2029 की तैयारी में जुटी कांग्रेस:भारत जोड़ो से सत्ता जोड़ो तक, राहुल गांधी की रणनीति तेज
राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की नई राजनीतिक पिच तैयार

भारतीय राजनीति में कई बार फैसले सिर्फ चुनाव जीतने के लिए नहीं, बल्कि आने वाले दशक की राजनीतिक जमीन तैयार करने के लिए लिए जाते हैं। कांग्रेस में इन दिनों जो हलचल दिखाई दे रही है,कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएँ, डीके शिवकुमार को आगे बढ़ाने की रणनीति, राजस्थान में सचिन पायलट की बढ़ती सक्रियता, उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के साथ संतुलित तालमेल, और आंध्र प्रदेश में जगन मोहन रेड्डी से संभावित समीकरण यह सब केवल राज्य स्तरीय बदलाव नहीं हैं। यह 2029 की बड़ी राजनीतिक तैयारी का संकेत है।
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इस पूरी रणनीति के केंद्र में यदि कोई चेहरा दिखाई देता है, तो वह राहुल गांधी का है। पिछले कुछ वर्षों में राहुल गांधी ने जिस तरह खुद को केवल एक नेता नहीं, बल्कि विचार और वैकल्पिक राजनीति के प्रतीक के रूप में स्थापित करने की कोशिश की है, उसने कांग्रेस की दिशा बदल दी है।
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भारत जोड़ो यात्रा और न्याय यात्रा के जरिए राहुल गांधी ने देश के अलग-अलग वर्गों से सीधा संवाद स्थापित किया। इसका असर अब संगठनात्मक फैसलों में भी दिखाई देने लगा है। कांग्रेस अब केवल पुराने समीकरणों पर निर्भर रहने के बजाय युवा नेतृत्व, क्षेत्रीय संतुलन और गठबंधन आधारित राजनीति की ओर बढ़ती दिख रही है।
कर्नाटक में डीके शिवकुमार को आगे लाने की चर्चा केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि दक्षिण भारत में कांग्रेस को और मजबूत करने की रणनीति मानी जा रही है। राजस्थान में सचिन पायलट को महत्व देना युवा वोटरों और नई पीढ़ी के नेताओं को संदेश देने जैसा है कि पार्टी अब बदलाव से पीछे हटने वाली नहीं।
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उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के साथ तालमेल बनाए रखना भी राहुल गांधी की व्यावहारिक राजनीति को दर्शाता है। कांग्रेस समझ चुकी है कि भाजपा जैसी विशाल चुनावी मशीनरी का मुकाबला केवल अहंकार से नहीं, बल्कि मजबूत विपक्षी एकता से किया जा सकता है।
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आंध्र प्रदेश में संभावित नए समीकरण भी इसी सोच का हिस्सा माने जा रहे हैं। कांग्रेस अब टकराव की राजनीति के बजाय रणनीतिक साझेदारी के रास्ते पर चलती दिखाई दे रही है।
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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी अब केवल विपक्ष के नेता नहीं रहना चाहते, बल्कि वे कांग्रेस को 2029 तक एक वैचारिक और संगठनात्मक रूप से मजबूत विकल्प के तौर पर खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं। यही वजह है कि पार्टी में लिए जा रहे फैसले तात्कालिक राजनीति से आगे जाकर दीर्घकालिक दृष्टि के साथ जुड़े नजर आते हैं।
कांग्रेस की यह नई राजनीति एक संदेश देती है, कि पार्टी अब सिर्फ सत्ता वापसी नहीं, बल्कि नए भारत की नई राजनीतिक संरचना तैयार करने की कोशिश में जुटी है। और इस पूरी पटकथा के केंद्र में राहुल गांधी का बदला हुआ राजनीतिक व्यक्तित्व सबसे अहम भूमिका निभाता दिखाई दे रहा है।
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