब किसी भी राजनीतिक दल की पारंपरिक राजनीति का हिस्सा बनने के बजाय अपने अधिकारों और सम्मान के आधार पर निर्णय ले रहा है।राजभर ने कहा कि यही कारण है कि कुछ राजनीतिक दलों में बेचैनी दिखाई दे रही है
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‘मुर्दाबाद के नारों से डरने वाला नहीं’
विरोध प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि वह मुर्दाबाद के नारों या काले कपड़ों के प्रदर्शन से डरने या घबराने वाले नेता नहीं हैं।उन्होंने कहा कि संघर्ष उनके राजनीतिक जीवन का हिस्सा रहा है और वह ऐसे विरोधों से कभी विचलित नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा कि जिस समाज से वह आते हैं, उस समाज ने वर्षों तक सामाजिक और राजनीतिक संघर्ष किया है। इसलिए नारेबाजी या विरोध प्रदर्शन उनके लिए कोई नई बात नहीं है।उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में विरोध करने का अधिकार सभी को है, लेकिन विरोध की भी अपनी मर्यादा होती है। यदि कोई राजनीतिक दल लोकतांत्रिक मूल्यों के बजाय डराने या दबाव बनाने का प्रयास करेगा तो उसका जवाब जनता लोकतांत्रिक तरीके से देगी।
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काले कपड़ों के प्रदर्शन पर भी दिया जवाब
राजभर ने विरोध प्रदर्शन के दौरान काले कपड़े पहनकर किए गए प्रदर्शन पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें काले रंग से कोई आपत्ति नहीं है और यदि विपक्ष काले कपड़े दिखाकर राजनीतिक संदेश देना चाहता है तो वह ऐसा करता रहे।उन्होंने कहा कि रंगों के माध्यम से राजनीति करने से जनता के वास्तविक मुद्दे हल नहीं होते। जनता विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था जैसे विषयों पर राजनीति चाहती है। इसलिए केवल प्रतीकात्मक विरोध से कोई राजनीतिक लाभ मिलने वाला नहीं है।
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लोकतांत्रिक मुकाबले की दी चुनौती
ओम प्रकाश राजभर ने अपने बयान में अखिलेश यादव को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनमें राजनीतिक ताकत है तो लोकतांत्रिक तरीके से मुकाबला करें।उन्होंने कहा कि चुनाव लोकतंत्र का सबसे बड़ा माध्यम है और जनता ही अंतिम निर्णय करती है। यदि विपक्ष को अपनी लोकप्रियता पर भरोसा है तो वह चुनावी मैदान में अपनी ताकत दिखाए, न कि विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी के जरिए राजनीतिक माहौल बनाने का प्रयास करे।राजभर ने कहा कि लोकतंत्र में जनता सबसे बड़ी निर्णायक होती है और जनता ही तय करती है कि किसे समर्थन देना है।
भगवा को लेकर भी दिया बयान
अपने बयान में ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान चाहे किसी भी रंग के झंडे या कपड़े दिखाए जाएं, लेकिन भगवा का सम्मान और उसकी राजनीतिक स्वीकार्यता बनी रहेगी।उन्होंने कहा कि विपक्ष चाहे जितने भी राजनीतिक प्रतीकों का इस्तेमाल करे, लेकिन जनता विकास और सुशासन के आधार पर निर्णय करेगी। उन्होंने दावा किया कि आगामी चुनावों में भी भाजपा और उसके सहयोगी दल जनता का विश्वास जीतेंगे।
जनता के सड़क पर उतरने की दी चेतावनी
राजभर ने कहा कि यदि उनके समर्थकों और आम जनता ने भी विरोध के जवाब में सड़क पर उतरने का फैसला किया तो स्थिति विपक्ष के लिए कठिन हो सकती है।हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में कानून और व्यवस्था बनाए रखना आवश्यक है। उनका कहना था कि राजनीतिक दलों को अपने कार्यकर्ताओं को संयमित रखना चाहिए ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।उन्होंने विपक्ष से भी अपील की कि वह लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करे और राजनीतिक मतभेदों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से सुलझाए।
‘मैं संघर्ष से निकला हुआ व्यक्ति हूं’
अपने राजनीतिक जीवन का उल्लेख करते हुए ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि वह जमीन से जुड़े नेता हैं और संघर्ष के रास्ते से राजनीति में आगे बढ़े हैं।उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा समाज के कमजोर, पिछड़े और वंचित वर्गों की आवाज उठाने का प्रयास किया है। उनका दावा था कि राजनीतिक संघर्ष उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रहा है और विरोध से वह कभी पीछे हटने वाले नहीं हैं।राजभर ने कहा कि उन्होंने वर्षों तक सामाजिक न्याय, पिछड़ों के अधिकार और समान भागीदारी के मुद्दों पर आंदोलन किए हैं। इसलिए विरोध प्रदर्शन या राजनीतिक हमलों से वह डरने वाले नहीं हैं।
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सपा कार्यकर्ताओं पर लगाए गंभीर आरोप
ओम प्रकाश राजभर ने अपने बयान में समाजवादी पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक असहमति को हिंसक या आक्रामक तरीके से व्यक्त करना लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है।उन्होंने कहा कि किसी भी दल के नेताओं और कार्यकर्ताओं को संयम बनाए रखना चाहिए। लोकतंत्र में बहस और संवाद की परंपरा मजबूत होनी चाहिए, न कि टकराव और उग्र प्रदर्शन की।राजभर ने कहा कि यदि किसी को उनके विचारों से असहमति है तो उसका जवाब तथ्यों और राजनीतिक बहस के माध्यम से दिया जाना चाहिए।
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योगी सरकार का भी किया उल्लेख
अपने बयान में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार कानून व्यवस्था के मामले में पूरी तरह प्रतिबद्ध है।उन्होंने कहा कि यदि कोई भी व्यक्ति कानून हाथ में लेने का प्रयास करेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उनका कहना था कि प्रदेश सरकार अपराध और अराजकता के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है।उन्होंने यह भी कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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ओबीसी राजनीति पर फिर केंद्रित हुए राजभर
अपने पूरे बयान में ओम प्रकाश राजभर ने बार-बार पिछड़े वर्ग, विशेषकर गैर-यादव ओबीसी समाज का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि अब यह वर्ग राजनीतिक रूप से पहले से अधिक संगठित और जागरूक है।उनका कहना था कि पिछड़े वर्ग के मतदाता अब केवल जातीय समीकरणों के आधार पर मतदान नहीं करते, बल्कि विकास, सम्मान और राजनीतिक भागीदारी जैसे मुद्दों को भी महत्व देते हैं।राजभर ने कहा कि उनकी पार्टी लगातार पिछड़े, दलित और वंचित वर्गों के अधिकारों की लड़ाई लड़ती रही है और आगे भी यह संघर्ष जारी रहेगा।
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प्रदेश की राजनीति में बढ़ी बयानबाजी
उत्तर प्रदेश में आगामी राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी तैयारियों के बीच नेताओं के बीच बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेता एक-दूसरे पर लगातार हमलावर हैं।हाल के दिनों में कई मुद्दों पर भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक टकराव देखने को मिला है। ओम प्रकाश राजभर के ताजा बयान ने इस सियासी बहस को और अधिक तेज कर दिया है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जैसे-जैसे चुनावी गतिविधियां बढ़ेंगी, वैसे-वैसे राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी और तेज हो सकता है। पिछड़ा वर्ग, कानून व्यवस्था, सामाजिक न्याय और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में बने रह सकते हैं।फिलहाल बलिया में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद ओम प्रकाश राजभर और अखिलेश यादव के बीच जुबानी जंग थमती नजर नहीं आ रही है। एक ओर राजभर लगातार समाजवादी पार्टी पर निशाना साध रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्ष भी सत्ता पक्ष की नीतियों और बयानों पर सवाल उठा रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक बयानबाजी और अधिक तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।



